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पद परिचय

पद परिचय (Word Analysis / Parsing) हिंदी व्याकरण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। किसी वाक्य में आए प्रत्येक शब्द (पद) का व्याकरणिक दृष्टिकोण से पूर्ण परिचय देना ही पद परिचय कहलाता है। जिस प्रकार हम अपना परिचय देते समय अपना नाम, लिंग, संबंध आदि बताते हैं, उसी प्रकार वाक्य के प्रत्येक पद का लिंग, वचन, कारक, पुरुष, काल तथा अन्य पदों से संबंध बताना पद परिचय है। वाक्य में 'शब्द' और 'पद' का अंतर शब्द: भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है। (जैसे: राम, पुस्तक, पढ़ना) पद: जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों में बँधकर वाक्य में प्रयुक्त होता है, तो वह 'पद' बन जाता है। (जैसे: "राम पुस्तक पढ़ता है।" - यहाँ तीनों शब्द 'पद' हैं।) पद-परिचय के प्रमुख भेद एवं उनके बिंदु पद परिचय देने के लिए विकारी (परिवर्तनशील) और अविकारी (अपरिवर्तनशील) सभी व्याकरणिक बिंदुओं का ज्ञान होना आवश्यक है: 1. संज्ञा (Noun) भेद: व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, समूहवाचक, द्रव्यवाचक। आवश्यक बिंदु: लिंग (पुल्लिंग/स्त्रीलिंग), वचन (एकवचन/बहुवचन), कारक (कर्ता, कर्म, करण आदि), क्रिया के साथ संबंध...

पाठ्य योजना 2/9/26

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विषय अध्यापिका -सरला भारद्वाज  हिंदी पाठ्य योजना  कक्षा- 6 विषय हिंदी व्याकरण  उप-विषय -विशेषण समय -45+45 मिनट दो कालांश  शिक्षण विधि - गतिविधि ,क्रियाकलाप, कविता गायन,उदाहरण प्रदर्शन ,प्रयोग, व्याख्यान।  ************************************"**** कक्षा में जादुई झोले के साथ प्रवेश,  झोले में टमाटर, नींबू, मुलायम रुमाल, कुछ पत्थर फूल , चित्र,त्रिभुज सुन्दर चांद,ठंडा पानी, गर्म चाय। टमाटर खाने का अभिनय  प्रश्न के साथ क्रिया कलाप- कुछ याद आया? चलो गाते हैं - अहा टमाटर ------    गतिविधि  प्रस्तावना   प्रश्न -1. गीत में कौन सी वस्तु मजेदार है?         2. टमाटर का रंग कैसा है?         3.खाने में टमाटर का स्वाद कैसा होता है?         4.ऊपर से टोकरी में कितने टमाटर  दिख रहे हैं?                        अच्छा जी आपने कहा -टमाटर मजेदार ।                     ...

पटकथा लेखन

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 पटकथा लेखन: मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts) पटकथा का अर्थ: 'पटकथा' दो शब्दों से मिलकर बना है — 'पट' (पर्दा) और 'कथा' (कहानी)। अर्थात वह कहानी जो पर्दे (सिनेमा या टेलीविज़न) पर दिखाई जाने के लिए लिखी जाती है। पटकथा के प्रमुख अंग (Elements): दृश्य संख्या (Scene Number): प्रत्येक दृश्य का अलग क्रमांक होता है। स्थान व समय (Location & Time): दृश्य कहाँ (अंदर/बाहर - INT./EXT.) और कब (दिन/रात) घटित हो रहा है। पात्रों का विवरण (Character Description): दृश्य में कौन-कौन से पात्र मौजूद हैं। दृश्य विवरण / एक्शन (Action Lines): पात्र क्या कर रहे हैं और आसपास का वातावरण कैसा है। संवाद (Dialogues): पात्र आपस में क्या बातचीत कर रहे हैं। पटकथा लेखन के महत्वपूर्ण नियम: पटकथा वर्तमान काल (Present Tense) में लिखी जाती है, क्योंकि घटना दर्शक के सामने घटित हो रही होती है। इसमें 'Show, Don't Tell' (दिखाओ, बताओ मत) के सिद्धांत का पालन किया जाता है। पटकथा का एक पृष्ठ लगभग 1 मिनट के स्क्रीन-टाइम के बराबर होता है। 📝 सीबीएसई कक्षा 11 के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत...

