सारांश पाठ- परीक्षा
हिन्दी की पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ में संकलित प्रसिद्ध कहानी ‘परीक्षा’ (मूल लेखक: मुंशी प्रेमचंद) का सारांश । पाठ: परीक्षा – सारांश 1. दीवान सुजानसिंह का निर्णय: देवगढ़ रियासत के बूढ़े और अनुभवी दीवान सरदार सुजानसिंह को अपनी ढलती उम्र के कारण यह चिंता सताने लगी कि कहीं राज-काज में कोई भूल-चूक न हो जाए और उनकी जीवनभर की कमाई (नेकनामी) पर कोई दाग लग जाए। उन्होंने राजा साहब से विनती कर अपने पद से मुक्त होने की अनुमति मांगी। राजा साहब ने उनकी बात मान ली, लेकिन उनके सामने एक शर्त रखी कि नए दीवान का चुनाव वे खुद ही करेंगे। 2. देश भर से उम्मीदवारों का आना: नया दीवान चुनने के लिए एक विज्ञापन निकाला गया। देश के कोने-कोने से सुशिक्षित, युवा, और बड़े-बड़े डिग्रियां (ग्रेजुएट) प्राप्त लोग देवगढ़ पहुँचने लगे। हर कोई अपनी श्रेष्ठता, बुद्धिमत्ता और योग्यता साबित करने की होड़ में था। सबने दिखावे के तौर पर बहुत नम्रता, सदाचार और सज्जनता का आचरण अपना लिया था, ताकि बूढ़े दीवान की नजरों में अच्छे बन सकें। लेकिन, अनुभवी सुजानसिंह इन सबकी असलियत भाप रहे थे। 3. हॉकी का खेल और असली प...