झलकी लोक नृत्य जिकरी रसिया रास झलकी जन्मोत्सव
सभी दर्शकों को अथर्व पाठक की ओर से जय श्री राधे !जय श्री कृष्ण !
हम सभी छात्र आज उपस्थित हैं बृज की लोक विधा - "जिकरी रसिया रास लोक नृत्य "की एक झलकी जन्मोत्सव लेकर !
महोदय! प्रस्तुति की अनुमति चाहते हैं -
जुलम करि डारौ जी जा कारी कामरि बारे नै 2.2.
सोय गये सब पहरे बारे 2.2.2.
,और आप ही.3 खुल गये तारे जी।2
जुलम करि डारौ जी ,जा काली कामर बारे नै, - 2-2
मथुरा में जानै जन्म लियो है 2.2.2.,गोकुल में 3.बजे नगाड़े जी ।2.
जा कारी ------
काकी - अरी रामकली इतनौ काहे कूं झूमि रही है?
रामकली -अरे काकी तुम्हें नाय पतौ ?जसोदा के लल्ला भयो है! सब बधाई देने जाय रहे हैं ,वो देखो आनंद कौ हो हल्ला!
-सखी चलौ नंद के द्वार लाला के दर्शन करि आवैं।
काकी- हां बु तौ सही है मैंऊ मयीं जाइ रही हूं,परि मैंने सुनी है कि लल्ला थोड़ो कारौ है।?
का कही? कारौ?
कारौ कारौ मति करै गुजरिया,
चौं कारें कौ जिकर करै, कारें रंग पै मोरनी रुदन (नाच) करै।2
मौटे मौटे नैन लला के ,2
उनमें कजरा गजब करै।
कारै--
छोटे छोटे हाथ लला.के2
उनमें मुरली गजब करै।2
कारे--
काले घुंघराले केश लला के , 2
मोर मुकुट माथे जुलम करै।
कारें --
जायौ जशोदा नै लल्ला मुहल्ला में हल्का सौ मणि गयो।
बाबा लुटावै हलुआ और पूड़ी,मैया लुटावे रसगुल्ला।
मुहल्ला में हल्ला सो मच गयो।
Best
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