रेडियो नाटक और रेडियो रूपक

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कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा (अभिव्यक्ति और माध्यम / हिंदी साहित्य व ऐच्छिक) के पाठ्यक्रम के अनुसार 'रेडियो नाटक' और 'रेडियो रूपक (Radio Feature)' विषय से संबंधित अति-महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर नीचे प्रस्तुत हैं: 1. रेडियो नाटक (Radio Drama) प्रश्न 1: रेडियो नाटक किसे कहते हैं? इसकी मुख्य विशेषता क्या है? उत्तर: रेडियो नाटक वह नाट्य रूप है जिसका प्रसारण केवल श्रव्य (सुनने वाले) माध्यम यानी रेडियो पर होता है। मुख्य विशेषता: यह पूरी तरह से 'श्रव्य माध्यम' है। इसमें दृश्य (Visuals) नहीं होते, इसलिए इसमें सब कुछ ध्वनि प्रभावों (Sound Effects), संवादों (Dialogues) और संगीत के माध्यम से ही श्रोता के मन में चित्रित करना पड़ता है। प्रश्न 2: रेडियो नाटक और मंच नाटक (Stage Drama) में क्या अंतर है? उत्तर: रेडियो नाटक श्रव्य होता है जबकि मंच नाटक श्रव्य और दृश्य दोनों होता है। प्रश्न 1: रेडियो नाटक किसे कहते हैं? इसकी मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? उत्तर: रेडियो पर प्रसारित होने वाले नाटक को रेडियो नाटक कहते हैं। यह पूरी तरह से एक श्रव्य माध्यम (Auditory Medium)...

साना साना हाथ जोड़

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मुख्य बातें और सारांश लेखिका: मधु कांकरियायात्रा का स्थान: सिक्किम की राजधानी गंगटोक और वहाँ से हिमालय की ऊँचाइयों (युमथांग आदि) की यात्रा। प्रार्थना का अर्थ: 'साना-साना हाथ जोड़ि' एक नेपाली प्रार्थना है जिसका अर्थ है—"छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो। मुख्य विषय:प्रकृति का अलौकिक सौंदर्य और उसका प्रभाव।पहाड़ी इलाकों में जीवन की कठिनाई और वहाँ की मेहनतकश महिलाओं का संघर्ष (पत्थर तोड़ना, बच्चों को पीठ पर लादकर मजदूरी करना)।बौद्ध धर्म से जुड़ी आस्थाएँ (श्वेत और रंगीन पताकाएँ, प्रेयर व्हील यानी धर्मचक्र

अर्धवार्षिक अति महत्वपूर्ण प्रश्न

समाचार की दुनिया में उल्टा पिरामिड शैली को उल्टा पिरामिड लेखन शैली (Inverted Pyramid Style) कहा जाता है।यह समाचार लेखन की सबसे लोकप्रिय और बुनियादी मानक शैली है, जिसका उपयोग प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब पत्रकारिता में प्रमुखता से किया जाता है।मुख्य विशेषताएंमहत्वपूर्ण तथ्य सबसे पहले: इसमें खबर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से, निष्कर्ष या 'क्लाइमेक्स' को शुरुआत (इंट्रो या लीड) में ही रख दिया जाता है।घटता क्रम: इसके बाद बाकी की जानकारी को महत्व के घटते हुए क्रम (सबसे महत्वपूर्ण से कम महत्वपूर्ण) में लिखा जाता है।तीन मुख्य भाग: इस शैली के तीन चरण होते हैं—इंट्रो (मुखड़ा), बॉडी (विस्तृत विवरण) और समापन (अंतिम भाग)।संपादकीय सुविधा: यदि जगह या समय की कमी हो, तो खबर को नीचे से आसानी से काटा जा सकता है, जिससे मुख्य सूचना नहीं छूटती। इंटरनेट पत्रकारिता (जिसे ऑनलाइन या वेब पत्रकारिता भी कहते हैं) इंटरनेट के माध्यम से समाचारों और सूचनाओं का संकलन, संपादन और प्रकाशन करना है।मुख्य विशेषताएँतत्परता (Real-time): घटना के घटित होते ही खबरें तुरंत पाठकों तक पहुँच जाती हैं।मल्टीमीडिया (Multimedia): इस...

पत्रकारिता और उसके विविध आयाम ।कक्षा - 12 अर्द्ध वार्षिक

पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम संचार – प्रश्न 1. संचार क्या है ? इसके प्रकार बताइए। उत्तर : दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान ही संचार है। संचार के बिना जीवन संभव नहीं है। संचार के कई प्रकार हैं, जिनमें मौखिक और अमौखिक संचार के अलावा निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं  अंत: वैयक्तिक संचार अंतर वैयक्तिक संचार समूह संचार जनसंचार प्रश्न 2. संचार के प्रमुख तत्त्व बताइए। उत्तर : संचास-प्रक्रिया में शामिल प्रमुख तत्त्व ये हैं : स्रोत – संचार-प्रक्रिया का प्रारंभ स्रोत या संचारक से होता है। भाषा – बातचीत या संदेश भेजने के लिए भाषा का सहारा लिया जाता है। संदेश – संचार-प्रक्रिया में अलग चरण संदेश होता है। संदेश स्पष्ट होना चाहिए। माध्यम (चैनल) – संदेश टेलीफोन, समाचार-पत्र, रेडियो, टी.वी., इंटरनेट आदि माध्यमों के जरिए प्राप्तकर्ता तक पहुँचाया जाता है। प्राप्तकर्ता (रिसीवर) – प्राप्तकर्ता प्राप्त संदेश का कूटवाचन यानी डिकोडिंग करता है। फीडबैक – प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया को फीडबैक कहा जाता है। संचार-प्रक्रिया में कई बाधाएँ आती हैं। इन्हें शोर (नॉयज) कह...