कैमरे मरे में बंद अपाहिज 12ncert
कैमरे में बंद अपाहिज" रघुवीर सहाय द्वारा लिखी गई एक कविता है, जो दूरदर्शन पर एक अपाहिज व्यक्ति के साक्षात्कार के दौरान संवेदनहीनता और व्यवसायिकता पर कटाक्ष करती है. कविता में, एक पत्रकार एक अपाहिज व्यक्ति का साक्षात्कार लेता है, उससे बेतुके सवाल पूछता है और उसे रुलाने की कोशिश करता है, ताकि दर्शकों को उसकी पीड़ा दिखाई जा सके और कार्यक्रम को TRP मिल सके. कविता का सारांश: कविता में, एक पत्रकार एक अपाहिज व्यक्ति को कैमरे के सामने लाता है और उससे ऐसे सवाल पूछता है जो उसकी पीड़ा को उजागर करते हैं. पत्रकार यह दिखाने की कोशिश करता है कि वह कितना संवेदनशील है, लेकिन वास्तव में, वह अपाहिज व्यक्ति के दुख का फायदा उठा रहा है. पत्रकार दर्शकों से कहता है कि वे धीरज रखें और देखें कि कैसे वह और अपाहिज व्यक्ति एक साथ रोते हैं, जिससे कार्यक्रम को और अधिक भावनात्मक बनाया जा सके. कवि ने इस कविता के माध्यम से मीडिया की संवेदनहीनता और व्यवसायिकता पर प्रकाश डाला है. मुख्य बातें: कटाक्ष: कविता दूरदर्शन और मीडिया की संवेदनहीनता पर कटाक्ष करती है. व्यवसायिकता: कार्यक्रम को सफल बनाने के ...