अर्ध वार्षिक। मुख्य विंदु


 मुख्य विंदु -रेडियो रूपक ,नाटक,कहानी, रूपांतरण,विशेष लेखन,आलेख,फीचर, पत्र,

गद्य -प्रथम पाठ से कैमरे में बंद अपाहिज,काले मेघा पानी पहलवान की ढोलक जूझ।



 रेडियो रूपक रेडियो की एक सर्जनात्मक विधा है जिसमें किसी विषय को रोचक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए आवाज़ों, संगीत, ध्वनि प्रभावों, संवादों और वास्तविक रिकॉर्डिंग का एक 'कोलाज' या समुच्चय तैयार किया जाता हैयह तथ्यों पर आधारित होता है, लेकिन इसमें कल्पना और रचनात्मकता की पूरी गुंजाइश होती है, ताकि श्रोताओं के लिए प्रस्तुति नीरस न लगे. रेडियो रूपक की मुख्य विशेषताएँ

  • तथ्यों पर आधारित: 
    रूपक का मूल आधार वास्तविक तथ्य या घटनाएँ होती हैं. 
  • सर्जनात्मक प्रस्तुति: 
    तथ्यों को आकर्षक और रोचक बनाने के लिए रचनात्मक तकनीकों का उपयोग किया जाता है. 
  • ध्वनि-आधारित: 
    इसमें आवाज़ों, संगीत, और ध्वनि प्रभावों का कलात्मक प्रयोग किया जाता है. 
  • विषयों की विविधता: 
    सामाजिक समस्याओं, ऐतिहासिक घटनाओं, या किसी भी विषय को गहराई से प्रस्तुत किया जा सकता है. 
  • प्रभावी संचार: 
    इसका उद्देश्य श्रोताओं को प्रभावित करना होता है, ताकि वे तथ्यों को बोझिल न मानकर सुनने के लिए प्रेरित हों. 
  • उदाहरण
  • किसी सामाजिक समस्या (जैसे नारी उत्पीड़न) पर सीधे वार्ता या परिचर्चा के बजाय, रूपक में उस समस्या से जुड़े लोगों की वास्तविक बातचीत, उपयुक्त संगीत और ध्वनि प्रभाव गूंथकर एक सशक्त और प्रभावी प्रस्तुति दी जा सकती है.
  • किसी वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) में किसी आंदोलन के दौरान की वास्तविक ध्वनि, स्थानीय वातावरण, और लोगों के विचार आदि को प्रस्तुत करके एक सजीव और प्रमाणिक दस्तावेज़ तैयार किया जा सकता है, जिसे रेडियो वृत्त रूपक कहते हैं. 


  • 1.कहानी और नाटक में क्या-क्या असमानताएँ हैं ?

  • उत्तर-कहानी और नाटक दोनों गद्य विधाएँ हैं। इनमें जहाँ कुछ समानताएँ हैं, वहाँ कुछ असमानताएँ या अंतर भी हैं जो इस प्रकार है-

  • कहानी



  • 1. कहानी एक ऐसी गद्य विधा है जिसमें जीवन के किसी अंक विशेष का मनोरंजन पूर्ण चित्रण किया जाता है।

  • 2. कहानी का संबंध लेखक और पाठकों से होता है।

  • 3. कहानी कहीं अथवा पढ़ी जाती है।

  • 4. कहानी को आरंभ, मध्य और अंत के आधार पर बांटा जाता है।

  • 5. कहानी में मंच सज्जा, संगीत तथा प्रकाश का महत्त्व नहीं है।

  • नाटक

  • 1. नाटक एक ऐसी गद्य विधा है जिसका मंच पर अभिनय किया जाता है।

  • 2. नाटक का संबंध लेखक, निर्देशक, दर्शक तथा श्रोताओं से है।

  • 3. नाटक का मंच पर अभिनय किया जाता है।

  • 4. नाटक को दृश्यों में विभाजित किया जाता है।

  • 5. नाटक में मंच सज्जा, संगीत और प्रकाश व्यवस्था का विशेष महत्त्व होता है।

  • उत्तर-कहानी अथवा कथानक का नाट्य रूपांतरण करते समय निम्नलिखित आवश्यक बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • 1. कथानक के अनुसार ही दृश्य दिखाए जाने चाहिए।

