तुलसी कृत लक्ष्मण की मूर्छा प्रसंग

3/12/25
सरला की पाठशाला में पुनः अभ्यास 

प्रसंग -लक्ष्मन की मूर्छा , 
उद्देश्य -नैतिक एवं आध्यात्मिक बोध एवं पुनरावृत्ति से  विषय परिपक्वता।
शिक्षण विधि- कथा, व्याख्यान, प्रयोग प्रश्नोत्तरी।
ग्रंथ -राम चरितमानस  लंका काण्ड 
संकलन -आरोह 12हिंदी
भाषा -अवधी।



पाठ आधारित बोध प्रश्न -
1. राम का विलाप शंकर सेवा पर क्या प्रभाव पड़ा? 
2. प्रथम दोहा में किन दो घटनाओं की ओर संकेत किया गया है ?यहां हनुमान किस-किस से जाने की आज्ञा मांग रहे है?
3. संपूर्ण प्रसंग में भाषा, छंद ,रस, एवं अलंकार पर विचार प्रकट कीजिए।
4."जगदंबा हरि इन सब अब चाहत कल्याण "
किसका कथन है? सप्रसंग व्याख्या करें।
5.सम्पूर्ण प्रसंग अनुसार लक्ष्मण के त्याग पर प्रकाश डालें।
6.लक्ष्मण की दशा देखकर कौन मनुष्य की भांति विलाप करने लगे?करुण रस की पुष्टि में तर्क दें।
7.लक्ष्मण के अभाव में राम स्वयं की तुलना किसी किस से करते हैं?
8.करुणा के बीच वीर रस का प्रकट होने का भाव स्पष्ट करें।
9.लक्ष्मण के जीवित होने के समाचार मिलते ही रावण की क्या प्रतिक्रिया हुई?
10.जागते हुए कुंभकरण कैसा प्रतीत हो रहा था? वह रावण की बात सुनकर व्याकुल क्यों हुआ?
11.रावण के कथनानुसार युद्ध में उसके कौन कौन वीर मारे गये?
12.इस प्रसंग में वैद्य और औषधि पर प्रकाश डालिए।


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