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कर्म प्रधान विश्व रचि राखा

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गुरु से कपट मित्र से चोरी(हेराफेरी) या हो अंधा या हो कोढ़ी।। कर्म का फल जाता नहीं , सुदामा के एक मुट्ठी चने की हेराफेरी ने  ही जीवन भर की दरिद्रता दी , जबकि परम ज्ञानी परम भक्त तत्ववेत्ता थे।  साधारण मनुष्य कर्म फल से पीछा कैसे छुड़ा सकता है? फिर भी मनुष्य हेराफेरी से बाज़ नहीं आता है। अपनी मूर्खता और अज्ञानता को बुद्धिमानी समझ नित हेराफेरी कर जीवन पर बोझ बढ़ाता जाता है। स्वर्ग हो या नर्क सब यहीं है।   कर्म प्रधान विश्व रुचि राखा ।। जो जस करहि, सो तब फल चाखा।। अतः सन्मार्ग का ही अनुसरण करना जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। क्यों कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन। जैसी होगी शुद्धि,  वैसी होगी बुद्धि। जिस तरह एक सड़ा हुआ फल पूरी पेटी के फलों को सड़ा देता है, ठीक उसी तरह गलत ढंग से कमाया  या बचाया हुआ एक रूपया भी किसी न किसी तरह बर्बादी की ओर खींच ले जाता है और लाखों  का धन डुबा देता है और फिर लोगों को कहते सुना है न जाने ईश्वर हमें क्यों कष्ट दे रहा है ?हमने तो कुछ किया नहीं। जबकि मूल में कारण सिर्फ और सिर्फ होता है संचित कर्मों का परिणाम, जिसे ज्ञा...

भारतीय 16 संस्कार इनमें से कितने होते हैं आपके घरों में?

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1. सोलह संस्कारों का विस्तृत वर्णन 1. गर्भाधान संस्कार यह पहला संस्कार है, जो दंपत्ति के शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य श्रेष्ठ संतति का जन्म सुनिश्चित करना है। 2. पुंसवन संस्कार गर्भधारण के तीसरे महीने में किया जाने वाला यह संस्कार शिशु की रक्षा और माँ के स्वास्थ्य के लिए होता है। 3. सीमन्तोन्नयन संस्कार सीमंतोन्नयन संस्कार (यानी गोद भराई) जिसे लोगों ने  सिने स्टारों को टोपी कर कर के केवल प्रदर्शन का रूप बना दिया। है। संस्कार की प्रक्रिया 1. ससुराल पक्ष द्वारा वैदिक विधि विधान से गर्भस्थ शिशु और मां की सुरक्षा हेतु पूजा और मंत्रोच्चार:। माँ को पवित्र वस्त्र पहनाए जाते हैं। वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। देवताओं से माँ और शिशु की सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है। घर के बुजुर्ग और पुरोहित द्वारा श्रीफल सूखे मेवा  से गोद भरी जाती है। 2. बाल संवारने की रस्म: पति अपनी पत्नी के बालों को संवारता है। यह दांपत्य प्रेम और सहयोग का प्रतीक है। 3. अतिथियों का स्वागत: परिवार और मित्र माँ को आशीर्वाद देते हैं पोष्टिक खाद्य वस्तुओं का उपहार दिय...

वंदना सभा की वैज्ञानिकता

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  * हमारी वंदना सभा है पूर्ण वैज्ञानिक सभी विद्यालयों में अपने-अपने तरह की प्रार्थनाएं वंदनाएं होती हैं परंतु विद्या भारती की वंदना सभा की जो पद्धति है वह पूर्णतया वैज्ञानिक है व्यवहारिक है। अगर इसके वैज्ञानिक पक्ष पर विचार किया जाए तो सुखासन या पद्मासन अवस्था में वंदना की जो स्थिति है उसके पीछे शरीर विज्ञान है अध्यात्म विज्ञान है जब हम पालथी मार कर रीड की हड्डी को सीधा करके हाथ जोड़ने की स्थिति में बैठते हैं तो सीने के बीचो-बीच जो गड्ढा होता है उस गड्ढे को हाथ जोड़ने की स्थिति में जो मुद्रा बनती है दोनों अंगूठे से उसे मध्य भाग को स्पर्श किया जाता है। जहां हृदय चक्र होता है इस स्थिति में शरीर के सात चक्रों में से एक चक्र हृदय चक्र स्पंदित होता है ।पूरे शरीर का एक मंदिर जैसा आकार बनता है। पालथी मारकर सीधे बैठने पर मूलाधार चक्र जाग्रत होता है, ब्रह्मांड में घूम रही सकारात्मक ऊर्जा सिर से शरीर में प्रवेश करती है। क्योंकि हम  पालथी मार बैठे होते हैं अतः यह ऊर्जा शरीर में प्रवेश तो करती है परंतु शरीर से बाहर नहीं जाने पाती ।अर्थात वंदना सभा का जो समय होता है वह एक तरह से हमारा चार्...

