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आधार कोर्स रुपरेखा
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1 - छठी कक्षा के सभी नवीन प्रवेश वाले छात्र सभागार में वंदना हेतु बैठेंगे,हवन होगा, हवन के वाद कक्षा चार्य के साथ कक्षा में जाएंगे।कक्षा में परिचय , काउंसिल सूचना 2-4 ,7अप्रैल से कोर्स प्रारंभ। अप्रैल 2-4तक काउंसिल 2- काउंसिल 6,A,B 3.काउंसलिंग 6,C,D, 4.काउंसलिग 6-E,F 5. रविवार अवकाश 6अप्रैल अवकाश 12 का पेपर। 7-11 अप्रैल तक- पुस्तक मल्हार पाठ मातृभूमि ( क्रिया कलाप - शब्द पकड़ क्रिकेट) क्रमशः मातृभूमि, हार की जीत,और गोल पाठ काधारा प्रवाह वाचन,लेखन मिला। और बोध प्रश्न। इमला लिखाने के दौरान -(पढे हुए पैराग्राफ की इमला, में एक वाक्य एक बार ही बोलें गति कम रखें बालक की कैंचिग और एकाग्रता परखने हेतु। समझ की परख हेतु पैराग्राफ से दो तीन बोध प्रश्न।
एनसीईआरटी मल्हार कक्षा 6-पाठ- 1
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पाठ मातृभूमि कवि -सोहन लाल द्विवेदी। उत्तर -( क) (1)सिंधु (2) सभी सही (ख) मेरी समझ से सभी कथन सही हैं क्योंकि कि हमारा देश भारत है ही इतना सुंदर जहां की प्राकृतिक छटा निराली है। जहां अन्न जल की कमी नहीं ।जहां हर तरह के वनस्पति है। जहां पवित्र नदियां , ,झरने बहते हैं। जहां उत्तर में भारत मां का मुकुट हिमालय है और दक्षिण में सागर चरणों को धोता है। जहां की धरती पर देवता भी अवतार लेते हैं। जिस धरती पर राम, कृष्ण ,गौतम , अवतरित होकर विश्व को सही रुप में जीने मार्ग दिखाते हैं। सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाते हैं।गलत का विरोध करना न्याय का पक्ष लेना, मानवता के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। आ ओ मिलकर हल करें - शब्द ---------अर्थ या संदर्भ 1.हिमालय -भारत की सीमा पर फैली पर्वत श्रंखला। 2.त्रिवेणी -तीन नदियों (गंगा यमुना सरस्वती) की मिली हुई धाराओं का संगम। जिसे प्रयाग कहते हैं ।(इलाहाबाद में है) 3.मलय पवन -दक्षिण के मलयाचल पर्वत पर चलने वाली सुगंधित वायु। 4.सिंधु- समुद्र एवं...
प्राथमिक ज्ञान परख और परिमार्जन कक्षा ,- छह:,सात,विषय- हिंदी
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परख और परिमार्जन कक्षा - 1अप्रैल-प्रथम दिवस 1. स्क्रीन पर प्रदर्शित कहानी का प्रत्येक छात्र से धारा प्रवाह वाचन कराएं -धारा प्रवाह वाचन हेतु शब्द क्रिकेट क्रिया कलाप की सहायता लें। जब तक कोई छात्र वाचन कर रहा है उस दौरान बाकी छात्र लघु कथा को लिखें और प्रश्नों के उत्तर तलाश कर लिखें। अध्यापक बंधु उपरोक्त कहानी के वाचन और बोध प्रश्नो के उत्तर अवलोकित कर त्रुटियों के आधार पर छात्रों का विभाजन और शिक्षण सहायक छात्र प्रमुख निर्धारित करें । सूची बना लें । छात्र शिक्षकों के सहयोग से कमजोर छात्र को सिखाना और समान अवस्था तक लाना। अब छात्र मौन होकर पढ़ें , लिखें और दोनों अधूरी कहानी को शब्दों की सहायता से पूरा करें ।काले पैन से भरें 2अप्रेल - द्वितीय दिवस - धारा वाचन और धारा प्रवाह श्रुति लेखन आज छात्र स्क्रीन से एक नयी लघुकथा पढ़ेंगे , ध्यान रहे श्रुति लेख के दौरान अध्यापकगण वाक्यों को धीमी गति से बोलेंगे। वाक्यों को दुहराएंगे न...
पाठ हार की जीत- पुस्तक "मल्हार"
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सुदर्शन (साहित्यकार) द्वारा रचित “हार की जीत” एक प्रसिद्ध हिंदी कहानी है, जो दिखाती है कि कैसे बाबा भारती की ईमानदारी और दयालुता के कारण डाकू खड्गसिंह उनका लूटा हुआ घोड़ा वापस कर देता है। यह कहानी सिखाती है कि सच्ची जीत हृदय परिवर्तन और अच्छाई की होती है, न कि भौतिक वस्तुओं को हासिल करने में। कहानी के मुख्य बिंदु: मुख्य पात्र: बाबा भारती (साधु) और डाकू खड्गसिंह. सार: डाकू खड्गसिंह ने बाबा भारती का सुल्तान नामक घोड़ा छल से छीन लिया, लेकिन बाबा भारती के नेक शब्दों (“इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना”) ने डाकू का हृदय बदल दिया, जिससे उसने घोड़ा वापस कर दिया. नैतिक जीत: बाबा भारती ने घोड़ा खोकर भी खड्गसिंह की इंसानियत को जीत लिया, जिसे “हार की जीत” कहा गया है. संदेश: परोपकार, ईमानदारी और विश्वास के सामने दुष्टता भी हार जाती है.! प्रश्न अभ्यास मेरी समझ से आइए, अब हम ‘हार की जीत’ कहानी को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं। क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए— प्रश्न 1. सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ? • बाबा भारती क...
राम लक्ष्मण परशुराम संवाद
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प्रथम पद्यांश चौपाई - नाथ संभुधनु भजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।। आयेसु काह कहिय किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।। सेवक हो जो करें सेवकाई । अरि करनी परि करिय लराई।। सुनहुं राम जेहि सिवधनु तोरा। सहस्रबाहु सम हो रिपु मोरा।। सो बिलगाइ बिहाइ समाजा। नत मारे जेहंइ सब राजा।। सुनि मुनि वचन लखन मुसकाने । बोले परसु धरहि अवमाने।। बहु धनुही तोरी लरिकाई। कबहु न अब रिस कीन्हि गोसाईं।। तेहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुन रिसाय कह भृगुकुल केतु।। दो ० - रे नृप बालक काल बस, बोलत तोहि न संभार । धनुही सम त्ररिपुरारि धनु, विदित सकल संसार। सरल भावार्थ- परशुराम के पूछे जाने पर राम ने विनम्रतापूर्वक कहा- हे नाथ-धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा ।उस दास के लिए क्या आदेश है। राम की यह विनम्रता पूर्ण वाणी सुनकर परशुराम बोले -सेवक वह होता है ,जो सेवा करता है। दुश्मन की करनी करने वाले से तो युद्ध की अपेक्षा है। जिसने भी यह धनुष तोड़ा है मेरे लिए वह सहस्त्रबाहु के समान शत्रु है। मैं उस...