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राजस्थान की रजत की बूंदें

लेखक अनुपम मिश्र द्वारा रचित ‘राजस्थान की रजत बूंदें’ पाठ राजस्थान के मरुस्थल में पानी की भीषण समस्या और उसके पारंपरिक समाधान 'कुई' के निर्माण की अनूठी कला को दर्शाता है। इसमें मरुभूमि के समाज के जल-प्रेम, संवेदनशीलता और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव का वर्णन किया गया है।कुई और उसकी खुदाई की प्रक्रियाचेलवांजी (चेजारो): कुई बनाने वाले दक्ष कारीगरों को चेलवांजी कहा जाता है, जो बेहद संकरी जगह में उतरकर विशेष औजार 'बसौली' से खुदाई करते हैं।विशेष सावधानी: 30 से 35 हाथ की गहराई पर काम करना खतरनाक होता है। दम घुटने से बचाने के लिए ऊपर खड़े लोग बीच-बीच में रेत फेंकते हैं।कुंडली या चेजा: कुई के भीतर दीवारों को ढहने से बचाने के लिए खेजड़ी, बबूल या कुंभारे घास के रेशों से एक मजबूत रस्सियों का घेरा (कुंडली) बनाया जाता है।पानी के तीन रूपपाठ में राजस्थान की भूमि में पानी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:पालरपानी: सीधे बरसात से मिलने वाला पानी, जो धरातल पर बहता है।पातालपानी: भूजल, जो कुओं के जरिए निकाला जाता है और रेगिस्तान में अक्सर खारा होता है।रेजाणीपानी: वह वर्षा जल जो रेत के न...

महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेद  1. डिजिटल क्रांति ने इंटरनेट, स्मार्टफोन और ई-बुक्स के जरिए ज्ञान को घर-घर पहुँचाया है। इसके बावजूद, पुस्तकों का वास्तविक महत्व कम नहीं हुआ है। मुद्रित किताबें हमें गहरा एकाग्रता, मानसिक शांति और तथ्यात्मक गहराई देती हैं जो केवल स्क्रीन पर स्क्रॉल करने से संभव नहीं है। डिजिटल युग में दोनों का सह-अस्तित्व आवश्यक है।प्रस्तावनाआज का युग इंटरनेट और डिजिटल तकनीक का है। कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट ने पूरी दुनिया को बदल दिया है। इसे ही डिजिटल क्रांति कहा जाता है। इस बदलाव ने शिक्षा, व्यापार और पठन-पाठन के तरीकों को पूरी तरह नया रूप दे दिया है।डिजिटल क्रांति और पठन-पाठनसुविधा और पहुँच: ई-बुक्स और इंटरनेट के माध्यम से हजारों किताबें एक क्लिक पर उपलब्ध हैं।कम लागत: डिजिटल सामग्री मुद्रित किताबों की तुलना में सस्ती या मुफ्त होती है।सीखने का दायरा: दूर-दराज के इलाकों में भी छात्र इंटरनेट से पढ़ाई जारी रख सकते हैं।डिजिटल युग में पुस्तकों का महत्वगहन ज्ञान: इंटरनेट पर जानकारी बिखरी होती है, जबकि किताबें किसी विषय पर पूरी और गहरी समझ देती हैं।एकाग्रता और मानसिक शांति: स्क्रीन की चमक और ...

गायकों में उम्दा लता मंगेशकर का जोड़ नहीं

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 एनसीईआरटी कक्षा 11th हिंदी  1th: पाठ 1 - भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ - लता म अभ्यास प्रश्नोत्तर  1. लेखक ने पाठ में गानपन का उल्लेख किया है| पाठ के सन्दर्भ में स्पष्ट करते हुए बताएँ कि आपके विचार में इसे प्राप्त करने के लिए किस प्रकार के अभ्यास की आवश्यकता है? उत्तर लेखक ने पाठ में गानपन का उल्लेख किया है| यहाँ गानपन का अर्थ गाने का वह अंदाज है जो एक आदमी को भी भावविभोर कर दे| जिस प्रकार मनुष्यता हो तो वह मनुष्य है, उसी प्रकार संगीत की विशेषता उसका गानपन होता है| लता मंगेशकर के गानों में भी गानपन मौजूद रहता है| इसे प्राप्त करने के लिए गायन में निर्मलता होना तथा गाने का नियमित अभ्यास करना आवश्यक है| 2. लेखक ने लता की गायकी की किन विशेषताओं को उजागर किया है? आपको लता की गायकी में कौन-सी विशेषताएँ नज़र आती हैं? उदाहरण सहित बताइए| उत्तर लेखक ने लता की गायकी की निम्नांकित विशेषताओं को उजागर किया है: गानपन- गानपन का अर्थ है गाने का वह अंदाज है जो एक आदमी को भी भावविभोर कर दे| लता मंगेशकर के गानों को सुनकर श्रोता मुग्ध हो जाते हैं| स्वरों की निर्मलता- लता के गाने की एक और विशेषता ...