  • 2. नाटक के दृश्य बनाने से पहले उसका खाका तैयार करना चाहिए।

  • 3. नाटकीय संवादों का कहानी के मूल संवादों के साथ मेल होना चाहिए।

  • 4. कहानी के संवादों को नाट्य रूपांतरण में एक निश्चित स्थान मिलना चाहिए।

  • 5. संवाद सहज, सरल, संक्षिप्त, सटीक, प्रभावशैली और बोलचाल की भाषा में होने चाहिए।

  • 6. संवाद अधिक लंबे और ऊबाऊ नहीं होने चाहिए।

  • उत्तर-कहानी अथवा कथानक का नाट्य रूपांतरण करते समय निम्नलिखित आवश्यक बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • 1. कथानक के अनुसार ही दृश्य दिखाए जाने चाहिए।

  • 2. नाटक के दृश्य बनाने से पहले उसका खाका तैयार करना चाहिए।

  • 3. नाटकीय संवादों का कहानी के मूल संवादों के साथ मेल होना चाहिए।

  • 4. कहानी के संवादों को नाट्य रूपांतरण में एक निश्चित स्थान मिलना चाहिए।

  • 5. संवाद सहज, सरल, संक्षिप्त, सटीक, प्रभावशैली और बोलचाल की भाषा में होने चाहिए।



  • 6. संवाद अधिक लंबे और ऊबाऊ नहीं होने चाहिए।

  • कहानी के पात्र नाट्य रूपांतरण में निम्न प्रकार से परिवर्तित किये जा सकते हैं-

  • 1. नाट्य रूपांतरण करते समय कहानी के पात्रों की दृश्यात्मकता का नाटक के पात्रों से मेल होना चाहिए।

  • 2. पात्रों की भावभंगिमाओं तथा उनके व्यवहार का भी उचित ध्यान रखना चाहिए।

  • 3. पात्र घटनाओं के अनुरूप मनोभावों को प्रस्तुत करने वाले होने चाहिए।

  • 4. पात्र अभिनय के अनुरूप होने चाहिए।

  • 5. पात्रों का मंच के साथ मेल होना चाहिए।

  • प्रश्न 6. कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्य विभाजन कैसे करते हैं ?

  • उत्तर-कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्य विभाजन निम्न प्रकार करते हैं-

  • 1. कहानी की कथावस्तु को समय और स्थान के आधार पर विभाजित करके दृश्य बनाए जाते हैं।