11tu 2*हिंदी 2025

हिंदी कोर UT2 प्रश्न पत्र (2025-26) Class 11 – हिंदी कोर सरस्वती विद्या मंदिर कमला नगर आगरा  अधिकतम अंक: 40 निर्धारित समय : 90 Minutes  सामान्य निर्देश: निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका पालन कीजिए :- इस प्रश्न -पत्र तीन खण्ड – खंड- क, ख और ग हैं। खंड- क में अपठित बोध पर आधारित प्रश्न पूछे गये हैं। सभी प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य है। खंड- ख में अभिव्यक्ति और माध्यम पाठ्यपुस्तक के आधार पर प्रश्न पूछे गये हैं| कुछ प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए गये हैं। खंड- ग में आरोह भाग –1  एवं वितान भाग – 1 पाठ्यपुस्तकों के आधार पर प्रश्न पूछे गये हैं। कुछ प्रश्नों में आंतरिक भी विकल्प दिए गये हैं। खंड क (अपठित बोध) 1.निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (8) लोकतंत्र के तीनो पायों-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का अपना-अपना महत्त्व है, किंतु जब प्रथम दो अपने मार्ग या उद्देश्य के प्रति शिथिल होती है या संविधान के दिशा-निर्देशों की अवहेलना होती है, तो न्यायपालिका का विशेष महत्त्व हो जाता है। न्यायपालिका ही है, जो हमें आईना दिखाती है, कि...

तुलसी कृत लक्ष्मण की मूर्छा प्रसंग

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3/12/25 सरला की पाठशाला में पुनः अभ्यास  प्रसंग -लक्ष्मन की मूर्छा ,  उद्देश्य -नैतिक एवं आध्यात्मिक बोध एवं पुनरावृत्ति से  विषय परिपक्वता। शिक्षण विधि- कथा, व्याख्यान, प्रयोग प्रश्नोत्तरी। ग्रंथ -राम चरितमानस  लंका काण्ड  संकलन -आरोह 12हिंदी भाषा -अवधी। पाठ आधारित बोध प्रश्न - 1. राम का विलाप शंकर सेवा पर क्या प्रभाव पड़ा?  2. प्रथम दोहा में किन दो घटनाओं की ओर संकेत किया गया है ?यहां हनुमान किस-किस से जाने की आज्ञा मांग रहे है? 3. संपूर्ण प्रसंग में भाषा, छंद ,रस, एवं अलंकार पर विचार प्रकट कीजिए। 4."जगदंबा हरि इन सब अब चाहत कल्याण " किसका कथन है? सप्रसंग व्याख्या करें। 5.सम्पूर्ण प्रसंग अनुसार लक्ष्मण के त्याग पर प्रकाश डालें। 6.लक्ष्मण की दशा देखकर कौन मनुष्य की भांति विलाप करने लगे?करुण रस की पुष्टि में तर्क दें। 7.लक्ष्मण के अभाव में राम स्वयं की तुलना किसी किस से करते हैं? 8.करुणा के बीच वीर रस का प्रकट होने का भाव स्पष्ट करें। 9.लक्ष्मण के जी...

