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दीवाली विशेष -2026 लक्ष्मी पूजन. की विशेष तैयारी

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लक्ष्मी पूजा के शुभ मुहूर्त (नई दिल्ली,आगरा ,अलीगढ़ , हाथरस ,मथुरा ,समय के अनुसार): लक्ष्मी पूजा मुहूर्त / वृषभ काल: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 56 मिनट) - यह स्थिर लग्न का समय मां लक्ष्मी की स्थाई कृपा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। [ 1 , 2 ] प्रदोष काल: शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक । [ 1 ] निशिता काल (रात्रि पूजा): रात 11:44 बजे से 9 नवंबर को रात 12:36 बजे तक । [ 1 ] सिंह लग्न (मध्य रात्रि): रात 12:25 बजे से 2:42 बजे तक (9 नवंबर)। [ 1 ] दिन के अन्य मुहूर्त (व्यापार/ऑफिस के लिए): कुंभ लग्न (दुकानों और कार्यालयों के लिए): दोपहर 1:27 बजे से दोपहर 2:54 बजे तक । [ 1 ]           जगमग दीप जले घर-घर में,  शुभ दिवाली आई। मुद मंगलमय जीवन होवै,सरला देत बधाई।।    आइए कैसे करें हम विधि विधान से इस पर्व का आयोजन और लक्ष्मी जी का पूजन ,जानते हैं ।मेरा यह लेख पढ़ने के बाद ब्लॉगर में कमेंट बॉक्स में कमेंट करना ना भूलें । आपके सुझावों का इंतजार रहेगा।  प्रातः काल प्रात काल पानी में गंगाजल और थोड़ी हल्दी डालकर स्नान करें। ...

भारतीय 16 संस्कार इनमें से कितने होते हैं आपके घरों में?

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1. सोलह संस्कारों का विस्तृत वर्णन 1. गर्भाधान संस्कार यह पहला संस्कार है, जो दंपत्ति के शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य श्रेष्ठ संतति का जन्म सुनिश्चित करना है। 2. पुंसवन संस्कार गर्भधारण के तीसरे महीने में किया जाने वाला यह संस्कार शिशु की रक्षा और माँ के स्वास्थ्य के लिए होता है। 3. सीमन्तोन्नयन संस्कार सीमंतोन्नयन संस्कार (यानी गोद भराई) जिसे लोगों ने  सिने स्टारों को टोपी कर कर के केवल प्रदर्शन का रूप बना दिया। है। संस्कार की प्रक्रिया 1. ससुराल पक्ष द्वारा वैदिक विधि विधान से गर्भस्थ शिशु और मां की सुरक्षा हेतु पूजा और मंत्रोच्चार:। माँ को पवित्र वस्त्र पहनाए जाते हैं। वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। देवताओं से माँ और शिशु की सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है। घर के बुजुर्ग और पुरोहित द्वारा श्रीफल सूखे मेवा  से गोद भरी जाती है। 2. बाल संवारने की रस्म: पति अपनी पत्नी के बालों को संवारता है। यह दांपत्य प्रेम और सहयोग का प्रतीक है। 3. अतिथियों का स्वागत: परिवार और मित्र माँ को आशीर्वाद देते हैं पोष्टिक खाद्य वस्तुओं का उपहार दिय...

छोटा मेरा खेत

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​ 1. पाठ का सारांश (Summary) ​'छोटा मेरा खेत' कविता उमाशंकर जोशी द्वारा रचित है, जिसका हिंदी अनुवाद भोलाभाई पटेल ने किया है। इस कविता में कवि ने कृषि कर्म (खेती) और लेखन कर्म (कविता रचना) के बीच की समानता को बहुत सुंदर ढंग से दर्शाया है। ​ कागज का पन्ना और खेत: कवि के लिए कागज का एक चौकोर पन्ना एक छोटे खेत के समान है। जब विचार रूपी बीज इस कागज रूपी खेत में बोए जाते हैं, तो वह सृजन की शुरुआत होती है। ​ भावों का अंकुरण: जिस प्रकार खेत में बीज बोने के बाद पानी और खाद पाकर पौधे अंकुरित होते हैं, उसी प्रकार मन में उठने वाले भाव और कल्पनाएँ शब्दों का रूप लेकर पन्ने पर उभरती हैं। ​ अमृत का फल और अनंत काल तक कटाई: खेत की फसल एक समय के बाद समाप्त हो जाती है, लेकिन कविता रूपी फसल हमेशा के लिए अमर हो जाती है। इसके रस का पान पाठक सदियों तक करते हैं और यह कभी भी समाप्त नहीं होती। सृजन का यह आनंद अक्षय (कभी न खत्म होने वाला) होता है। ​2. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Question-Answers) ​ प्रश्न 1: 'छोटा मेरा खेत' कविता में पन्ने की तुलना खेत से क्यों की ...

