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हिंदी कक्षा परीक्षण काव्य खंड

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1. पठित काव्यांशों को पढ़कर सटीक उत्तर लिखिए  । सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। काव्यांश के प्रत्येक प्रश्न तीन अंक के हैं। तीनों काव्यांश के प्रश्न हल करें। (क)बार-बार गर्जन वर्षण है मूसलधार, हृदय थाम लेता संसार, सुन-सुन घोर वज्र-हुंकार। अशनि-पात से शायित उन्नत शत-शत वीर, क्षत-विक्षत हत अचल-शरीर, गगन-स्पर्शी स्पर्धा-धीर। हँसते हैं छोटे पौधे लघुभार— शस्य अपार, हिल-हिल, खिल-खिल हाथ हिलाते, तुझे बुलाते, विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते। (15अंक) 1 .कवि और कविता का परिचय देते हुए कविता के मूल भाव पर प्रकाश डालिए। 2.उक्त पद्यांश के आधार पर कवि हृदय की विशेषता बताएं। 3.सिद्ध कीजिए कि बादल क्रांति के प्रतीक हैं। 4.कविता में छोटे पौधे किसके प्रतीक हैं और क्यों? 5.गगन स्पर्शी स्पर्धा किसे कहा गया है?इसका निहितार्थ लिखिए। ( ख).मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ! मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ, मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ, जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते, मैं अपने मन का गान किया करता हूँ! 1 .कवि और कविता का परिचय देते हुए कवि की व्यथा का कारण बताईए। 2..कवि ने स्नेह सुरा किसे कहा है ?व...

पहले अपने घर की सफाई आवश्यक

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  इस नवरात्रि में भारतवर्ष में स्वयंसेवकों  का डंका बज रहा है। क्योंकि आने वाली विजया दशमी को संघ का सौ वां स्थापना दिवस है। देश निर्माण और उत्थान हेतु आयोजन हो रहे हैं और लिए जा रहे हैं विविध संकल्प। पर विचारणीय यह है कि राष्ट्र की  सबसे पहली  इकाई है व्यक्ति ,जिनसे परिवार और परिवारों से राष्ट्र का निर्माण होता है। राष्ट्र निर्माण की एक कड़ी है -"सप्त शक्ति संगम,,"।गीता के दशवें अध्याय का 34 वां श्लोक इसकी सूक्ति है।जो इस प्रकार है- " कीर्ति श्रीवाक च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृति क्षमा।" भगवान श्री कृष्ण ने नारियों की सात शक्ति बताईं है- 1.- कीर्ति (यश, गरिमा,महिमा) 2.श्री  (लक्ष्मी-परिवार में सदाचार युक्त पुरुषार्थ से धनोपार्जन और संचयन) 3. वाक-(परिवार जोड़ने के लिए  स्नेह युक्त ,संयमित ,उचित, विनम्रता पूर्ण वाक्चातुर्य पूर्ण भाषा का प्रयोग।) 4.स्मृति-(छोटी से छोटी बात संस्कार रीति नीति परम्परा को याद रख संस्कृति को संवहन और परिमार्जन की शक्ति) 5-मेधा-(धारणा शक्ति,समझ, तर्कनिष्ठता, संश्लेषण विश्लेषण परिणाम बोध) 6.धृति-(धैर्य ,सहनशीलता, दृढ़ता) 7.क्षमा(स्वयं ...

अर्ध वार्षिक। मुख्य विंदु

 मुख्य विंदु -रेडियो रूपक ,नाटक,कहानी, रूपांतरण,विशेष लेखन,आलेख,फीचर, पत्र, गद्य -प्रथम पाठ से कैमरे में बंद अपाहिज,काले मेघा पानी पहलवान की ढोलक जूझ।   रेडियो रूपक  रेडियो की एक सर्जनात्मक विधा है जिसमें किसी विषय को रोचक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए आवाज़ों, संगीत, ध्वनि प्रभावों, संवादों और वास्तविक रिकॉर्डिंग का एक 'कोलाज' या समुच्चय तैयार किया जाता है .  यह तथ्यों पर आधारित होता है, लेकिन इसमें कल्पना और रचनात्मकता की पूरी गुंजाइश होती है, ताकि श्रोताओं के लिए प्रस्तुति नीरस न लगे.   रेडियो रूपक की मुख्य विशेषताएँ तथ्यों पर आधारित:   रूपक का मूल आधार वास्तविक तथ्य या घटनाएँ होती हैं.   सर्जनात्मक प्रस्तुति:   तथ्यों को आकर्षक और रोचक बनाने के लिए रचनात्मक तकनीकों का उपयोग किया जाता है.   ध्वनि-आधारित:   इसमें आवाज़ों, संगीत, और ध्वनि प्रभावों का कलात्मक प्रयोग किया जाता है.   विषयों की विविधता:   सामाजिक समस्याओं, ऐतिहासिक घटनाओं, या किसी भी विषय को गहराई से प्रस्तुत किया जा सकता है.   प्रभावी संचार:   ...

दंतुरित मुस्कान

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मंगल भवन अमंगल हारी

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लेखन एवं संयोजन निर्देशन सरला भारद्वाज  नाटक मंगल भवन अमंगल हारी  प्रथम दृश्य   - (मंच पर माधव का प्रवेश ) माधव- भैया ओ भैया अविरल--हां माधव बोलो!  माधव -आज क्लास में सर ने एक चैप्टर पढाया और बताया की अंग्रेजों ने भारत को जातियों मे बांट कर आपस में लड़ाया। क्या यह बात सच है भैया? अविरल -हां बेटा बिल्कुल सच है,  भारत में यह जातियां पहले नहीं  थी,  केवल कर्म था। जातियां तो बस दो ही थीं।वह थीं सभ्यता के आधार पर,! माधव- कौन कौन सी जातियां? अविरल -बस दो ही जातियां  थीं यह थी  मानव  जाति और दानव जाति ।  माधव -मतलब?  अविरल -जो सनातन सभ्यता के मार्ग पर चलते थे, वे थे मानव!  और जो सभ्यता संस्कृति को कुचलकर दूसरों को सताने में लगे रहते थे ,वह थे दानव! माधव-फिर वह दानव कहां गये? सब खत्म हो गये? अविरल - नहीं माधव यह दानव हर युग में पाए जाते हैं। इनका अंत करने  के लिए कभी राम को आना पड़ता है तो कभी कृष्ण को और कभी किसी अन्य महापुरुष को। महापुरुष से याद आया, मैंने सुना  है तुम्हारे विद्यालय के छात्र जनक पुरी के लिए कुछ तै...