दिशा के लिए विशेष पत्र
प्रिय बेटू दिशा!
सदा प्रसन्न रहो!
मेरा पत्र ध्यान से पढ़ना और समझना।वैसे ये पत्र आप सब बच्चों के लिए है
परन्तु बाक़ी सभी अभी छोटे हैं और तुम घर में सबसे बड़ी हो तो समझदार हो तो तुम्हें मेरी बातें समझ में आएंगी।
अब तुम नवीं कक्षा में आ चुकी हो नया विद्यालय है नया महौल, नयी किताबें,और नयी सहेलियां होंगी। पढ़ाई और व्यस्तता के बीच हमेशा बैलेंस बनाकर चलना किसी भी प्रकार का भय तनाव या दिखावे को अपने ऊपर हावी न होने देना।जिस उम्र में तुम हो अक्सर इस अवस्था में हमारे मन मस्तिष्क सोच और व्यवहार में बहुत से परिवर्तन आते हैं बहुत से भ्रम और शंकाएं और प्रश्न होते हैं जिनका जबाब अक्सर हम अपने साथियों से पूछते हैं पर क्यों कि वो भी आप की ही अवस्था के होते हैं तो वो भी कन्फ्यूजन की स्थिति में होते हैं। ऐसी स्थिति में हमें केवल हमारे बड़े ही सटीक उत्तर दे पाते हैं। अतः अपनी कोई भी बात जिज्ञासा बेझिझक मुझसे (अपनी बुआ से,)अपनी मां से अपने परिवार से पूछना चाहिए।याद रखना संसार में दो ही सबसे सच्चे मित्र होते हैं एक है अपनी मां और दूसरे हैं हमारे ज्ञान ग्रंथ, पुस्तकें। विद्यालय में लाइब्रेरी तो होगी ही ज्ञान विज्ञान की उत्तम पुस्तकों से दोस्ती अवश्य करो।हो सकता है एनसीसी के कारण तुम बहुत थकी महसूस करती हों उसके लिए उत्तम आहार लो ,खूब सब्जियां खाओ , अंकुरित चने,दूध ,समय से नींद लो।तुम्हारा कैंप भी लगेगा, तरह तरह के बच्चे मिलेंगे ध्यान रहे किसी का अवगुण हमें प्रभावित न करें।
भारद्वाज परिवार से हमें जो मजबूत संस्कार मिले हैं उन्हें हमेशा ध्यान में रखना। सही और ग़लत के बीच का अंतर हमें आना चाहिए। हमेशा ध्यान रहे वहीं कार्य और व्यवहार करना जिससे हमारे परिवार को तुम पर गर्व महसूस हो।हो सकता है तुम्हारे साथी फेसबुक ,इंस्टा,स्नैप चैट आदि की बात करते हों कुछ शेयर करने असैप्ट करने की बात, कुछ गेम सिखाने की बातें बताते हों तो अभी बस मेरी यह बात याद रखना कि इन बातों में अधिक इंट्रेस्ट नहीं लेना बहुत बातें नहीं करना इनसे अभी दूर ही रहना है ।ये हमें हमारे लक्ष्य से भटकाते हैं,अपने पापा को भी शोशल मीडिया पर अपनी फ़ोटो नहीं डालने को आग्रह करना।बेटा पिछले 20 वर्षों के शिक्षण में मैंने पाया है कि इन सबसे दूरी बनाकर चलने वाले ही लक्ष्यभेदी अर्जुन होते हैं। ये समझो कि गंगा के मार्ग में बहने वाला गंगा जल ही पूजनीय होता है जो कभी सड़ता नहीं।उससे निकलने वाली नहर का थोड़ी दूर का जल पानी होता है और सड़ जाता है । अर्थात शुद्ध विचारों की गंगा को सीधे रास्ते पर बहने दे , उसमें सड़न न पड़ने दें।
कभी किसी लालच,दिखावे, प्रदर्शन की भावना में मत आ जाना ।सादा जीवन उच्च विचार का जीवन जीने वाले रामचरितमानस के नीति आचरण की हमारे परिवार की संस्कारों की गंगा हमेशा हर हर करती रहे ऐसे कार्य कर लेना। पुरुषार्थ के साथ संतोष के भाव का बाबा का मूल मंत्र-" कि चाहे चटनी से खाना पड़े पर कभी न कहीं उधार करना, न हाथ फैलाना जीवन का स्वाभिमान मंत्र याद रखना। बहुत अच्छे अंक लाना अच्छी बात है पर उससे भी अच्छी बात है अच्छा और सच्चा इंसान होना।किताबी पढ़ाई के बजाय जीवन की पढ़ाई में सफल होना।बाहरी रंग रुप ईश्वरीय प्रदत्त है , हृदय के भावों का सुंदर होना परम आवश्यक है।
अपनी बुद्धिमत्ता उपलब्धि पर कभी भी इतराना नहीं घमंड नहीं करना बल्कि ईश्वर को धन्यवाद करना कि तुम्हें ईश्वर ने उस परिवार में जन्म दिया जहां सभी सदाचारी बुद्धिमान मनीषी आत्माएं हैं जहां से तुम्हें सद्गुण मिल सके। बाबा के संगीत के साथ जुड़े रहना ये सरस्वती का वरदान है जो आत्मा का परिमार्जन करता है दिमाग की खिड़कियां खोलता है।
बातें तो बहुत हैं जो तुम से करनी थीं । जब राखी लेकर आई थी तभी करना चाहती थी पर सुंदरकाण्ड के आनंद में समय निकल गया और फिर भागम भाग।अब किसी दिन सन्डे में मां पापा के साथ आगरा आओ बहुत सी बातें करेंगे।फोन पर तो तोषू ही नहीं करने देता।और हां तोषू मोहक छवि तृषा को किताबों से दोस्ती कराओ ऐसा कुछ करो कि वे फोन पर अधिक ध्यान न दें।ड्रोइंग ,कराओ कुछ खेला भी करो उनके साथ उनकी प्यारी आदर्श दीदी बनो ,उनकी प्रेरणा बनों!
दादू को मेरा प्रणाम कहना।
पापा ,चाचू,मां ,मौसीऔर सब बच्चों को प्यार शुभाशीष।
खूब पढ़ो आगे बढ़ो। सब को खूब खूब प्यार आशीर्वाद!
तुम्हारी बुआ
सरला भारद्वाज
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