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अर्धवार्षिक अति महत्वपूर्ण प्रश्न

समाचार की दुनिया में उल्टा पिरामिड शैली को उल्टा पिरामिड लेखन शैली (Inverted Pyramid Style) कहा जाता है।यह समाचार लेखन की सबसे लोकप्रिय और बुनियादी मानक शैली है, जिसका उपयोग प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब पत्रकारिता में प्रमुखता से किया जाता है।मुख्य विशेषताएंमहत्वपूर्ण तथ्य सबसे पहले: इसमें खबर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से, निष्कर्ष या 'क्लाइमेक्स' को शुरुआत (इंट्रो या लीड) में ही रख दिया जाता है।घटता क्रम: इसके बाद बाकी की जानकारी को महत्व के घटते हुए क्रम (सबसे महत्वपूर्ण से कम महत्वपूर्ण) में लिखा जाता है।तीन मुख्य भाग: इस शैली के तीन चरण होते हैं—इंट्रो (मुखड़ा), बॉडी (विस्तृत विवरण) और समापन (अंतिम भाग)।संपादकीय सुविधा: यदि जगह या समय की कमी हो, तो खबर को नीचे से आसानी से काटा जा सकता है, जिससे मुख्य सूचना नहीं छूटती। इंटरनेट पत्रकारिता (जिसे ऑनलाइन या वेब पत्रकारिता भी कहते हैं) इंटरनेट के माध्यम से समाचारों और सूचनाओं का संकलन, संपादन और प्रकाशन करना है।मुख्य विशेषताएँतत्परता (Real-time): घटना के घटित होते ही खबरें तुरंत पाठकों तक पहुँच जाती हैं।मल्टीमीडिया (Multimedia): इस...

पत्रकारिता और उसके विविध आयाम ।कक्षा - 12 अर्द्ध वार्षिक

पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम संचार – प्रश्न 1. संचार क्या है ? इसके प्रकार बताइए। उत्तर : दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान ही संचार है। संचार के बिना जीवन संभव नहीं है। संचार के कई प्रकार हैं, जिनमें मौखिक और अमौखिक संचार के अलावा निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं  अंत: वैयक्तिक संचार अंतर वैयक्तिक संचार समूह संचार जनसंचार प्रश्न 2. संचार के प्रमुख तत्त्व बताइए। उत्तर : संचास-प्रक्रिया में शामिल प्रमुख तत्त्व ये हैं : स्रोत – संचार-प्रक्रिया का प्रारंभ स्रोत या संचारक से होता है। भाषा – बातचीत या संदेश भेजने के लिए भाषा का सहारा लिया जाता है। संदेश – संचार-प्रक्रिया में अलग चरण संदेश होता है। संदेश स्पष्ट होना चाहिए। माध्यम (चैनल) – संदेश टेलीफोन, समाचार-पत्र, रेडियो, टी.वी., इंटरनेट आदि माध्यमों के जरिए प्राप्तकर्ता तक पहुँचाया जाता है। प्राप्तकर्ता (रिसीवर) – प्राप्तकर्ता प्राप्त संदेश का कूटवाचन यानी डिकोडिंग करता है। फीडबैक – प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया को फीडबैक कहा जाता है। संचार-प्रक्रिया में कई बाधाएँ आती हैं। इन्हें शोर (नॉयज) कह...

उत्साह,अट नहीं रही (निराला)

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       3.  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता- उत्साह बादल, गरजो! घेर   घेर घोर      गगन, धाराधर ओ ! ललित       ललित, काले       घुंघराले, बाल        कल्पना  के -से  पाले, विधुत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले ! वज्र        छिपा, नूतन         कविता फिर भर दो – बादल गरजो ! विकल    विकल, उन्मन   थे उन्मन विश्व    के निदाघ    के सकल जन, आए  अज्ञात  दिशा से अनंत  के घन ! तप्त       धरा, जल       से फिर शीतल कर दो – बादल, गरजो सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता-  अट नहीं रही है अट नहीं रही है आभा फागुन की तन सट नहीं रही है। कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो, उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो, आँख हटाता हूँ तो हट नहीं रही ह...