रुबाइया

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  : पाठ के अभ्यास प्रश्न और उत्तर प्रश्‍न 1. शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है? उत्तर: शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर यह भाव व्यंजित करना चाहता है कि रक्षाबंधन का त्योहार सावन के महीने में आता है। इस समय आसमान में काले बादल छाए रहते हैं और बीच-बीच में बिजली चमकती है। जिस प्रकार आकाश में बिजली कौंधती है, ठीक उसी प्रकार भाई की कलाई पर बंधी राखी के चमकीले लच्छे चमकते हैं। बिजली की चमक प्रकाश व सत्य को प्रकट करती है और राखी के लच्छे भाई-बहन के पवित्र व अटूट प्रेम के बंधन को दर्शाते हैं।   प्रश्‍न 4. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें:   (क) गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता: 'गोदी के चाँद' का अर्थ माँ की गोद में खेल रहा नन्हा शिशु है और 'गगन के चाँद' का अर्थ आसमान का चंद्रमा है। माँ के लिए उसका बच्चा चाँद के समान सुंदर और प्यारा होता है। आसमान का चाँद बच्चे को आकर्षित करता है तथा बच्चा उसे पाने के लिए मचल उठता है, जैसे सूरदास के पदों में बालक कृष्ण चंद्रमा को खिलौने के रूप में मांगते हैं। ...

दंतुरित मुस्कान

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यह दंतुरित मुस्कान तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान मृतक में भी डाल देगी जान! धूल-धूसरित तुम्हारे गात, छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात! परस पाकर तुम्हारा ही प्राण पिघلकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण! छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल? तुम मुझे पाए नहीं पहचान, देखते ही रहोगे अनिमेश! थक गए हो आँखें फेरते जो उत्पाद? बच गए हो यदि मेरा कीड़ा-व्यापार तो तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान! धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य! پर्ची हुई तुमसे कहीं की पुतली मधुपर्क पाकर तुम्हारा ही अमर तुमसे हो गए हम दोनों के बीच का यह परिचय अतिथि तुम प्रिय! तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान, छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल? धन्य तुम, और संपर्क की उँगलियाँ माँ की मधुपर्क-पूतली देखते ही रहोगे अनिमेश! धन्य तुम, अतिथि तुम्हारा प्यार! कविता का मूल भाव: इस कविता में कवि ने एक छोटे बच्चे की मनमोहक, नए-नए दाँतों वाली मुस्कान (दंतुरित मुस्कान) का बहुत ही सुंदर और सजीव चित्रण किया है। कवि का मानना है कि बच्चे की यह निष्कपट मुस्कान उदास से उदास या निराश व्यक्ति (मृतक)...

अक्क महादेवी वचन

कक्षा 11वीं की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग-2’ में संकलित कवयित्री अक्क महादेवी के दोनों वचनों (कविता) के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर नीचे दिए गए हैं: ​ प्रश्न-अभ्यास के उत्तर ​ प्र. 1. लक्ष्य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधक होती हैं—इसके संदर्भ में अपने तर्क दीजिए। ​ उत्तर: कवयित्री के अनुसार, इंद्रियों का मुख्य स्वभाव अपनी तृप्ति और भोग-विलास की तलाश करना है। जब मनुष्य इंद्रियों के सुख-चैन और स्वाद में उलझ जाता है, तो वह अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटक जाता है। विशेष रूप से ईश्वर प्राप्ति या आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग में हमारी इंद्रियाँ (आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा) सबसे बड़ी बाधा बनती हैं, क्योंकि वे साधक को सांसारिक मोह-माया और विषय-वासनाओं के जाल में फँसाए रखती हैं। अतः लक्ष्य तक पहुँचने के लिए इंद्रियों पर नियंत्रण रखना अत्यंत आवश्यक है। ​ प्र. 2. ‘ओ चराचर! मत चूक अवसर’—इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। ​ उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री समस्त संसार (चराचर) को यह चेतावनी और प्रेरणा दे रही है कि मनुष्य को बहुत भाग्य से यह दुर्लभ मानव जीवन प्राप्त हुआ है। जन्म-मरण के चक्र ...

सारांश पाठ- परीक्षा

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हिन्दी की पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ में संकलित प्रसिद्ध कहानी ‘परीक्षा’ (मूल लेखक: मुंशी प्रेमचंद) का सारांश । ​ पाठ: परीक्षा – सारांश ​ 1. दीवान सुजानसिंह का निर्णय: देवगढ़ रियासत के बूढ़े और अनुभवी दीवान सरदार सुजानसिंह को अपनी ढलती उम्र के कारण यह चिंता सताने लगी कि कहीं राज-काज में कोई भूल-चूक न हो जाए और उनकी जीवनभर की कमाई (नेकनामी) पर कोई दाग लग जाए। उन्होंने राजा साहब से विनती कर अपने पद से मुक्त होने की अनुमति मांगी। राजा साहब ने उनकी बात मान ली, लेकिन उनके सामने एक शर्त रखी कि नए दीवान का चुनाव वे खुद ही करेंगे। ​ 2. देश भर से उम्मीदवारों का आना: नया दीवान चुनने के लिए एक विज्ञापन निकाला गया। देश के कोने-कोने से सुशिक्षित, युवा, और बड़े-बड़े डिग्रियां (ग्रेजुएट) प्राप्त लोग देवगढ़ पहुँचने लगे। हर कोई अपनी श्रेष्ठता, बुद्धिमत्ता और योग्यता साबित करने की होड़ में था। सबने दिखावे के तौर पर बहुत नम्रता, सदाचार और सज्जनता का आचरण अपना लिया था, ताकि बूढ़े दीवान की नजरों में अच्छे बन सकें। लेकिन, अनुभवी सुजानसिंह इन सबकी असलियत भाप रहे थे। ​ 3. हॉकी का खेल और असली प...