संपादकीय
मानव देह में जो स्थान मेरुदंड का है परिवार में वहीं स्थान नारी का है। नारी को यदि घर परिवार, समाज और संसार रूपी गाड़ी की धुरी कहा जाय तो अतिशयोक्ति न होगी। वही है जो अपने परिवार की पाठशाला में चाहे तो राम ,कृष्ण, राणा शिवाजी से अनमोल रत्न और सीता सावित्री दुर्गा सरस्वती जैसी मणियों को समाज की माला में पिरो दें और देश का निर्माण कर देंऔर यदि परवरिश में चूक हो जाए तो दुर्योधन और दुशासन जैसे दुश्चरित्र कुपुत्र पैदा कर महाभारत कथा और संसार के विनाश का कारण बन जाए। इसी विचार और इसी चिंता के चलते विद्या भारती की परिकल्पना*सप्त शक्ति संगम* कार्यक्रमों का देश भर के सरस्वती विद्या मंदिर विद्यालयो में आयोजन हुआ । जिसमें सुषुप्तावस्था में विद्यमान नारियों की सात शक्तियों को पुनः जाग्रत करने सराहनीय प्रयास किया गया। हर्ष का विषय यह रहा कि अपने विद्यालय सरस्वती विद्या मंदिर कमला नगर आगरा में इसकी भव्य आयोजन चार श्रंखला रहीं जिसमें दो हजार विद्यार्थियों की माताओं की सहभागिता रही। आदरणीय दीदी रेखा चूड़ा समा विद्या भारती अखिल भारतीय संस्थान के शप्त शक्ति संगम की प्रभारी उत...