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पहेली कविता, उत्तर खोजें

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 बहुत कुछ कह कर भी मौन हूं ,  पहचाना मुझे  , मैं कौन हूं  ? मेरे  किस पर्यायवाची से   राम को भी जाना जाता है?  मुझसे जन्मी है लक्ष्मी ,  किन नामों से जाना जाता है?  मेरे नाम से लक्ष्मी का नाम तो बताओ?  किस देश का गौरवान्वित प्रतीक  हूं मैं,  जरा यह भी तो बतलाओ ? देश के गौरवान्वित प्रतीकों में क्यों है मेरा स्थान?  मेरे किस गुण से दिया गया है  ये मान?  जानो बूझो  समझो और और बतलाओ!  भारत के सपूत हो तुम,  आचरण से दिखलाओ!  जल में  "ज "जोड़कर मेरे नाम के पर्याय बनाओ।  शब्दो की तिकड़म  से ज्ञानी बन जाओ। राजीव और इंदीवर का शाब्दिक अर्थ भी बतलाओ, सभी उत्तर खोजकर, पहेली विजेता बन जाओ। सरला भारद्वाज 22/12/2022 10:30am नोट -सभी प्रश्नो के उत्तर तलाशें, क्यों कि हर पंक्ति में पहेली है 

सृष्टि सर्जना शक्ति "नारी तू नारायणी"

संसार की रचना दो तत्वों से हुई है एक है प्रकृति और दूसरा है पुरुष। अर्थात शिव और शक्ति। शक्ति के बिना शिव अधूरे। विचार किया जाय तो सृष्टि की सर्जना शक्ति में स्त्री तत्व का बाहुल्य है प्रधानता है। यथा - पंचमहाभूत में स्त्री तत्व का बाहुल्य है। इस शरीर का निर्माण जिन पांच तत्वों के संतुलित संयोजन से हुआ है वे हैं -पृथ्वी,जल ,आकाश,अग्नि,वायु। जिनमें तीन स्त्री दो पुरुष हैं।इसी प्रकार  पांच ज्ञानेन्द्रियों ,कर्मेंद्रियों में नाक ,आंख, त्वचा, जीभ, बुध्दि, वाणी, आदि भी स्त्री तत्व  प्रधान  हैं  मानव अंग  जीवन क्रिया , व्यवहार  विशेष में भी स्त्रीलिंग शब्द प्रधान है यथा- मूंछ, शिखा, वेणी, चोटी ठुडडी,भौंह,नाक,आंख,पलक,जीभ,बांह,टांग, अंगुलियां मुट्ठी,बुध्दि,वाणी, श्वास, धड़कन,  इज्जत, प्रतिष्ठा, बात,  चाल, जय ,पराजय, इच्छा  , आत्मा, सफलता ,विफलता,शक्ति ,सामर्थ्य, स्त्री  लिंग शब्द ही  हैं। संसार की संरचना, सृष्टि नारी से आरंभ नारी पर अंत। भारतीय संस्कृति और जीवन शैली स्त्री को ही सर्वोपरि रखकर चलती हैं तभी तो कहा जाता है- "तुम बिन यज्ञ न होव...