  • 2. प्रत्येक दृश्य कथानक के अनुसार बनाया जाता है।

  • 3. एक स्थान और समय पर घट रही घटना को एक दृश्य में लिया जाता है।

  • 4. दूसरे स्थान और समय पर घट रही घटना को अलग दृश्यों में बांटा जाता है।

  • 5. दृश्य विभाजन करते समय कथाक्रम और विकास का भी ध्यान रखा जाता है।


  • फीचर लेखन 

  • फीचर लेखन पत्रकारिता की एक रचनात्मक विधा है, जिसमें किसी भी विषय (सामाजिक, ऐतिहासिक, व्यक्ति विशेष, या किसी मानवीय रुचि के विषय) पर तथ्यात्मक जानकारी को मनोरंजक और कलात्मक शैली में प्रस्तुत किया जाता है. इसका उद्देश्य पाठकों को सूचित करने के साथ-साथ उनका मनोरंजन करना, उन्हें जागरूक बनाना और भावनात्मक स्तर पर जोड़ना होता है. फीचर लेखन, समाचार की तुलना में लंबा, अधिक विस्तृत और विश्लेषण परक होता है, जिसमें लेखक को अपनी राय और भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिलता है. 
  • फीचर लेखन की प्रमुख विशेषताएँ:
  • विषय की गहराई: फीचर किसी विषय या घटना को गहराई से दर्शाता है, जिसमें उसके विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाता है. 
  • मनोरंजक और कलात्मक शैली: यह लेखन तथ्यपूर्ण होते हुए भी रोचक और कलात्मक भाषा का प्रयोग करता है, ताकि पाठक आकर्षित हो और लेख में रुचि ले. 
  • सृजनात्मकता: फीचर लेखन में लेखक की अपनी रचनात्मकता और मौलिकता झलकती है, जिससे लेख जीवंत हो उठता है. 
  • लंबाई: समाचार की तुलना में फीचर अधिक विस्तृत और लंबा होता है, क्योंकि इसमें विषय की विस्तृत जानकारी दी जाती है. 
  • भावनात्मक जुड़ाव: फीचर का उद्देश्य पाठक के साथ भावनात्मक संबंध स्थापित करना भी होता है. 
  • विभिन्न प्रकार: मानवीय रुचि वाले विषय, ऐतिहासिक घटनाएँ, वैज्ञानिक पहलू, पर्व-उत्सव आदि कई तरह के विषयों पर फीचर लिखे जा सकते हैं. 
  • फीचर लेखन की प्रक्रिया:
  • विषय का चयन: सबसे पहले किसी ऐसे विषय का चयन किया जाता है, जो पाठकों के लिए रुचिकर हो. 
  • अनुसंधान: चयनित विषय से संबंधित तथ्यों, जानकारियों और विभिन्न पहलुओं का गहन अनुसंधान किया जाता है. 
  • लेखन: प्राप्त तथ्यों को रचनात्मक और कलात्मक शैली में लिखा जाता है. 
  • संपादन: लेख को दोबारा पढ़कर भाषा, वर्तनी और तथ्यों की शुद्धता सुनिश्चित की जाती है. 
  • संक्षेप में, फीचर लेखन एक ऐसा तरीका है जिससे जानकारी को इस तरह प्रस्तुत किया जाता है कि वह आकर्षक, मनोरंजक और सूचनात्मक बने, जिससे पाठक प्रभावित हो.

  • आलेख
  • हिंदी में आलेख का अर्थ किसी विषय पर आधारित तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक लेख होता है, जिसमें लेखक किसी भी विषय की संपूर्ण जानकारी, तथ्य, विचार और तर्क के आधार पर प्रस्तुत करता है. यह किसी महत्वपूर्ण या ज्वलंत विषय पर लिखा जाता है ताकि पाठक को उस विषय के बारे में पूरी और सटीक जानकारी मिल सके. 
  • आलेख की विशेषताएं
  • तथ्यात्मकता: आलेख में किसी विषय से जुड़ी हुई तथ्यात्मक जानकारी देना अनिवार्य होता है. 
  • विश्लेषण: लेखक विषय का विश्लेषण करता है और नवीन अवधारणाओं को स्थापित करने का प्रयास करता है. 
  • स्पष्टता: आलेख की भाषा सरल, स्पष्ट और सहज होनी चाहिए ताकि पाठक उसे आसानी से समझ सके. 
  • संपूर्णता: लेखक का उद्देश्य होता है कि वह उस विषय से जुड़ी हुई जितनी भी जानकारी दे रहा है, वह पूर्ण और सटीक हो. 
  • रुचिकर बनाना: विषय को रुचिकर बनाने के लिए तथ्यों, उदाहरणों और मिसालों का उपयोग किया जाता है. 
  • नया दृष्टिकोण: आलेख में विषय पर शोधार्थी का नया दृष्टिकोण या नवीन धारणा स्थापित की जाती है. 
  • आलेख के विषय
  • आलेख विभिन्न विषयों पर लिखे जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: 
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी
  • समाज और संस्कृति
  • पर्यावरण
  • सामसामयिक घटनाएँ
  • महत्वपूर्ण व्यक्ति या चरित्र
  • ज्वलंत मुद्दे
  • एक अच्छा आलेख लिखने के गुण
  • विषय वस्तु की सही जानकारी: पाठक को विषय के बारे में सही और पर्याप्त जानकारी मिलनी चाहिए. 
  • रुचिकर बनाना: विषय को रोचक बनाने के लिए उदाहरण और तथ्यों का प्रयोग करना. 
  • स्पष्ट और सुलभ बनाना: लेख को इतना स्पष्ट और सुलभ बनाना कि हर कोई उसे समझ सके. 
  • संक्षिप्तता: आवश्यकतानुसार ही विवरण देना और अनावश्यक बातों से बचना. 
  • सुसंगति: आलेख में विचारों और तथ्यों का दोहराव नहीं होना चाहिए.


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