पाठ हार की जीत- पुस्तक "मल्हार"
सुदर्शन (साहित्यकार) द्वारा रचित “हार की जीत” एक प्रसिद्ध हिंदी कहानी है, जो दिखाती है कि कैसे बाबा भारती की ईमानदारी और दयालुता के कारण डाकू खड्गसिंह उनका लूटा हुआ घोड़ा वापस कर देता है। यह कहानी सिखाती है कि सच्ची जीत हृदय परिवर्तन और अच्छाई की होती है, न कि भौतिक वस्तुओं को हासिल करने में।
कहानी के मुख्य बिंदु:
मुख्य पात्र: बाबा भारती (साधु) और डाकू खड्गसिंह.
सार: डाकू खड्गसिंह ने बाबा भारती का सुल्तान नामक घोड़ा छल से छीन लिया, लेकिन बाबा भारती के नेक शब्दों (“इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना”) ने डाकू का हृदय बदल दिया, जिससे उसने घोड़ा वापस कर दिया.
नैतिक जीत: बाबा भारती ने घोड़ा खोकर भी खड्गसिंह की इंसानियत को जीत लिया, जिसे “हार की जीत” कहा गया है.
संदेश: परोपकार, ईमानदारी और विश्वास के सामने दुष्टता भी हार जाती है.!
प्रश्न अभ्यास
मेरी समझ से
आइए, अब हम ‘हार की जीत’ कहानी को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं।
क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
प्रश्न 1.
सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?
• बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।
• बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।
• बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
• बाबा भारती असावधान हो गए।*(उत्तर)
घोड़ा के चले जाने के बाद अब उन्हें न तो कोई डर था न चिंता थी और न कोई मोह। इसलिए वे असावधान हो गये थे।
प्रश्न 2.
“बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?
• बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया।* (उत्तर)
• बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
• बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।
• बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।
उत्तर -संत होते हुए भी बाबा भारती थे तो मनुष्य ही अपनी प्रशंसा सभी को अच्छी लगती है।ऐसा सुंदर बलवान घोड़ा पूरे इलाके में न था।बाबा भारती ने उसे बड़े घमंड के साथ दिखाया।
शीर्षक
(क) आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन ने ‘हार की जीत’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर:
सबकी सहायता करने तथा समाज में भाईचारा व सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से इस कहानी का नाम ‘हार की जीत’ रखा होगा |
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए ।
उत्तर:
डाकू खड्गसिंह का हृदय परिवर्तन ।
कारण- बाबा भारती ने कहा था कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना। लोगों को यदि इस घटना का पता चला तो वे किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे। तभी खड्गसिंह का हृदय परिवर्तन हुआ और पुन: घोड़े को बाबा भारती को वापस दे दिया।
(ग)बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?
उत्तर:
बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से यह वचन लिया कि इस घटना को वह किसी के सामने प्रकट न करेगा।
पंक्तियों पर चर्चा -
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए-
“भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”
“बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से । “
“वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”
“बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।”
“उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”
उत्तर -छात्रों के मध्य विमर्श
सोच-विचार के लिए
कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
“दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”
(क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?
उत्तर:
बाबा भारती और खड्गसिंह के आँसुओं का मेल हो गया था
ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था ?
