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मेघ आए

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  https://www.facebook.com/share/v/1BEE74KMwR/?mibextid=oFDknk  वीडियो देखने के लिए क्लिक करें  NCERT  - मेघ आए क्षितिज भाग-1 ह प्रश्न अभ्यास  1. बादलों के आने पर प्रकृति में जिन गतिशील क्रियाओं को कवि ने चित्रित किया है, उन्हें लिखिए। उत्तर बादलों के आने पर प्रकृति में भिन्न तरह के परिवर्तन आते हैं। बादलों के आने की सूचना बयार नाचते-गाते देती हुई चलती है। बादलों के आगमन की सुचना पाकर लोग अतिथि सत्कार के लिए घर के दरवाज़े तथा खिड़कियाँ खोल देते हैं। वृक्ष कभी गर्दन झुकाकर तो कभी उठाकर उनको देखने का प्रयत्न कर रहे हैं। आंधी आकर धूलो को उड़ाती है। प्रकृति के अन्य रुपों के साथ नदी ठिठक गई तथा घूँघट सरकाकर आँधी को देखने का प्रयास करती है। सबसे बड़ा सदस्य होने के कारण बूढ़ा पीपल आगे बढ़कर आँधी का स्वागत करता है। तालाब पानी से भर जाते हैं। आकश में बिजली चमकती है और वर्षा के बून्द मिलान के आंसू बहाते हैं।  2. निम्नलिखित किसके प्रतीक हैं ? धूल, पेड़, नदी, लता, ताल उत्तर 1 धूल - स्त्री 2 पेड़- नगरवासी 3 नदी - स्त्री 4 लता - मेघ की प्रतिक्षा करती नायिका 5 ताल - सेवक(नाई...

ग्राम श्री (सुमित्रानंदन पंत

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 प्रश्न 1. कवि ने गाँव को ‘हरता जन-मन’ क्यों कहा है? उत्तर- कवि ने गाँव को ‘हरता जन-मन’ इसलिए कहा है क्योंकि उसकी शोभा अनुराग है। खेतों में दूर-दूर तक मखमली हरियाली फैली हुई है। उस पर सूरज की धूप चमक रही है। इस शोभा के कारण पूरी वसुधा प्रसन्न दिखाई देती है। इसके कारण गेहूँ, जौ, अरहर, सनई, सरसों की फसलें उग आई हैं। तरह-तरह के फूलों पर रंगीन तितलियाँ मँडरा रही हैं। आम, बेर, आड़, अनार आदि मीठे फल पैदा होने लगे हैं। आलू, गोभी, बैंगन, मूली, पालक, धनिया, लौकी, सेम, टमाटर, मिर्च आदि खूब फल-फूल रहे हैं। गंगा के किनारे तरबूजों की खेती फैलने लगी है। पक्षी आनंद विहार कर रहे हैं। ये सब दृश्य मनमोहक बन पड़े हैं। इसलिए गाँव सचमुच जन-मन को हरता है। प्रश्न 2. कविता में किस मौसम के सौंदर्य का वर्णन है? उत्तर- कविता में सरदी के मौसम के सौंदर्य का वर्णन है। इसी समय गुलाबी धूप हरियाली से मिलकर हरियाली पर बिछी चाँदी की उजली जाली का अहसास कराती है और पौधों पर पड़ी ओस हवा से हिलकर उनमें हरारक्त होने का भान होता है। इसके अलावा खेत में सब्ज़ियाँ तैयार होने, पेड़ों पर तरह-तरह के फल आने, तालाब के किनारे रेत ...

किशोरावस्था में वासना का ज्वर

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 प्रिय छात्रों! सदा प्रसन्न रहो और सन्मार्ग पर बढ़ो। किसी शायर ने लिखा था शमा कहे परवाने से परे चला जा मेरी तरह जल जाएगा पास नहीं आ। सब को यही लगता है कि पतंगें को दीपक  से प्रकाश से प्यार है, पर हम जरा गौर से सोचें तो अगर उसे प्रकाश से प्यार है तो सूरज से भी होना चाहिए न आखिर दिन में कहां चले जाते हैं पतंगें? अर्थात उन्हें प्रकाश से नहीं तम ,अज्ञान से  अंधेरे  की चाह है।वह तम जो उन्हें विनाश की ओर ले जाता है।पता है ये पतंगा  की स्तिथि मनुष्य में कब दिखती है बच्चों?जब वह 12-13वर्ष की अवस्था पार करके किशोरावस्था में प्रवेश करता है।जो अवस्था अभी आप पर चल रही है।ये अवस्था तपस्या की अवस्था है पर कुछ ही तपस्वी टिक पाते हैं क्योंकि वे बल को विवेक पर हावी नहीं होने देते बस अपने लक्ष्य पर हर पल  अर्जुन की तरह दृष्टि गढाए रहते हैं वरना तो अधिकांश के विवेक पर बल हावी होने लगता है जो धीरे-धीरे बालकों को पशुता की ओर ले जाता। विवेक हीन बल तो पशु के पास ही होता है। कुछ का विवेक ,संगति,और परवरिश उसे पशु नहीं बनने देती। बड़े ही पुण्यात्मा और भाग्यशाली होते हैं वे बालक जिन्...

