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Showing posts from August, 2025

हिंदी सप्ताह आयोजन

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  11/9/2025 ये प्रतियोगिता होने वाली है चुनौतीपूर्ण उल्लास भरी 75,की स्पीड पर दो मिनट की वीडियो ओडियो को सुनकर शुद्ध सुंदर त्रुटि रहित लिखना। कम से कम त्रुटि करने वाला होगा विजेता। इसमें हम परखेंगे बालकों की एकाग्रता, धैर्य,ग्राह्यता,लेखन कौशल। वीडियो धारा प्रवाह लेखन हेतु https://youtu.be/IgEZRQnL7Yc?si=H2XWmiG6zSiEYzF6 कापी करें फिर चलाए। 9/9/2025 https://youtu.be/zxy0cE05a38?si=roRzQLOhK_3jgBv2 https://youtu.be/TFmbmHKddJc?si=D4J_Wn6AAzARmuKX 11/9/2025। कल की प्रतियोगिता होने वाली है चुनौतीपूर्ण उल्लास भरी 75,की स्पीड पर दो मिनट की वीडियो ओडियो को सुनकर शुद्ध सुंदर त्रुटि रहित लिखना। कम से कम त्रुटि करने वाला होगा विजेता। इसमें हम परखेंगे बालकों की एकाग्रता, धैर्य,ग्राह्यता,लेखन कौशल। प्रतियोगिता नम्बर एक- शब्द कपड ,शब्द सुधार ,एवं प्रश्न मच प्रथम चरण - भाषा सुधार  द्वितीय चरण -प्रश्न मंच, सुंदरकांड प्रश्न मंच, हनुमान जयंती -  March 28, 2023 6अप्रेल 2023 हनुमान जयंती   *सुंदरकांड प्रश्नोत्तरी,  1*तुलसीदास ने सुंदरकांड के मंगलाचरण में प्रथम श्लोक में वंदन...

कहानी का नाटक रूपांतरण

 1.कहानी और नाटक में क्या-क्या असमानताएँ हैं ? उत्तर-कहानी और नाटक दोनों गद्य विधाएँ हैं। इनमें जहाँ कुछ समानताएँ हैं, वहाँ कुछ असमानताएँ या अंतर भी हैं जो इस प्रकार है- कहानी 1. कहानी एक ऐसी गद्य विधा है जिसमें जीवन के किसी अंक विशेष का मनोरंजन पूर्ण चित्रण किया जाता है। 2. कहानी का संबंध लेखक और पाठकों से होता है। 3. कहानी कहीं अथवा पढ़ी जाती है। 4. कहानी को आरंभ, मध्य और अंत के आधार पर बांटा जाता है। 5. कहानी में मंच सज्जा, संगीत तथा प्रकाश का महत्त्व नहीं है। नाटक 1. नाटक एक ऐसी गद्य विधा है जिसका मंच पर अभिनय किया जाता है। 2. नाटक का संबंध लेखक, निर्देशक, दर्शक तथा श्रोताओं से है। 3. नाटक का मंच पर अभिनय किया जाता है। 4. नाटक को दृश्यों में विभाजित किया जाता है। 5. नाटक में मंच सज्जा, संगीत और प्रकाश व्यवस्था का विशेष महत्त्व होता है। उत्तर-कहानी अथवा कथानक का नाट्य रूपांतरण करते समय निम्नलिखित आवश्यक बातों का ध्यान रखना चाहिए- 1. कथानक के अनुसार ही दृश्य दिखाए जाने चाहिए। 2. नाटक के दृश्य बनाने से पहले उसका खाका तैयार करना चाहिए। 3. नाटकीय संवादों का कहानी के मूल संवादों के स...

