कविता लेखन

 प्रश्न 1. कविता लेखन से संबंधित दो मत क्या हैं ?

उत्तर-पहला मत-पहला मत यह है कि कविता लेखन की कोई निश्चित प्रणाली नहीं होती। न ही कविता लेखन की कोई प्रणाली बताई अथवा सिखाई जा सकती है। कविता तो मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी होती है और इसे एक भावुक और संवेदनशील हृदय ही लिख सकता है। कविता केवल भावुक हृदय में ही उमड़ सकती है इसे चित्रकला, संगीतकला, नृत्यकला आदि की तरह सिखाया नहीं जा सकता चित्रकला को रंग, कूची, कैनवास आदि तथा संगीत कला को लय स्वर, ताल, वाद्य आदि उपकरणों के माध्यम से सिखाया जा सकता है। किंतु कविता में इस प्रकार के कई उपकरण नहीं होते। कविता को किसी बाह्य उपकरण की सहायता से सिखाया नहीं जा सकता। कवि अपनी संवेदनाओं को कविता के रूप में प्रस्तुत करता है।

दूसरा मत-दूसरा मत यह है कि चित्रकला, संगीतकला आदि के समान कविता लेखन को भी सिखाया जा सकता है। भारत तथा पश्चिमी देशों के कुछ विश्व-विद्यालयों में काव्य लेखन से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इस प्रकार चित्र, संगीत, नृत्य आदि कलाओं के समान कविता लेखन को भी अभ्यास के द्वारा सीखा जा सकता है। कविता के बार-बार पढ़ने तथा विषय के जानने से कवि की संवेदनाओं के निकट पहुंचा जा सकता है। इस मत के मानने वालों का विचार है कि उचित प्रशिक्षण तथा अभ्यास के द्वारा कविता लेखन सरलता से किया जा सकता है।

प्रश्न 2. कविता-लेखन में शब्दों का क्या महत्त्व है ?

उत्तर-कविता लेखन में शब्दों का बहुत महत्त्व हैं जो इस प्रकार है:-

(i) शब्द कविता के मूल आधार होते हैं।

(ii) शब्दों की सहायता से ही कविता लेखन संभव हो सकता है।

(iii) शब्द ही कविता लेखन के सर्वोत्तम और प्राथमिक उपकरण है।

(iv) शब्दों के उचित मेल से ही कविता बनती है।

(v) कवि की संवेदनाएँ अमूर्त होती हैं जिन्हें शब्दों के द्वारा ही मूर्त रूप प्रदान किया जाता है।

(iv) कविता लेखन में कवि शब्दों को छंदबद्ध करता है ; जैसे

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !

हो जाए न पथ में रात कहीं,

मंजिल भी तो है दूर नहीं-

यह सोच थका दिन का पंथी भी

जल्दी-जल्दी चलता है !

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

प्रश्न 3. कविता में बिंबों की क्या भूमिका है ?

उत्तर- बिंब का अर्थ-बिंब का शाब्दिक अर्थ है-शब्द चित्र अर्थात् जिन शब्दचित्रों के माध्यम से कवि अपनी कल्पना को साकार रूप प्रदान करता है उन्हें बिंब कहते हैं।

प्रश्न 4. छंद से क्या तात्पर्य है तथा कविता की रचना में छंद का क्या महत्त्व है ?

उत्तर-छंद से तात्पर्य वर्ण, मात्रा, यति, गति, लय आदि के सुव्यवस्थित एवं सुसंगठित रूप को छंद कहते हैं।

कविता में छंद का महत्त्व :-कविता की रचना में छंद की बहुत महत्त्व है जो इस प्रकार है:-

(i) छंद कविता के अनिवार्य तत्त्व हैं।

(ii) ये कविता को संगीतात्मकता प्रदान करते हैं।

(iii) ये कविता को कविता का रूप प्रदान करते हैं।

(iv) ये कविता को प्रवाहमयता प्रदान करते हैं।

(v) ये कविता को गेयता प्रदान करते हैं।

(vi) ये कविता को माधुर्य प्रदान करते।

प्रश्न 5.कविता के प्रमुख घटक कौन से हैं?

उत्तर- कविता के प्रमुख रूप से छः घटक हैं -

(i) भाषा-भाषा कविता का महत्त्वपूर्ण घटक है क्योंकि भाषा के माध्यम से ही कवि अपनी संवेदनाओं और भावनाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करता है।

(i) शैली-शैली भी कविता का प्रमुख घटक है। इसके द्वारा कवि अपनी संवेदनाओं को कविता के रूप में अभिव्यक्त करता है।

(ii) बिंब-बिंब का शाब्दिक अर्थ है-शब्दचित्र। इन शब्द चित्रों के माध्यम से ही कवि अपनी कल्पना को साकार रूप प्रदान करता है। बिंब के बिना कविता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह कविता का मूल आधार है।

(iv) छंद-यह कविता का अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटक है क्योंकि छंद ही कविता को कविता का रूप प्रदान करते हैं। इनके द्वारा ही कविता पद्य की श्रेणी में आते हैं।

(v) अलंकार-अलंकार भी कविता के प्रमुख घटक हैं। ये कविता को सौंदर्य प्रदान करते हैं। इनके द्वारा ही कवि अपनी कविता को सजाता है।

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