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रुबाइया

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  : पाठ के अभ्यास प्रश्न और उत्तर प्रश्‍न 1. शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है? उत्तर: शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर यह भाव व्यंजित करना चाहता है कि रक्षाबंधन का त्योहार सावन के महीने में आता है। इस समय आसमान में काले बादल छाए रहते हैं और बीच-बीच में बिजली चमकती है। जिस प्रकार आकाश में बिजली कौंधती है, ठीक उसी प्रकार भाई की कलाई पर बंधी राखी के चमकीले लच्छे चमकते हैं। बिजली की चमक प्रकाश व सत्य को प्रकट करती है और राखी के लच्छे भाई-बहन के पवित्र व अटूट प्रेम के बंधन को दर्शाते हैं।   प्रश्‍न 4. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें:   (क) गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता: 'गोदी के चाँद' का अर्थ माँ की गोद में खेल रहा नन्हा शिशु है और 'गगन के चाँद' का अर्थ आसमान का चंद्रमा है। माँ के लिए उसका बच्चा चाँद के समान सुंदर और प्यारा होता है। आसमान का चाँद बच्चे को आकर्षित करता है तथा बच्चा उसे पाने के लिए मचल उठता है, जैसे सूरदास के पदों में बालक कृष्ण चंद्रमा को खिलौने के रूप में मांगते हैं। ...

दंतुरित मुस्कान

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यह दंतुरित मुस्कान तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान मृतक में भी डाल देगी जान! धूल-धूसरित तुम्हारे गात, छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात! परस पाकर तुम्हारा ही प्राण पिघلकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण! छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल? तुम मुझे पाए नहीं पहचान, देखते ही रहोगे अनिमेश! थक गए हो आँखें फेरते जो उत्पाद? बच गए हो यदि मेरा कीड़ा-व्यापार तो तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान! धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य! پर्ची हुई तुमसे कहीं की पुतली मधुपर्क पाकर तुम्हारा ही अमर तुमसे हो गए हम दोनों के बीच का यह परिचय अतिथि तुम प्रिय! तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान, छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल? धन्य तुम, और संपर्क की उँगलियाँ माँ की मधुपर्क-पूतली देखते ही रहोगे अनिमेश! धन्य तुम, अतिथि तुम्हारा प्यार! कविता का मूल भाव: इस कविता में कवि ने एक छोटे बच्चे की मनमोहक, नए-नए दाँतों वाली मुस्कान (दंतुरित मुस्कान) का बहुत ही सुंदर और सजीव चित्रण किया है। कवि का मानना है कि बच्चे की यह निष्कपट मुस्कान उदास से उदास या निराश व्यक्ति (मृतक)...

अक्क महादेवी वचन

कक्षा 11वीं की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग-2’ में संकलित कवयित्री अक्क महादेवी के दोनों वचनों (कविता) के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर नीचे दिए गए हैं: ​ प्रश्न-अभ्यास के उत्तर ​ प्र. 1. लक्ष्य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधक होती हैं—इसके संदर्भ में अपने तर्क दीजिए। ​ उत्तर: कवयित्री के अनुसार, इंद्रियों का मुख्य स्वभाव अपनी तृप्ति और भोग-विलास की तलाश करना है। जब मनुष्य इंद्रियों के सुख-चैन और स्वाद में उलझ जाता है, तो वह अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटक जाता है। विशेष रूप से ईश्वर प्राप्ति या आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग में हमारी इंद्रियाँ (आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा) सबसे बड़ी बाधा बनती हैं, क्योंकि वे साधक को सांसारिक मोह-माया और विषय-वासनाओं के जाल में फँसाए रखती हैं। अतः लक्ष्य तक पहुँचने के लिए इंद्रियों पर नियंत्रण रखना अत्यंत आवश्यक है। ​ प्र. 2. ‘ओ चराचर! मत चूक अवसर’—इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। ​ उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री समस्त संसार (चराचर) को यह चेतावनी और प्रेरणा दे रही है कि मनुष्य को बहुत भाग्य से यह दुर्लभ मानव जीवन प्राप्त हुआ है। जन्म-मरण के चक्र ...

सारांश पाठ- परीक्षा

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हिन्दी की पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ में संकलित प्रसिद्ध कहानी ‘परीक्षा’ (मूल लेखक: मुंशी प्रेमचंद) का सारांश । ​ पाठ: परीक्षा – सारांश ​ 1. दीवान सुजानसिंह का निर्णय: देवगढ़ रियासत के बूढ़े और अनुभवी दीवान सरदार सुजानसिंह को अपनी ढलती उम्र के कारण यह चिंता सताने लगी कि कहीं राज-काज में कोई भूल-चूक न हो जाए और उनकी जीवनभर की कमाई (नेकनामी) पर कोई दाग लग जाए। उन्होंने राजा साहब से विनती कर अपने पद से मुक्त होने की अनुमति मांगी। राजा साहब ने उनकी बात मान ली, लेकिन उनके सामने एक शर्त रखी कि नए दीवान का चुनाव वे खुद ही करेंगे। ​ 2. देश भर से उम्मीदवारों का आना: नया दीवान चुनने के लिए एक विज्ञापन निकाला गया। देश के कोने-कोने से सुशिक्षित, युवा, और बड़े-बड़े डिग्रियां (ग्रेजुएट) प्राप्त लोग देवगढ़ पहुँचने लगे। हर कोई अपनी श्रेष्ठता, बुद्धिमत्ता और योग्यता साबित करने की होड़ में था। सबने दिखावे के तौर पर बहुत नम्रता, सदाचार और सज्जनता का आचरण अपना लिया था, ताकि बूढ़े दीवान की नजरों में अच्छे बन सकें। लेकिन, अनुभवी सुजानसिंह इन सबकी असलियत भाप रहे थे। ​ 3. हॉकी का खेल और असली प...