उत्तर:
दोनों के आँसुओं में यह अंतर है कि बाबा भारती के आँसू विजय और खुशी के थे और खड्गसिंह के आँसू पश्चात और दुख के थे।
दिनचर्या
(क) कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब आप कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे, लिखिए। इस काम में आप थोड़ा-बहुत अपनी कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।
उत्तर:
बाबा भारती सुबह – सुबह जग जाते होंगे। स्नान आदि करने के उपरांत मंदिर में जाकर भगवत भजन करते होंगे। उसके बाद वे अपने घोड़े की देखभाल करते होंगे। वे अपने हाथ से घोड़े को खरहरा करते और दाना खिलाते होंगे। घोड़े पर सवार होकर दूर दूर तक जाते होंगे।रात के समय वे जागकर घोड़े की रखवाली करते होंगे। रात काफी बीतने पर वे सो जाते होंगे। पुनः सुबह जगकर अपनी दिनचर्या में लग जाते होंगे।
(ख) अब आप अपनी दिनचर्या भी लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
कहानी की रचना
(क) इस कहानी की कौन-कौन सी बातें आपको पसंद आई? आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
(ख) कोई भी कहानी पाठक को तभी पसंद आती है जब उसे अच्छी तरह लिखा गया हो । लेखक कहानी को अच्छी तरह लिखने के लिए अनेक बातों का ध्यान रखते हैं, जैसे- शब्द, वाक्य, संवाद आदि। इस कहानी में आए संवादों के विषय में अपने विचार लिखें।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
मुहावरे कहानी से
(क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं— लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।
उत्तर:
होना लट्टू – बाबा भारती घोड़े की चाल पर लट्टू थे।
हृदय पर साँप लोटना – घोड़े की चाल देखकर खड्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया ।
फूले न समाना – घोड़े के शरीर तथा उसके रंग को देखकर बाबा भारती फूले न समाते थे।
मुँह मोड़ लेना – बाबा भारती ने सुलतान की ओर से इस तरह मुँह मोड़ लिया जैसे उनका उससे कोई संबंध ही न रहा हो।
मुख खिल जाना – घोड़े को देखकर बाबा भारती का मुख फूल की नाईं खिल जाता था ।
न्योछावर कर देना – बाबा भारती ने अपना सब कुछ घोड़े पर न्योछावर कर दिया।
(ख) अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।
उत्तर:
लट्टू होना (कायल होना ,मुग्ध होना ) – मेरा मित्र बगीचे में गुलाब देखकर लट्टू हो गया ।
हृदय पर साँप लोटना (ईर्ष्या करना) – अर्जुन के स्वयंवर जीतने पर दुर्योधन के कलेजे पर सांप लोट गया।
फूले न समाना (बहुत खुश होना ) – बहुत दिनों के बाद अपने मामा जी देखते ही राहुल फूला न समाया ।
मुँह मोड़ लेना ( साथ छोड़ देना ) – श्याम को व्यापार में घाटा हुआ तो उसके सभी परिवारवालों ने मुँह मोड़ लिया।
मुख खिल जाना ( प्रसन्न होना ) – बेटे का रिजल्ट
देखकर माता पिता का मुख खिल उठा ।
न्योछावर कर देना ( अर्पण करना) – सैनिक अपने प्राण भारतमाता पर न्योछावर कर देते हैं।
कैसे-कैसे पात्र
बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और सुलतान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द चित्रों को पूरा कीजिए—
पाठ से आगे
सुलतान की कहानी
मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। तब कहानी कैसे आगे बढ़ती ? स्वयं को सुलतान के स्थान पर रखकर कहानी बनाइए ।
(संकेत- आप कहानी को इस प्रकार बढ़ा सकते हैं – मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ…..)
उत्तर:
परीक्षोपयोगी नहीं।
मन के भाव
(क) कहानी में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। बताइए, कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था—
चकित
अधीर
डर
प्रसन्नता
करुणा
निराशा
उत्तर:
चकित-खड्गसिंह ने जब घोड़े को देखा तो वह चकित रह गया।
अधीर – बाबा भारती और खड्गसिंह के बीच संवाद के दौरान इसे बाबा भारती अनुभव कर रहे थे।
डर – जब खड्गसिंह ने बाबा भारती से कहा कि घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा, तब बाबा भारती इसे अनुभव कर रहे थे।
प्रसन्नता – जब बाबा भारती सुलतान की पीठ पर सवार होकर घूमने जा रहे थे तो उस समय उनके मुख पर प्रसन्नता थी।
करुणा – सहसा एक आवाज़ आई। उस आवाज़ में करुणा थी।
निराशा-फाटक पर पहुँचकर बाबा भारती को अपनी भूल प्रतीत हुई।
(ख) आप उपर्युक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं? लिखिए।
(संकेत – जैसे गली में किसी कुत्ते को देखकर डर या प्रसन्नता या करुणा आदि का अनुभव करना)
उत्तर:
चकित – आश्चर्यजनक कार्य को देखकर ।
अधीर- किसी कहानी या घटना सुनने के लिए।
डर – गली में कुत्ते को देखकर |
प्रसन्नता – अतिथि के आने पर ।
करुणा-किसी अपाहिज को देखकर |
निराशा – किसी कार्य की असफलता पर ।
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