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बादल राग

'बादल राग' — पाठ का सार (Summary) 1. विषय-वस्तु और मूल भाव 'बादल राग' प्रगतिवादी चेतना से ओत-प्रोत कविता है। इसमें निराला जी ने बादलों को केवल जल बरसाने वाला प्राकृतिक रूप न मानकर सामाजिक क्रांति, बदलाव और नवसृजन का प्रतीक माना है। कवि ने समाज के दो प्रमुख वर्गों—शोषक वर्ग (पूँजीपति) और शोषित वर्ग (किसान एवं मजदूर) के बीच के अंतर को बादलों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। 2. मुख्य बिंदु संसार की अस्थिर सुख-छाया पर क्रांति की आशंका: कवि कहते हैं कि इस संसार में सुख अस्थाई है। जिस प्रकार सुख के ऊपर हमेशा दुःख की छाया मंडराती रहती है, उसी प्रकार शोषक वर्ग के सुख-वैभव पर हमेशा क्रांति (बादलों) की आशंका बनी रहती है। क्रांतिदूत के रूप में बादल: बादल आकाश में तैरती हुई रणतरी (युद्ध की नाव) के समान प्रतीत होते हैं। उनकी गगनभेदी गर्जना और मूसलाधार वर्षा से धरती की भीषण गर्मी से व्याकुल शोषित जनता को राहत मिलती है और नया जीवन मिलता है। शोषक वर्ग का भय (आतंक-भवन): जब क्रांति रूपी बादल गरजते हैं, तो धनी और पूँजीपति वर्ग के ऊँचे-ऊँचे महल ('अट्टालिका') उन्हें सुख के केंद्र नही...

जामुन का पेड़

पाठ: जामुन का पेड़ (बहुविकल्पीय प्रश्न) 1. 'जामुन का पेड़' पाठ किस विधा की रचना है? (क) एकांकी (ख) हास्य-व्यंग्य कथा (ग) निबंध (घ) संस्मरण 2. रात को आए आँधी-तूफान में जामुन का पेड़ कहाँ गिरा था? (क) अस्पताल के प्रांगण में (ख) सेक्रेटेरियट (सचिवालय) के लॉन में (ग) स्कूल के मैदान में (घ) पार्क में 3. जामुन का पेड़ गिरने से उसके नीचे कौन दब गया था? (क) एक क्लर्क (ख) एक माली (ग) एक दबा हुआ आदमी (कवि) (घ) एक अफ़सर 4. जामुन के पेड़ के गिरने पर क्लर्क किस बात का अफ़सोस जता रहे थे? (क) दबे हुए आदमी की चोट का (ख) पेड़ के रसीले जामुनों का (ग) सेक्रेटेरियट के नुकसान का (घ) माली की मेहनत का 5. दबे हुए आदमी को सबसे पहले किसने खाना खिलाया और उसकी देखभाल की? (क) सुपरिंटेंडेंट ने (ख) माली ने (ग) चपरासी ने (घ) अंडर-सेक्रेटरी ने 6. पेड़ हटाने की फ़ाइल सबसे पहले किस विभाग में भेजी गई? (क) कृषि विभाग (Agriculture Department) (ख) उद्यान विभाग (Horticulture Department) (ग) व्यापार विभाग (Commercial Department) (घ) मेडिकल विभाग (Medical Department) 7. एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने पेड़ हटाने की ज़िम्मेदा...

अर्धवार्षिक परीक्षा प्रश्न पत्र हल 12 क्लास

 4. क.आधार कहानी नाटक मूल स्वरूपयह पठ्य या श्रव्य विधा है (इसे पढ़ा या सुना जाता है)।यह दृश्य-श्रव्य विधा है (इसे रंगमंच पर देखा और सुना जाता है)। प्रस्तुतीकरणइसमें लेखक घटना या चरित्र का वर्णन करता है।इसमें पात्र अभिनय और संवादों के माध्यम से कथा प्रस्तुत करते हैं। कथानक का विस्तारइसमें देशकाल, वातावरण और चरित्र का लंबा वर्णन संभव है।इसमें दृश्य सीमित होते हैं और वर्णन की जगह क्रिया-व्यापार (action) मुख्य होता है। समय सीमाइसे अपनी गति से कभी भी पढ़ा जा सकता है।यह समय सीमा से बँधा होता है (सामान्यतः 2-3 घंटे में संपन्न होना आवश्यक है)। तत्वइसमें 6 मुख्य तत्व होते हैं: कथानक, पात्र, संवाद, देशकाल, उद्देश्य और शैली।इसमें कहानी के तत्वों के साथ-साथ रंगमंचता (Stagecraft) और अभिनेयता (Actability) अनिवार्य है। पात्रों की संख्याकहानी में पात्रों की संख्या सीमित या अधिक हो सकती है।नाटक में मंच को ध्यान में रखकर पात्रों की संख्या नियंत्रित रखी जाती है। ख.फ्रीलांसर पत्रकार (Freelance Journalist) वह स्वतंत्र पत्रकार होता है जो किसी एक मीडिया संस्थान (जैसे समाचार पत्र, टीवी चैनल या वेबसाइट) का...