जनसंचार और मध्यम महत्वपूर्ण प्रश्न

अति महत्वपूर्ण प्रश्न प्रश्न 1: प्रमुख जनसंचार माध्यम कौन-से हैं? उत्तर – जनसंचार के प्रमुख माध्यम हैं-समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, फ़िल्म, टेलीविजन, रेडियो, टेलीफोन, इंटरनेट, पुस्तकें आदि। प्रश्न 2: प्रिंट माध्यम से आप क्या समझते हैं? उत्तर – संचार के जो साधन प्रिंट अर्थात छपे रूप में लोगों तक सूचनाएँ पहुँचाते हैं, उन्हें प्रिंट (मुद्रित) माध्यम कहा जाता है। प्रश्न 3: प्रिंट माध्यम के दो प्रमुख साधन कौन-कौन-से हैं? उत्तर – प्रिंट माध्यम के दो प्रमुख साधन है- समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ प्रश्न 4: प्रिंट मीडिया (माध्यम) का महत्व हमेशा क्यों बना रहेगा? उत्तर – वाणी, विचारों, सूचनाओं, समाचारों आदि को लिखित रूप में रिकॉर्ड करने का आरंभिक साधन होने के कारण प्रिंट मीड़िया का महत्त्व हमेशा बना रहेगा। प्रश्न 5: पत्रकारिता किसे कहते हैं? उत्तर – प्रिंट (मुद्रित), रेडियो, टेलीविजन या इंटरनेट किसी भी माध्यम से खबरों के संचार को पत्रकारिता कहते हैं। प्रश्न 6: भारत में अखबारी पत्रकारिता की शुरुआत कब और कहाँ से हुई? उत्तर – भारत में अखबारी पत्रकारिता की शुरुआत सन 1780 में जेम्स ऑगस्ट हिकी के ‘बंगाल गजट’ ...

कहानी

 प्रश्न 1. कहानी की परिभाषा स्पष्ट कीजिए। उत्तर-परिभाषा-कहानी साहित्य की एक ऐसी गद्य विधा है जिसमें जीवन के किसी एक अंग विशेष का मनोरंजन पूर्ण चित्रण किया जाता है। कहानी एक ऐसी साहित्यिक विधा है, जो अपने सीमित क्षेत्र में पूर्ण एवं स्वतंत्र है, प्रभावशाली है। कहानी में मानव जीवन की कथा होती है। अलग-अलग विद्वानों और लेखकों ने कहानी की विभिन्न परिभाषाएं दी हैं परंतु कहानी की परिभाषा को लेकर एक निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकते। प्रेमचंद ने कहानी की परिभाषा इस प्रकार दी है- "कहानी एक रचना है, जिसमें जीवन के किसी अंग किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य होता है। उसका चरित्र, शैली तथा कथा विन्यास सब उसी भाव को पुष्ट करते हैं।" अर्थात् किसी घटना पात्र या समस्या का क्रमबद्ध ब्योरा जिसमें परिवेश हो, द्वंद्वात्मकता हो, कथा का क्रमिक विकास हो, चरम उत्कर्ष का बिंदु हो, उसे कहानी कहा जा सकता है प्रश्न 2. कहानी के तत्व कौन-कौन से हैं ? अथवा कहानी की तात्विक समीक्षा कीजिए। उत्तर-कहानी साहित्य की एक गद्य विधा है। इसके प्रमुख तत्व इस प्रकार हैं- 1. कथानक अथवा कथावस्तु 2. पात्रयोजना...

कविता लेखन

 प्रश्न 1. कविता लेखन से संबंधित दो मत क्या हैं ? उत्तर-पहला मत-पहला मत यह है कि कविता लेखन की कोई निश्चित प्रणाली नहीं होती। न ही कविता लेखन की कोई प्रणाली बताई अथवा सिखाई जा सकती है। कविता तो मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी होती है और इसे एक भावुक और संवेदनशील हृदय ही लिख सकता है। कविता केवल भावुक हृदय में ही उमड़ सकती है इसे चित्रकला, संगीतकला, नृत्यकला आदि की तरह सिखाया नहीं जा सकता चित्रकला को रंग, कूची, कैनवास आदि तथा संगीत कला को लय स्वर, ताल, वाद्य आदि उपकरणों के माध्यम से सिखाया जा सकता है। किंतु कविता में इस प्रकार के कई उपकरण नहीं होते। कविता को किसी बाह्य उपकरण की सहायता से सिखाया नहीं जा सकता। कवि अपनी संवेदनाओं को कविता के रूप में प्रस्तुत करता है। दूसरा मत-दूसरा मत यह है कि चित्रकला, संगीतकला आदि के समान कविता लेखन को भी सिखाया जा सकता है। भारत तथा पश्चिमी देशों के कुछ विश्व-विद्यालयों में काव्य लेखन से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इस प्रकार चित्र, संगीत, नृत्य आदि कलाओं के समान कविता लेखन को भी अभ्यास के द्वारा सीखा जा सकता है। कविता के बार-बार पढ़ने तथा विषय के जानने ...