ये आवश्यक जानकारी खुद तक न रखें दूसरों को भी अवेयर करें

 *आवश्यक मेसेज* सभी यह information पढ़े और शेयर करें। *शरीर में ब्लड प्रेशर.* *120 / 80 -- Normal *  *130 / 85 -- Normal (Control)* *140 / 90 -- High थोड़ा बढ़ा हुआ*  *150 / 95 -- Very High बहुत ज्यादा* *Oxygen Leval)* *ऑक्सिजन लेव्हल* ऑक्सिजन ऑक्सिमीटर से चेक करने पर.. *94 - Normal * *95, 96, 97 se 100 oxygen level बहुत अच्छा.* *90 ते 93 ऑक्सिजन लेव्हल जरा कम* *80 ते 89 ऑक्सिजन लेव्हल बहुत कम* डॉक्टर की सलाह पर एडमिट होना चाहिए. *PULSE*  *72 Per Minute (Standard) बहुत अच्छा.* *60 --- 80 P.M. (Normal) मध्यम* *90 ते 120 Pulse बढ़ा हुआ*  *TEMPERATURE* डिजिटल थरमामीटर से चेक करने पर . *92 ते 98.6 F (Fever) तक बुखार नही (Normal)* *99.0 F थोडा बुखार* *100 .F से 102 F ज्यादा बुखार* HRCT या chest CT SCAN करने पर. 1. HRCT score: 0 - 8 (Mild Infection).  2.HRCT score: 9 - 18 (Moderate Infection).  3. HRCT score: 19 - 25 गंभीर (Severe Infection) .  👇 उपचार : 1. Mild infections में नार्मल मेडिसिन से ठीक हो सकते है. 2. सेवियर इंफेक्शन के लिए ऑक्सिजन और वेंटि...

जनसंचार और मध्यम महत्वपूर्ण प्रश्न

अति महत्वपूर्ण प्रश्न प्रश्न 1: प्रमुख जनसंचार माध्यम कौन-से हैं? उत्तर – जनसंचार के प्रमुख माध्यम हैं-समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, फ़िल्म, टेलीविजन, रेडियो, टेलीफोन, इंटरनेट, पुस्तकें आदि। प्रश्न 2: प्रिंट माध्यम से आप क्या समझते हैं? उत्तर – संचार के जो साधन प्रिंट अर्थात छपे रूप में लोगों तक सूचनाएँ पहुँचाते हैं, उन्हें प्रिंट (मुद्रित) माध्यम कहा जाता है। प्रश्न 3: प्रिंट माध्यम के दो प्रमुख साधन कौन-कौन-से हैं? उत्तर – प्रिंट माध्यम के दो प्रमुख साधन है- समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ प्रश्न 4: प्रिंट मीडिया (माध्यम) का महत्व हमेशा क्यों बना रहेगा? उत्तर – वाणी, विचारों, सूचनाओं, समाचारों आदि को लिखित रूप में रिकॉर्ड करने का आरंभिक साधन होने के कारण प्रिंट मीड़िया का महत्त्व हमेशा बना रहेगा। प्रश्न 5: पत्रकारिता किसे कहते हैं? उत्तर – प्रिंट (मुद्रित), रेडियो, टेलीविजन या इंटरनेट किसी भी माध्यम से खबरों के संचार को पत्रकारिता कहते हैं। प्रश्न 6: भारत में अखबारी पत्रकारिता की शुरुआत कब और कहाँ से हुई? उत्तर – भारत में अखबारी पत्रकारिता की शुरुआत सन 1780 में जेम्स ऑगस्ट हिकी के ‘बंगाल गजट’ ...

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा

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गुरु से कपट मित्र से चोरी(हेराफेरी) या हो अंधा या हो कोढ़ी।। कर्म का फल जाता नहीं , सुदामा के एक मुट्ठी चने की हेराफेरी ने  ही जीवन भर की दरिद्रता दी , जबकि परम ज्ञानी परम भक्त तत्ववेत्ता थे।  साधारण मनुष्य कर्म फल से पीछा कैसे छुड़ा सकता है? फिर भी मनुष्य हेराफेरी से बाज़ नहीं आता है। अपनी मूर्खता और अज्ञानता को बुद्धिमानी समझ नित हेराफेरी कर जीवन पर बोझ बढ़ाता जाता है। स्वर्ग हो या नर्क सब यहीं है।   कर्म प्रधान विश्व रुचि राखा ।। जो जस करहि, सो तब फल चाखा।। अतः सन्मार्ग का ही अनुसरण करना जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। क्यों कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन। जैसी होगी शुद्धि,  वैसी होगी बुद्धि। जिस तरह एक सड़ा हुआ फल पूरी पेटी के फलों को सड़ा देता है, ठीक उसी तरह गलत ढंग से कमाया  या बचाया हुआ एक रूपया भी किसी न किसी तरह बर्बादी की ओर खींच ले जाता है और लाखों  का धन डुबा देता है और फिर लोगों को कहते सुना है न जाने ईश्वर हमें क्यों कष्ट दे रहा है ?हमने तो कुछ किया नहीं। जबकि मूल में कारण सिर्फ और सिर्फ होता है संचित कर्मों का परिणाम, जिसे ज्ञा...

