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"अतीत के दावे पांव" 12 हिंदी वितान

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प्रस्तुति सरला भारद्वाज  पाठ परिचय - अतीत में दबे पाँव" पाठ में, मुख्य पात्र लेखक ओम थानवी हैं, जो सिंधु घाटी सभ्यता के शहरों, मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की यात्रा करते हैं। यात्रा के दौरान, वे पुरातात्विक स्थलों का निरीक्षण करते हैं और उन शहरों के निवासियों के जीवन की कल्पना करते हैं। पाठ में, लेखक मोहनजोदड़ो के खंडहरों में घूमते हुए, वहां के जीवन, संस्कृति और वास्तुकला को समझने की कोशिश करते हैं।  मुख पात्र ओम थानवी: लेखक और पाठ के कथावाचक। वे मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की यात्रा करते हैं और सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में अपनी समझ और कल्पना को व्यक्त करते हैं। मोहनजोदड़ो के निवासी: (अप्रत्यक्ष रूप से) लेखक उनकी जीवनशैली, वास्तुकला, और कलात्मकता की कल्पना करते हैं।  हड़प्पा के निवासी: (अप्रत्यक्ष रूप से) लेखक उनके बारे में भी सोचते हैं, हालांकि पाठ मुख्य रूप से मोहनजोदड़ो पर केंद्रित है।  मोहम्मद नवाज़: (पाठ में उल्लेखित) संग्रहालय में तैनात व्यक्ति जो पुरातात्विक स्थलों और सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में जानकारी प्रदान करता है। इस पाठ का मुख्य प्रतिपाद्य निम्नलिखित है: सिंधु घा...

बालगोविंद भगत

 बालगोबिन भगत क्षितिज भाग-2 हिंदी   रामवृक्ष बेनीपुरी पृष्ठ संख्या: 74 प्रश्न अभ्यास  1. खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे? उत्तर बालगोबिन भगत एक गृहस्थ थे परन्तु उनमें साधु कहलाने वाले गुण भी थे - 1. कबीर के आर्दशों पर चलते थे, उन्हीं के गीत गाते थे। 2. कभी झूठ नहीं बोलते थे, खरा व्यवहार रखते थे। 3. किसी से भी दो-टूक बात करने में संकोच नहीं करते, न किसी से झगड़ा करते थे। 4. किसी की चीज़ नहीं छूते थे न ही बिना पूछे व्यवहार में लाते थे। 5. कुछ खेत में पैदा होता, सिर पर लादकर पहले उसे कबीरपंथी मठ में ले जाते, वहाँ से जो कुछ भी भेंट स्वरुप मिलता था उसे प्रसाद स्वरुप घर ले जाते थे। 6. उनमें लालच बिल्कुल भी नहीं था। 2. भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी? उत्तर भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले छोड़कर नहीं जाना चाहती थी क्योंकि भगत के बुढ़ापे का वह एकमात्र सहारा थी। उसके चले जाने के बाद भगत की देखभाल करने वाला और कोई नहीं था। 3. भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त कीं? उत्तर बेटे की...

सबसे ख़तरनाक बंदर

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सबसे ख़तरनाक बंदर   जो बुद्धिमान हैं समझदार हैं साहसी हैं वहीं प्रतिक्रिया करेंगे और जिनमें यह तुक्ष मानसिकता का बंदर बैठा है वह इग्नोर करके आगे बढ़ जाएगा। होंगे गांधी जी के लिए ये तीनों बंदर आदर्श!जो चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के साथ होते होते जापान के रास्ते से गांधी के साथ भारत में आ गये। दार्शनिक का नाम तो देखें,जिससे कन्फ्यूजन की फीलिंग आती है। वास्तव में ये बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत कहो के प्रतीक नहीं बल्कि आज के समाज में ये प्रतीक हैं- बुरा देख कर सुनकर आंखे और दिमाग बंद कर लो ,विचार मत करो ,प्रतिकार मत करो।जो हो रहा है वह होने दो मौन रहो ,समस्या के समाधान के समय पर मौन होकर पीठ दिखाकर भाग जाओ।पता है मित्रों !इन तीनों में सबसे ख़तरनाक बंदर कौन सा है? जो मुंह पर हाथ रखे हैं।इसके मुंह में पहले से ही दाख चना और मेवा ठुंसी हुईं हैं ,जिन्हें वह छुपाने की कोशिश में अत्यधिक विनम्रशीलता का स्वांग कर रहा है।ये बंदर बहुत बड़ा खतरा होता है किसी भी व्यक्ति देश और समाज के लिए। क्यों कि अत्यधिक विनम्रता दो संकेत करती है -लोलुपता युक्त चाटुकारिता या फिर कायरता। दोनों ही स्थिति ...

जन संचार माध्यम और विधाएं

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जनसंचार के प्रमुख माध्यम-और विधाएं - अवलोकन एक दृष्टि में - जीवन में उपयोग - जन संचार के प्रमुख सोपान - संदेश: संचार का मुख्य तत्व, जो प्रेषक द्वारा प्राप्तकर्ता को भेजा जाता है। प्रेषक: वह व्यक्ति या समूह जो संदेश भेजता है। प्राप्तकर्ता: वह व्यक्ति या समूह जो संदेश प्राप्त करता है। माध्यम: वह साधन जिसके द्वारा संदेश प्रेषित किया जाता है। सन्दर्भ: वह परिस्थिति जिसमें संचार होता है। प्रतिक्रिया: प्राप्तकर्ता द्वारा प्रेषक को दी गई प्रतिक्रिया। शोर: संचार प्रक्रिया में बाधा डालने वाली कोई भी चीज।   संचार माध्यमों के प्रकार: मुद्रित माध्यम:   समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें, आदि। श्रव्य माध्यम:   रेडियो, टेप रिकॉर्डर, आदि। दृश्य-श्रव्य माध्यम:   टेलीविजन, फिल्म, इंटरनेट, आदि। अन्य माध्यम:   फ़ोन, मोबाइल फोन, ईमेल, आदि। आइए विस्तार से समझें -   जन संचार के प्रमुख माध्यम- प्रिंट, मुद्रित,श्रव्य ,दृश्य  1. प्रिंट ( मुद्रित ) माध्यम प्रिंट यानी मुद्रित माध्यम जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना है। असल में आधुनिक युग की शुरुआत ही मुद्रण यानी छपाई के आ...