नाटक

 प्रश्न 1. नाटक किसे कहते हैं ? उत्तर-साहित्य की वह विधा जिसके पढ़ने के साथ-साथ अभिनय भी किया जा सकता है उसे नाटक कहते हैं। भारतीय काव्य शास्त्र में नाटक को दृश्य काव्य माना जाता है। नाटक रंगमंच की एक प्रमुख विधा है। इसलिए इसे पढ़ा, सुना और देखा भी जा सकता है। प्रश्न 2. नाटक में चित्रित पात्र कैसे होने चाहिए ? उत्तर-नाटक में पात्रों का बहुत महत्त्व है नाटक में चित्रित पात्र निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:- (i) पात्र चरित्रवान होने चाहिए। (ii) पात्र आदर्शवादी होने चाहिए। (iii) पात्र अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के होने चाहिए। (iv) पात्र जीवंत तथा जीवन से जुड़े होने चाहिए। (v) पात्र सामाजिक परिवेश से जुड़े होने चाहिए। (vi) पात्र कथानक से संबंधित होने चाहिए। प्रश्न 3. नाटक की भाषा-शैली कैसी होनी चाहिए ? उत्तर-नाटक की भाषा-शैली निम्नलिखित प्रकार की होनी चाहिए :- (i) नाटक की भाषा-शैली सरल और सहज होनी चाहिए। (ii) इसकी भाषा-शैली स्वाभाविक तथा प्रसंगानुकूल होनी चाहिए। (iii) इसकी भाषा-शैली पात्रानुकूल होनी चाहिए। (iv) इसकी भाषा-शैली विषयानुकूल होनी चाहिए। (v) इसकी भाषा-शैली संवादों के अनुकूल ह...

विशेष लेखन

प्रश्न 1: समाचार-पत्र-पत्रिकाओं में विशेष लेखन किन विषयों पर किया जाता है? उत्तर – समाचार-पत्र-पत्रिकाओं में विशेष लेखन खेल, अर्थ-व्यापार, सिनेमा या मनोरंजन आदि विषयों पर किया जाता है। प्रश्न 2: विशेष लेखन क्यों किया जाता है? उत्तर – विशेष लेखन इसलिए किया जाता है, क्योंकि इससे समाचार-पत्रों में विविधता आती है और उनका कलेवर बढ़ता है। पाठकों की व्यापक रुचियों को ध्यान में रखते हुए उनकी जिज्ञासा शांत करते हुए मनोरंजन करने के लिए विशेष लेखन किया जाता है। प्रश्न 3: विशेष संवाददाता किन्हें कहते हैं? उत्तर – जिन रिपोर्टरों द्वारा विशेषीकृत रिपोर्टिग की जाती है, उन्हें विशेष संवाददाता कहते हैं।  प्रश्न 4: फ्री-लांस पत्रकार किन्हें कहते हैं? उत्तर – एक निश्चित भुगतान लेकर अलग-अलग समाचार-पत्र-पत्रिकाओं के लिए समाचार-लेखन करने वाले पत्रकारों को फ्री-लांस पत्रकार कहते हैं।  प्रश्न 5: क्रिकेट की कमेंट्री करने वाले दो प्रसिदध व्यक्तियों के नाम लिखिए। उत्तर – नरोत्तम पुरी जसदेव सिंह हर्ष भोगले प्रश्न 6: कारोबार एवं व्यापार क्षेत्र से जुड़ी पाँच शब्दावली लिखिए। उत्तर – मुद्रा-स्फीति तेजड़िए ब...