भारतीय 16 संस्कार इनमें से कितने होते हैं आपके घरों में?

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1. सोलह संस्कारों का विस्तृत वर्णन 1. गर्भाधान संस्कार यह पहला संस्कार है, जो दंपत्ति के शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य श्रेष्ठ संतति का जन्म सुनिश्चित करना है। 2. पुंसवन संस्कार गर्भधारण के तीसरे महीने में किया जाने वाला यह संस्कार शिशु की रक्षा और माँ के स्वास्थ्य के लिए होता है। 3. सीमन्तोन्नयन संस्कार सीमंतोन्नयन संस्कार (यानी गोद भराई) जिसे लोगों ने  सिने स्टारों को टोपी कर कर के केवल प्रदर्शन का रूप बना दिया। है। संस्कार की प्रक्रिया 1. ससुराल पक्ष द्वारा वैदिक विधि विधान से गर्भस्थ शिशु और मां की सुरक्षा हेतु पूजा और मंत्रोच्चार:। माँ को पवित्र वस्त्र पहनाए जाते हैं। वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। देवताओं से माँ और शिशु की सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है। घर के बुजुर्ग और पुरोहित द्वारा श्रीफल सूखे मेवा  से गोद भरी जाती है। 2. बाल संवारने की रस्म: पति अपनी पत्नी के बालों को संवारता है। यह दांपत्य प्रेम और सहयोग का प्रतीक है। 3. अतिथियों का स्वागत: परिवार और मित्र माँ को आशीर्वाद देते हैं पोष्टिक खाद्य वस्तुओं का उपहार दिय...

वंदना सभा की वैज्ञानिकता

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  * हमारी वंदना सभा है पूर्ण वैज्ञानिक सभी विद्यालयों में अपने-अपने तरह की प्रार्थनाएं वंदनाएं होती हैं परंतु विद्या भारती की वंदना सभा की जो पद्धति है वह पूर्णतया वैज्ञानिक है व्यवहारिक है। अगर इसके वैज्ञानिक पक्ष पर विचार किया जाए तो सुखासन या पद्मासन अवस्था में वंदना की जो स्थिति है उसके पीछे शरीर विज्ञान है अध्यात्म विज्ञान है जब हम पालथी मार कर रीड की हड्डी को सीधा करके हाथ जोड़ने की स्थिति में बैठते हैं तो सीने के बीचो-बीच जो गड्ढा होता है उस गड्ढे को हाथ जोड़ने की स्थिति में जो मुद्रा बनती है दोनों अंगूठे से उसे मध्य भाग को स्पर्श किया जाता है। जहां हृदय चक्र होता है इस स्थिति में शरीर के सात चक्रों में से एक चक्र हृदय चक्र स्पंदित होता है ।पूरे शरीर का एक मंदिर जैसा आकार बनता है। पालथी मारकर सीधे बैठने पर मूलाधार चक्र जाग्रत होता है, ब्रह्मांड में घूम रही सकारात्मक ऊर्जा सिर से शरीर में प्रवेश करती है। क्योंकि हम  पालथी मार बैठे होते हैं अतः यह ऊर्जा शरीर में प्रवेश तो करती है परंतु शरीर से बाहर नहीं जाने पाती ।अर्थात वंदना सभा का जो समय होता है वह एक तरह से हमारा चार्...