तुलसी दास कवितावली और लक्ष्मण मूर्छा

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1. पहला पद (कवित्त): "किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिकारी, भाट..." मूल पंक्ति: किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिकारी, भाट, चाकर, चपल नट, चोर, चार, बेटकी। पढत, गुनत, चढत गिरि, अटत गहन गन अहन अहेतकी। ऊँचे-नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटी। तुलसी बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें, आगि बडवागि तें बडी है आगि पेट की॥ प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियों में तुलसीदास जी ने अपने युग की भीषण भुखमरी और पेट की अग्नि शांत करने के लिए विवश मनुष्यों की दयनीय स्थिति का चित्रण किया है। व्याख्या: तुलसीदास कहते हैं कि मजदूर (किसबी), किसान परिवार, व्यापारी (बनिक), भिखारी, भाट (प्रशंसा करने वाले), नौकर (चाकर), चंचल नट, चोर, गुप्तचर (चार) और जादूगर—ये सभी लोग केवल अपने पेट की आग बुझाने के प्रयास में लगे हैं। लोग पेट भरने के लिए पढ़ते हैं, कलाएँ सीखते हैं, पहाड़ों पर चढ़ते हैं और शिकार की खोज में दिनभर घने जंगलों में भटकते रहते हैं। पेट की भूख शांत करने के लिए मनुष्य धर्म-अधर्म और अच्छे-बुरे सब काम करता है। परिस्थिति इतनी दर्दनाक है कि लोग अपने बच्चों (बेटा-बेटी) तक को बेचने के लिए मजबूर हो जा...

पद परिचय

पद परिचय (Word Analysis / Parsing) हिंदी व्याकरण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। किसी वाक्य में आए प्रत्येक शब्द (पद) का व्याकरणिक दृष्टिकोण से पूर्ण परिचय देना ही पद परिचय कहलाता है। जिस प्रकार हम अपना परिचय देते समय अपना नाम, लिंग, संबंध आदि बताते हैं, उसी प्रकार वाक्य के प्रत्येक पद का लिंग, वचन, कारक, पुरुष, काल तथा अन्य पदों से संबंध बताना पद परिचय है। वाक्य में 'शब्द' और 'पद' का अंतर शब्द: भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है। (जैसे: राम, पुस्तक, पढ़ना) पद: जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों में बँधकर वाक्य में प्रयुक्त होता है, तो वह 'पद' बन जाता है। (जैसे: "राम पुस्तक पढ़ता है।" - यहाँ तीनों शब्द 'पद' हैं।) पद-परिचय के प्रमुख भेद एवं उनके बिंदु पद परिचय देने के लिए विकारी (परिवर्तनशील) और अविकारी (अपरिवर्तनशील) सभी व्याकरणिक बिंदुओं का ज्ञान होना आवश्यक है: 1. संज्ञा (Noun) भेद: व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, समूहवाचक, द्रव्यवाचक। आवश्यक बिंदु: लिंग (पुल्लिंग/स्त्रीलिंग), वचन (एकवचन/बहुवचन), कारक (कर्ता, कर्म, करण आदि), क्रिया के साथ संबंध...

पाठ्य योजना 2/9/26

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विषय अध्यापिका -सरला भारद्वाज  हिंदी पाठ्य योजना  कक्षा- 6 विषय हिंदी व्याकरण  उप-विषय -विशेषण समय -45+45 मिनट दो कालांश  शिक्षण विधि - गतिविधि ,क्रियाकलाप, कविता गायन,उदाहरण प्रदर्शन ,प्रयोग, व्याख्यान।  ************************************"**** कक्षा में जादुई झोले के साथ प्रवेश,  झोले में टमाटर, नींबू, मुलायम रुमाल, कुछ पत्थर फूल , चित्र,त्रिभुज सुन्दर चांद,ठंडा पानी, गर्म चाय। टमाटर खाने का अभिनय  प्रश्न के साथ क्रिया कलाप- कुछ याद आया? चलो गाते हैं - अहा टमाटर ------    गतिविधि  प्रस्तावना   प्रश्न -1. गीत में कौन सी वस्तु मजेदार है?         2. टमाटर का रंग कैसा है?         3.खाने में टमाटर का स्वाद कैसा होता है?         4.ऊपर से टोकरी में कितने टमाटर  दिख रहे हैं?                        अच्छा जी आपने कहा -टमाटर मजेदार ।                     ...