हिंदी कक्षा परीक्षण काव्य खंड

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1. पठित काव्यांशों को पढ़कर सटीक उत्तर लिखिए  । सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। काव्यांश के प्रत्येक प्रश्न तीन अंक के हैं। तीनों काव्यांश के प्रश्न हल करें। (क)बार-बार गर्जन वर्षण है मूसलधार, हृदय थाम लेता संसार, सुन-सुन घोर वज्र-हुंकार। अशनि-पात से शायित उन्नत शत-शत वीर, क्षत-विक्षत हत अचल-शरीर, गगन-स्पर्शी स्पर्धा-धीर। हँसते हैं छोटे पौधे लघुभार— शस्य अपार, हिल-हिल, खिल-खिल हाथ हिलाते, तुझे बुलाते, विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते। (15अंक) 1 .कवि और कविता का परिचय देते हुए कविता के मूल भाव पर प्रकाश डालिए। 2.उक्त पद्यांश के आधार पर कवि हृदय की विशेषता बताएं। 3.सिद्ध कीजिए कि बादल क्रांति के प्रतीक हैं। 4.कविता में छोटे पौधे किसके प्रतीक हैं और क्यों? 5.गगन स्पर्शी स्पर्धा किसे कहा गया है?इसका निहितार्थ लिखिए। ( ख).मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ! मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ, मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ, जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते, मैं अपने मन का गान किया करता हूँ! 1 .कवि और कविता का परिचय देते हुए कवि की व्यथा का कारण बताईए। 2..कवि ने स्नेह सुरा किसे कहा है ?व...

पहले अपने घर की सफाई आवश्यक

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  इस नवरात्रि में भारतवर्ष में स्वयंसेवकों  का डंका बज रहा है। क्योंकि आने वाली विजया दशमी को संघ का सौ वां स्थापना दिवस है। देश निर्माण और उत्थान हेतु आयोजन हो रहे हैं और लिए जा रहे हैं विविध संकल्प। पर विचारणीय यह है कि राष्ट्र की  सबसे पहली  इकाई है व्यक्ति ,जिनसे परिवार और परिवारों से राष्ट्र का निर्माण होता है। राष्ट्र निर्माण की एक कड़ी है -"सप्त शक्ति संगम,,"।गीता के दशवें अध्याय का 34 वां श्लोक इसकी सूक्ति है।जो इस प्रकार है- " कीर्ति श्रीवाक च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृति क्षमा।" भगवान श्री कृष्ण ने नारियों की सात शक्ति बताईं है- 1.- कीर्ति (यश, गरिमा,महिमा) 2.श्री  (लक्ष्मी-परिवार में सदाचार युक्त पुरुषार्थ से धनोपार्जन और संचयन) 3. वाक-(परिवार जोड़ने के लिए  स्नेह युक्त ,संयमित ,उचित, विनम्रता पूर्ण वाक्चातुर्य पूर्ण भाषा का प्रयोग।) 4.स्मृति-(छोटी से छोटी बात संस्कार रीति नीति परम्परा को याद रख संस्कृति को संवहन और परिमार्जन की शक्ति) 5-मेधा-(धारणा शक्ति,समझ, तर्कनिष्ठता, संश्लेषण विश्लेषण परिणाम बोध) 6.धृति-(धैर्य ,सहनशीलता, दृढ़ता) 7.क्षमा(स्वयं ...

अर्ध वार्षिक। मुख्य विंदु

 मुख्य विंदु -रेडियो रूपक ,नाटक,कहानी, रूपांतरण,विशेष लेखन,आलेख,फीचर, पत्र, गद्य -प्रथम पाठ से कैमरे में बंद अपाहिज,काले मेघा पानी पहलवान की ढोलक जूझ।   रेडियो रूपक  रेडियो की एक सर्जनात्मक विधा है जिसमें किसी विषय को रोचक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए आवाज़ों, संगीत, ध्वनि प्रभावों, संवादों और वास्तविक रिकॉर्डिंग का एक 'कोलाज' या समुच्चय तैयार किया जाता है .  यह तथ्यों पर आधारित होता है, लेकिन इसमें कल्पना और रचनात्मकता की पूरी गुंजाइश होती है, ताकि श्रोताओं के लिए प्रस्तुति नीरस न लगे.   रेडियो रूपक की मुख्य विशेषताएँ तथ्यों पर आधारित:   रूपक का मूल आधार वास्तविक तथ्य या घटनाएँ होती हैं.   सर्जनात्मक प्रस्तुति:   तथ्यों को आकर्षक और रोचक बनाने के लिए रचनात्मक तकनीकों का उपयोग किया जाता है.   ध्वनि-आधारित:   इसमें आवाज़ों, संगीत, और ध्वनि प्रभावों का कलात्मक प्रयोग किया जाता है.   विषयों की विविधता:   सामाजिक समस्याओं, ऐतिहासिक घटनाओं, या किसी भी विषय को गहराई से प्रस्तुत किया जा सकता है.   प्रभावी संचार:   ...