झलकी लोक नृत्य जिकरी रसिया रास झलकी जन्मोत्सव

 सभी दर्शकों को अथर्व पाठक की ओर से जय श्री राधे !जय श्री कृष्ण ! हम सभी छात्र आज उपस्थित हैं बृज की लोक विधा - "जिकरी रसिया रास लोक नृत्य "की एक झलकी जन्मोत्सव लेकर ! महोदय! प्रस्तुति की अनुमति चाहते हैं - जुलम करि डारौ जी जा कारी कामरि बारे नै 2.2. सोय गये सब पहरे बारे 2.2.2.  ,और आप ही.3 खुल गये तारे जी।2 जुलम करि डारौ जी ,जा काली कामर बारे नै,  - 2-2 मथुरा में जानै जन्म लियो है 2.2.2.,गोकुल में 3.बजे नगाड़े जी ।2. जा कारी ------ काकी - अरी रामकली इतनौ काहे कूं झूमि रही है? रामकली -अरे काकी तुम्हें नाय पतौ  ?जसोदा के लल्ला भयो है! सब बधाई देने जाय रहे हैं ,वो देखो आनंद कौ हो हल्ला! -सखी चलौ नंद के द्वार लाला के दर्शन करि आवैं। काकी- हां बु तौ सही है मैंऊ मयीं जाइ रही हूं,परि मैंने सुनी है कि लल्ला थोड़ो कारौ  है।? का कही? कारौ? कारौ कारौ मति करै गुजरिया, चौं कारें कौ जिकर करै, कारें रंग पै मोरनी रुदन (नाच) करै।2 मौटे मौटे नैन लला के ,2 उनमें कजरा गजब करै। कारै-- छोटे छोटे हाथ लला. के2  उनमें मुरली गजब करै।2 कारे-- काले घुंघराले केश लला के , 2 मोर मुकुट म...

दिशा के लिए विशेष पत्र

 प्रिय बेटू दिशा! सदा प्रसन्न रहो! मेरा पत्र ध्यान से पढ़ना और समझना।वैसे ये पत्र आप सब बच्चों के लिए है  परन्तु बाक़ी सभी अभी छोटे हैं और तुम घर में सबसे बड़ी हो तो समझदार हो तो तुम्हें मेरी बातें समझ में आएंगी। अब तुम नवीं कक्षा में आ चुकी हो नया विद्यालय है नया महौल, नयी किताबें,और नयी सहेलियां होंगी। पढ़ाई और व्यस्तता के बीच हमेशा बैलेंस बनाकर चलना किसी भी प्रकार का भय तनाव या दिखावे को अपने ऊपर हावी न होने देना।जिस उम्र में तुम हो अक्सर इस अवस्था में हमारे मन मस्तिष्क सोच और व्यवहार में बहुत से परिवर्तन आते हैं बहुत से भ्रम और शंकाएं और प्रश्न होते हैं  जिनका जबाब अक्सर हम अपने साथियों से पूछते हैं पर क्यों कि वो भी आप की ही अवस्था के होते हैं तो वो भी कन्फ्यूजन की स्थिति में होते हैं। ऐसी स्थिति में हमें केवल हमारे बड़े ही सटीक उत्तर दे पाते हैं। अतः अपनी कोई भी बात जिज्ञासा बेझिझक   मुझसे (अपनी बुआ से,)अपनी मां से अपने परिवार से पूछना चाहिए।याद रखना संसार में दो ही सबसे सच्चे मित्र होते हैं एक है अपनी मां और दूसरे हैं हमारे ज्ञान ग्रंथ, पुस्तकें। विद्यालय...

सीबीएसई 12th हिंदी रचनात्मक एवं अभिव्यक्ति कौशल

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 मुख्य बिंदु - कविता , कहानी,नाटक, आलेख, फीचर, रचनात्मक लेख ,पत्र लेखन