"अतीत के दावे पांव" 12 हिंदी वितान

प्रस्तुति सरला भारद्वाज 



पाठ परिचय -अतीत में दबे पाँव" पाठ में, मुख्य पात्र लेखक ओम थानवी हैं, जो सिंधु घाटी सभ्यता के शहरों, मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की यात्रा करते हैं। यात्रा के दौरान, वे पुरातात्विक स्थलों का निरीक्षण करते हैं और उन शहरों के निवासियों के जीवन की कल्पना करते हैं। पाठ में, लेखक मोहनजोदड़ो के खंडहरों में घूमते हुए, वहां के जीवन, संस्कृति और वास्तुकला को समझने की कोशिश करते हैं। 

मुख पात्र

ओम थानवी:

लेखक और पाठ के कथावाचक। वे मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की यात्रा करते हैं और सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में अपनी समझ और कल्पना को व्यक्त करते हैं।

मोहनजोदड़ो के निवासी:

(अप्रत्यक्ष रूप से) लेखक उनकी जीवनशैली, वास्तुकला, और कलात्मकता की कल्पना करते हैं। 

हड़प्पा के निवासी:

(अप्रत्यक्ष रूप से) लेखक उनके बारे में भी सोचते हैं, हालांकि पाठ मुख्य रूप से मोहनजोदड़ो पर केंद्रित है। 

मोहम्मद नवाज़:

(पाठ में उल्लेखित) संग्रहालय में तैनात व्यक्ति जो पुरातात्विक स्थलों और सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में जानकारी प्रदान करता है।


इस पाठ का मुख्य प्रतिपाद्य निम्नलिखित है:

सिंधु घाटी सभ्यता का पुनर्जीवन:

लेखक मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की यात्रा के माध्यम से सिंधु घाटी सभ्यता के जीवन को फिर से जीवंत करने की कोशिश करते हैं। 

शहरों की योजनाबद्धता:

इन शहरों की सड़कों, घरों और अन्य संरचनाओं को देखकर, लेखक सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों की नगर नियोजन और वास्तुकला में कुशलता को उजागर करते हैं। 

संस्कृति और जीवन शैली:

लेखक मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में पाई गई कलाकृतियों, जैसे मूर्तियाँ, बर्तन, और आभूषणों के माध्यम से उस समय के लोगों की संस्कृति और जीवन शैली पर प्रकाश डालते हैं। 

अतीत का संरक्षण:

लेखक इस बात पर भी जोर देते हैं कि इन पुरातात्विक स्थलों को संरक्षित करना कितना महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य की पीढ़ियां भी इस महान सभ्यता के बारे में जान सकें। 

यात्रा वृत्तांत:

यह पाठ एक यात्रा वृत्तांत होने के नाते, लेखक की व्यक्तिगत भावनाओं और अनुभवों को भी दर्शाता है, जो उन्होंने इन स्थलों की यात्रा के दौरान महसूस किए। 

संक्षेप में, "अतीत में दबे पाँव" सिंधु घाटी सभ्यता के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और वास्तुकला को उजागर करने वाला एक महत्वपूर्ण पाठ है, जिसे लेखक ने अपनी यात्रा के माध्यम से पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है।

अतीत में दबे पाँव" ओम थानवी द्वारा लिखा गया एक यात्रा वृत्तांत है, जो सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो स्थल की यात्रा पर आधारित है। यह पाठ मोहनजोदड़ो के खंडहरों के माध्यम से सिंधु घाटी सभ्यता के जीवन, वास्तुकला, और संस्कृति को दर्शाता है। लेखक ने मोहनजोदड़ो की यात्रा के दौरान, वहाँ के खंडहरों, सड़कों, घरों, और अन्य अवशेषों का वर्णन किया है, जो सिंधु घाटी सभ्यता के उन्नत जीवन स्तर को दर्शाते हैं। 

मुख्य बातें:

सिंधु घाटी सभ्यता:

पाठ मोहनजोदड़ो के माध्यम से सिंधु घाटी सभ्यता की एक झलक पेश करता है, जो दुनिया की सबसे पुरानी नियोजित शहरों में से एक है। 

मोहनजोदड़ो का भ्रमण:

लेखक ने मोहनजोदड़ो के खंडहरों का दौरा किया, जहाँ उन्होंने सड़कों, घरों, नालियों, और अन्य अवशेषों को देखा। 

उन्नत जीवन:

मोहनजोदड़ो के अवशेष सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों के उन्नत जीवन स्तर, वास्तुकला, और शहरी नियोजन कौशल को दर्शाते हैं। 

खंडहरों का वर्णन:

लेखक ने मोहनजोदड़ो के खंडहरों का विस्तृत वर्णन किया है, जिससे पाठक उस सभ्यता के जीवन की कल्पना कर सकते हैं। 

यात्रा वृत्तांत:

यह पाठ एक यात्रा वृत्तांत है, जो लेखक के मोहनजोदड़ो के अनुभवों और भावनाओं को व्यक्त करता है।

