पद परिचय
पद परिचय (Word Analysis / Parsing) हिंदी व्याकरण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। किसी वाक्य में आए प्रत्येक शब्द (पद) का व्याकरणिक दृष्टिकोण से पूर्ण परिचय देना ही पद परिचय कहलाता है। जिस प्रकार हम अपना परिचय देते समय अपना नाम, लिंग, संबंध आदि बताते हैं, उसी प्रकार वाक्य के प्रत्येक पद का लिंग, वचन, कारक, पुरुष, काल तथा अन्य पदों से संबंध बताना पद परिचय है। वाक्य में 'शब्द' और 'पद' का अंतर शब्द: भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है। (जैसे: राम, पुस्तक, पढ़ना) पद: जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों में बँधकर वाक्य में प्रयुक्त होता है, तो वह 'पद' बन जाता है। (जैसे: "राम पुस्तक पढ़ता है।" - यहाँ तीनों शब्द 'पद' हैं।) पद-परिचय के प्रमुख भेद एवं उनके बिंदु पद परिचय देने के लिए विकारी (परिवर्तनशील) और अविकारी (अपरिवर्तनशील) सभी व्याकरणिक बिंदुओं का ज्ञान होना आवश्यक है: 1. संज्ञा (Noun) भेद: व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, समूहवाचक, द्रव्यवाचक। आवश्यक बिंदु: लिंग (पुल्लिंग/स्त्रीलिंग), वचन (एकवचन/बहुवचन), कारक (कर्ता, कर्म, करण आदि), क्रिया के साथ संबंध...