प्रयोगात्मक फाइल हेतु प्रश्न बैंक

आत्म-परिचय' और 'एक गीत' से संबंधित 50 प्रश्न और उनके दो विकल्प ​ 'आत्म-परिचय' कविता के रचयिता कौन हैं? ​(क) हरिवंश राय बच्चन ​(ख) सुमित्रानंदन पंत ​ हरिवंश राय बच्चन का जन्म कब और कहाँ हुआ था? ​(क) 1907, इलाहाबाद (प्रयागराज) ​(ख) 1900, वाराणसी ​ 'आत्म-परिचय' कविता बच्चन जी के किस काव्य संग्रह से ली गई है? ​(क) निशा कानिमंत्रण ​(ख) मधुशाला ​ हरिवंश राय बच्चन की सबसे प्रसिद्ध रचना कौन सी है, जो उन्होंने 1935 में लिखी? ​(क) मधुशाला ​(ख) यामा ​ बच्चन जी को हिंदी साहित्य में किस वाद का प्रवर्तक माना जाता है? ​(क) हालावाद ​(ख) छायावाद ​ 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' किसकी आत्मकथा है? ​(क) हरिवंश राय बच्चन ​(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ​ कवि 'जग जीवन का भार लिए फिरने' से क्या कहना चाहता है? ​(क) जीवन की जिम्मेदारियों और दुखों का बोझ ​(ख) व्यापार की चिंता ​ कवि ने किस चीज़ का पान करने की बात कही है? ​(क) स्नेह-सुरा (प्रेम रूपी मदिरा) ​(ख) विष ​ 'स्नेह-सुरा' से क्या तात्पर्य है? ​(क) प्रेम रूपी मदिरा ​(ख) कड़वी दवा ​ कवि संसार को किस प...

हिंदी 12th क्लास ब्लूप्रिंट

क्रमांक विषय / पुस्तक का नाम विवरण कुल अंक 1 अपठित बोध अपठित गद्यांश (10 अंक) व अपठित काव्यांश (5 अंक) पर आधारित MCQs 15 2 अभिव्यक्ति और माध्यम जनसंचार माध्यम और रचनात्मक लेखन पर आधारित MCQs 05 3 आरोह (भाग-2) पठित काव्यांश (5 अंक) व पठित गद्यांश (5 अंक) पर आधारित MCQs 10 4 वितान (भाग-2) वितान के पठित पाठों पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न खंड - ब: वर्णनात्मक / विषयनिष्ठ प्रश्न (40 अंक) क्रमांकविषय / पुस्तक का नामविवरणकुल अंक 1रचनात्मक लेखनअप्रत्याशित विषयों पर रचनात्मक लेख (6), पत्र लेखन (5), तथा कविता/नाटक/कहानी की रचना प्रक्रिया पर प्रश्न (9)20 2आरोह (भाग-2)काव्य खंड: प्रश्न-उत्तर (लघु/दीर्घ उत्तरीय) (10 अंक) गद्य खंड: प्रश्न-उत्तर (लघु/दीर्घ उत्तरीय) (10 अंक) 10

संस्कृति

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प्रश्न 1. लेखक की दृष्टि में 'सभ्यता' और 'संस्कृति' की सही समझ अब तक क्यों नहीं बन पाई है? उत्तर: लेखक की दृष्टि में सभ्यता और संस्कृति शब्दों का प्रयोग बहुत अधिक और मनमाने ढंग से होता है। इनके साथ भौतिक, आध्यात्मिक जैसे अनेक विशेषण जोड़ दिए जाते हैं, जिससे इन शब्दों का मूल अर्थ और अधिक भ्रमित हो जाता है। लोग इन दोनों को एक ही मान लेते हैं या इनके सटीक अर्थ को लेकर स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए इनकी सही समझ अब तक नहीं बन पाई है।   प्रश्न 2. आग की खोज एक बहुत बड़ी खोज क्यों मानी जाती है? इस खोज के पीछे रही प्रेरणा के मुख्य स्रोत क्या रहे होंगे? उत्तर: आग की खोज मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोज मानी जाती है क्योंकि इसने मनुष्य को असभ्य से सभ्य बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाई। इस खोज के पीछे मुख्य प्रेरणाएँ निम्नलिखित रही होंगी:   पेट की भूख शांत करने के लिए कच्चा मांस पकाने की आवश्यकता।   कड़ाके की ठंड (शीतोष्ण) से बचने और शरीर को ऊष्मा प्राप्त करने की जरूरत। घने अंधेरे में देखने तथा खतरनाक और हिंसक जंगली जानवरों से अपनी रक्षा करने की प्रेरणा।  प्रश्न 3...