विस्तार से:

ओम थानवी की यह रचना, 'अतीत में दबे पाँव', मोहनजोदड़ो की यात्रा का एक रोचक वर्णन है। मोहनजोदड़ो, सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख शहर, अपने समय में एक नियोजित और समृद्ध शहर था। लेखक ने इस पाठ में मोहनजोदड़ो के खंडहरों का वर्णन किया है, जो आज भी उस सभ्यता की कहानी कहते हैं। लेखक ने मोहनजोदड़ो की सड़कों, घरों, और नालियों का वर्णन किया है, जो सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों के उन्नत जीवन स्तर को दर्शाते हैं। 

लेखक ने मोहनजोदड़ो के खंडहरों में घूमते हुए, उस सभ्यता के जीवन की कल्पना की है। उदाहरण के लिए, लेखक ने घरों की दीवारों, प्रवेश द्वारों, और रसोई की खिड़कियों का वर्णन किया है, जिससे पाठक उस समय के जीवन की कल्पना कर सकते हैं। लेखक ने यह भी बताया है कि कैसे मोहनजोदड़ो की सड़कें और गलियां आज भी व्यवस्थित हैं, और कैसे घरों के दरवाजे अंदर गली की ओर खुलते हैं। 

यह पाठ न केवल मोहनजोदड़ो के खंडहरों का वर्णन करता है, बल्कि यह सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों के जीवन, संस्कृति, और सोच-विचार को भी उजागर करता है। यह पाठ हमें अपनी प्राचीन सभ्यता की महानता और समझदारी से परिचित कराता



प्रश्नोत्तर अभ्यास 

1. मोहनजोदड़ो को 'अतीत दबे पांव,' क्यों कहा गया है?

उत्तर -यह पाठ सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो शहर के अवशेषों पर आधारित है। लेखक ने इस शहर को "अतीत में दबे पाँव" इसलिए कहा है क्योंकि लेखक ने मोहनजोदड़ो के खंडहरों और अवशेषों को देखकर उस सभ्यता के जीवन, संस्कृति और वास्तुकला को महसूस किया है। ऐसा लगता है मानो वह खुद उस दौर में पहुँच गए हों. 

2. मोहनजोदड़ो की खुदाई में निकले अवशेषों से आज के शहरों की तुलना किस प्रकार की जा सकती है?

उत्तर -मोहनजोदड़ो की खुदाई में निकले अवशेषों से पता चलता है कि उस समय का शहर बहुत नियोजित और सुव्यवस्थित था। सड़कों, घरों, और जल निकास प्रणाली को देखकर लगता है कि वहां के लोग बहुत ही अनुशासित थे. आज के शहरों की तुलना में मोहनजोदड़ो की जल निकास प्रणाली, घरों की बनावट, और सड़कों की व्यवस्था अधिक उन्नत थी। हालांकि, आज के शहरों में आधुनिक सुविधाएं और तकनीक का उपयोग अधिक है. 

3. सिंधु घाटी सभ्यता को 'अतीत में दबे पाँव' क्यों कहा गया है?

उत्तर -सिंधु घाटी सभ्यता को 'अतीत में दबे पाँव' इसलिए कहा गया है क्योंकि यह सभ्यता इतिहास के पन्नों में दबी हुई थी। इस सभ्यता के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी, और इसके अवशेषों को देखकर ही इसके बारे में जाना जा सकता है। लेखक ने इस सभ्यता को "अतीत में दबे पाँव" कहा है, क्योंकि यह सभ्यता एक दबे हुए खजाने की तरह है, जिसे खोजा जाना बाकी है. 

4. मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिले अवशेषों से हमें उस समय के लोगों के बारे में क्या जानकारी मिलती है?

उत्तर -मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिले अवशेषों से हमें उस समय के लोगों के जीवन, संस्कृति, और वास्तुकला के बारे में जानकारी मिलती है। जैसे, उनके घर, सड़कें, जल निकास प्रणाली, और बर्तन आदि से पता चलता है कि वे कितने विकसित थे. इसके अलावा, वहां मिले आभूषण, मूर्तियां, और अन्य कलाकृतियां भी उस समय के लोगों की कलात्मकता और सामाजिक जीवन को दर्शाती हैं. 

5. 'अतीत में दबे पाँव' पाठ में लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता को "अतिथि" क्यों कहा है?

उत्तर -लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता को "अतिथि" इसलिए कहा है क्योंकि वह इस सभ्यता के अवशेषों को देखकर खुद को उस समय में मेहमान की तरह महसूस करते हैं। वह उस सभ्यता के जीवन, संस्कृति, और वास्तुकला को देखकर आश्चर्यचकित होते हैं और उसे समझने की कोशिश करते हैं। जैसे कोई मेहमान किसी नए घर में आता है, वैसे ही लेखक मोहनजोदड़ो में आकर उस सभ्यता को समझने की कोशिश करते हैं.

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