जूझ वितान 12हिंदी cbse

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  मुख्य पात्र: परिचय  आनंद:(लेखक आनंद यादव) कहानी का नायक, जो शिक्षा प्राप्त करने के लिए संघर्ष करता है।  आनंद के पिता: जो शिक्षा के महत्व को नहीं समझते हैं और आनंद को खेती के काम में लगाते हैं।  आनंद की मां: जो आनंद का समर्थन करती है और उसे दत्ताजी राव से मिलने के लिए प्रेरित करती है।  दत्ताजी राव सरकार:(गांव का मुखिया) जो शिक्षा के महत्व को समझते हैं और आनंद की मदद करते हैं।  मास्टर सौंदलगेकर:(मराठी शिक्षक) एक शिक्षक जो आनंद को प्रेरित करते हैं और कविता के प्रति रुचि जगाते हैं  जूझ" (Jujh) कक्षा 12वीं की हिंदी (वितान) की एक पाठ्यपुस्तक का नाम है, जो आनंद यादव द्वारा लिखित एक आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश है ।  यह कहानी शिक्षा प्राप्त करने के लिए एक किशोर के संघर्ष और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।   कहानी का सारांश: इस कहानी में, लेखक आनंद यादव अपने बचपन के दिनों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जूझते हैं।  उनके पिता उन्हें चौथी कक्षा के बाद स्कूल जाने से रोककर खेती के काम में लगा देते हैं।  आनंद, जो पढ़ लिखकर नौकरी करना चाहता है, अपने पित...

पहलवान की ढोलक

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  पहलवान की ढोलक” कहानी के लेखक ‘फणीश्वर नाथ रेणु जी’ हैं। । फणीश्वर नाथ रेणु जी की कलम में अपने गाँव, अंचल एवं संस्कृति को सजीव करने की अद्भुत क्षमता है। ऐसा लगता है मानो उनकी रचना का हर एक पात्र वास्तविक जीवन ही जी रहा हो।  पात्रों एवं उसके आसपास के वातावरण का इतना सच्चा चित्रण बहुत कम देखने को मिलता है। रेणु वैसे गिने-चुने कथाकारों में से हैं जिन्होंने गद्य में भी संगीत पैदा कर दिया है, नहीं तो ढोलक की उठती-गिरती आवाज़  और पहलवान के क्रियाकलापों का ऐसा सामंजस्य दुर्लभ है। कहानी की शुरुआत में लेखक बताते हैं कि जाड़ों के मौसम में गाँव में महामारी फैली हुई थी। गांव के अधिकतर लोग मलेरिया और हैजे से ग्रस्त थे। जाडे के दिन थे और रातें एकदम काली अंधेरी व डरावनी लग रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे रात उस गाँव के दुःख में दुःखी होकर चुपचाप आँसू बहा रही हो। टूटते तारे का उदाहरण देते हुए लेखक बताता है कि उस गाँव के दुःख को देख कर यदि कोई बाहरी व्यक्ति उस गाँव के लोगों की कुछ मदद करना भी चाहता था तो  चाह कर भी नहीं कर सकता था क्योंकि उस गाँव में फैली महामारी के कारण कोई भी अपने जीवन ...

साना साना हाथ जोड़

 साना-साना हाथ जोड़ि पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास प्रश्न 1. झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था? उत्तर- झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका के मन में सम्मोहन जगा रहा था। इस सुंदरता ने उस पर ऐसा जादू-सा कर दिया था कि उसे सब कुछ ठहरा हुआ-सा और अर्थहीन-सा लग रहा था। उसके भीतर-बाहर जैसे एक शून्य-सा व्याप्त हो गया था। प्रश्न 2. गंतोक को ‘मेहनकश बादशाहों का शहर’ क्यों कहा गया? उत्तर- गंतोक एक ऐसा पर्वतीय स्थल है जिसे वहाँ के मेहनतकश लोगों ने अपनी मेहनत से सुरम्य बना दिया है। वहाँ सुबह, शाम, रात सब कुछ सुंदर प्रतीत होता है। यहाँ के निवासी भरपूर परिश्रम करते हैं, इसीलिए गंतोक को मेहनतकश बादशाहों का शहर कहा गया है। प्रश्न 3. कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है? उत्तर- श्वेत पताकाएँ किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु पर फहराई जाती हैं। किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु हो जाए तो उसकी आत्मा की शांति के लिए नगर से बाहर किसी वीरान स्थान पर मंत्र लिखी एक सौ आठ पताकाएँ फहराई जाती हैं, जिन्हें उतारा नहीं जाता। वे धी...

कैमरे मरे में बंद अपाहिज 12ncert

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  कैमरे में बंद अपाहिज" रघुवीर सहाय द्वारा लिखी गई एक कविता है, जो दूरदर्शन पर एक अपाहिज व्यक्ति के साक्षात्कार के दौरान संवेदनहीनता और व्यवसायिकता पर कटाक्ष करती है. कविता में, एक पत्रकार एक अपाहिज व्यक्ति का साक्षात्कार लेता है, उससे बेतुके सवाल पूछता है और उसे रुलाने की कोशिश करता है, ताकि दर्शकों को उसकी पीड़ा दिखाई जा सके और कार्यक्रम को TRP मिल सके.  कविता का सारांश: कविता में, एक पत्रकार एक अपाहिज व्यक्ति को कैमरे के सामने लाता है और उससे ऐसे सवाल पूछता है जो उसकी पीड़ा को उजागर करते हैं. पत्रकार यह दिखाने की कोशिश करता है कि वह कितना संवेदनशील है, लेकिन वास्तव में, वह अपाहिज व्यक्ति के दुख का फायदा उठा रहा है. पत्रकार दर्शकों से कहता है कि वे धीरज रखें और देखें कि कैसे वह और अपाहिज व्यक्ति एक साथ रोते हैं, जिससे कार्यक्रम को और अधिक भावनात्मक बनाया जा सके. कवि ने इस कविता के माध्यम से मीडिया की संवेदनहीनता और व्यवसायिकता पर प्रकाश डाला है.  मुख्य बातें: कटाक्ष: कविता दूरदर्शन और मीडिया की संवेदनहीनता पर कटाक्ष करती है.  व्यवसायिकता: कार्यक्रम को सफल बनाने के ...