विदाई सम्भाषण

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  NCERT  Class 11th: पाठ 4 - विदाई-संभाषण आरोह भाग-1 हिंदी (Vidai Sambhashan) अभ्यास पाठ के साथ 1. शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहते हैं? उत्तर शिवशंभु की दो गायों के माध्यम से लेखक यह समझाना चाहते हैं कि जिस देश के पशुओं के बिछड़ते समय ऐसी मनोदशा होती है, वहाँ मनुष्यों की कैसी दशा हो सकती, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है| कहानी में दो गायें होती हैं जिनमें से एक बलवान और दूसरी कमजोर थी| वह कभी-कभी अपने सींगों की टक्कर से दूसरी कमजोर गाय को गिरा देती थी| एक दिन बलवान गाय पुरोहित को दे दी गई| उसके जाने के बाद कमजोर गाय दिन भर भूखी रही| उसी प्रकार लॉर्ड कर्जन ने अपने शासन-काल में भले ही भारतवासियों का शोषण किया हो लेकिन उनके जाने का दुःख सबको है| 2. आठ करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना पर आपने जरा भी ध्यान नहीं दिया- यहाँ किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है? उत्तर लॉर्ड कर्जन ने बंगाल-विभाजन का निर्णय लेकर भारत की एकता को खंडित करने की योजना बनाई| भारतवासियों ने लॉर्ड कर्जन की इस जिद के आगे बहुत विनती की, ताकि यह विभाजन न हो| लेकि...

धोखा ही धोखा

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 हा अपनों को धोखा परायों को धोखा, हां खुद को धोखा ही मैं दे रहा था। समझता था तो भी मैं मानता नहीं था। ये पापों की नैया को मैं के रहा था। हां भगवान बन कर मैं ठगता था सबको, मैं दिन में था  कुछ, रात मैं कुछ और था, मैं औरों को उपदेश देकर ठग रहा था हां भगवान खुद बन मजे ले रहा था। खुल गयी पोल आखिर,मिटा ढोंग सारा, पड़ा जेल में खूब अब मैं रो रहा हूं। ये चालाकियां सब धरी रह गयी हैं, सना सारा जीवन ही छल से रहा था, हां नरक द्वार मेरे लिए हंस रहा है। वे यम दूत जाने मेरा क्या करेंगे? भुगतने पड़ेंगे कुकर्मों के फल सब। कुकर्मों का साथी चुना चे रहा था। रचनाकार प्रेमचंद शर्मा जिरौलिया

देख हालत आज की मन रो रहा

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  मेरे घर में है आज ये क्या हो रहा?  देख हालत आजकी मन रो रहा। खिंच रही आपस में सब की चोटियां,  छिंन रही आपस में सब की रोटियां, मुकदमों की आज रेलम पेल है , हाय ये क्या जेल भी तो फेल है। भ्रष्ट सिस्टम दारु पीकर सो रहा। देख हालत आज की मन रो रहा।(1) रिश्ते नाते खत्म बस धोखा दगा , अब ना कोई है किसी का भी सगा।  खा गई पूरब को पश्चिम की हवा, सूझती है अब नहीं कोई भी दवा। आज तो धीरज भी धीरज खो रहा। देख हालत आज की मन रो रहा।(2) मेरा घर भारत बना है इंडिया, इसलिए शायद हुआ बरबंडिया। हम हुए अंग्रेज अब हिंदू नहीं, हिंदुता का एक भी विंदू नहीं। लूट अंकुर हर कोई है बो रहा। देख हालत आज की मन रो रहा। रचनाकार  प्रेमचंद शर्मा, जिरौलिया

पाथेर पांचाली अपू के ढाई वर्ष

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 NCERT class 11पाठ अपू के ढाई वर्ष  प्रश्न 1 – पथेर पांचाली फिल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला? उत्तर – ‘पथेर पांचाली’ फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक चला। इसके बहुत से कारण थे। जैसे लेखक को पैसे का अभाव था। पैसे इकट्ठे होने पर ही वह शूटिंग करता था। वह विज्ञापन कंपनी में काम करता था। इसलिए काम से फुर्सत होने पर ही लेखक तथा अन्य कलाकार फिल्म का काम करते थे। तकनीक के पिछड़ेपन के कारण पात्र, स्थान, दृश्य आदि की समस्याएँ आ जाती थीं। पैसों के अभाव के कारण शूटिंग को बार-बार रोकना पड़ता था। शूटिंग में होने वाली देरी के कारण कई स्थान और पात्र भी या तो बदल जाते थे या उनका देहांत हो जाता था जिस कारण लेखक को उनसे मिलते-झूलते पात्र व् स्थान ढूँढना कठिन हो जाता था। प्रश्न 2 – अब अगर हम उस जगह बाकी आधे सीन की शूटिंग करते, तो पहले आधे सीन के साथ उसका मेल कैसे बैठता? उसमें से ‘कंटिन्युइटी’ नदारद हो जाती-इस कथन के पीछे क्या भाव है? उत्तर – किसी भी चीज़ में निरंतरता होनी चाहिए ताकि वह स्वाभाविक लगे। ‘उसमें से ‘कंटिन्युइटी’ नदारद हो जाती’ – इस कथन के पीछे भाव यह है कि कोई भी फिल्म हमें...