जूझ वितान 12हिंदी cbse

 


मुख्य पात्र: परिचय 

आनंद:(लेखक आनंद यादव)

कहानी का नायक, जो शिक्षा प्राप्त करने के लिए संघर्ष करता है। 

आनंद के पिता:

जो शिक्षा के महत्व को नहीं समझते हैं और आनंद को खेती के काम में लगाते हैं। 

आनंद की मां:

जो आनंद का समर्थन करती है और उसे दत्ताजी राव से मिलने के लिए प्रेरित करती है। 

दत्ताजी राव सरकार:(गांव का मुखिया)

जो शिक्षा के महत्व को समझते हैं और आनंद की मदद करते हैं। 

मास्टर सौंदलगेकर:(मराठी शिक्षक)

एक शिक्षक जो आनंद को प्रेरित करते हैं और कविता के प्रति रुचि जगाते हैं 

जूझ" (Jujh) कक्षा 12वीं की हिंदी (वितान) की एक पाठ्यपुस्तक का नाम है, जो आनंद यादव द्वारा लिखित एक आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश है। यह कहानी शिक्षा प्राप्त करने के लिए एक किशोर के संघर्ष और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। 

कहानी का सारांश:

इस कहानी में, लेखक आनंद यादव अपने बचपन के दिनों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जूझते हैं। उनके पिता उन्हें चौथी कक्षा के बाद स्कूल जाने से रोककर खेती के काम में लगा देते हैं। आनंद, जो पढ़ लिखकर नौकरी करना चाहता है, अपने पिता से यह बात कहने से डरता है। वह अपनी मां से मदद मांगता है, और मां उसे दत्ताजी राव सरकार से बात करने के लिए कहती है। दत्ताजी राव, जो शिक्षा के महत्व को समझते हैं, आनंद के पिता को समझाते हैं और उसे वापस स्कूल जाने के लिए कहते हैं। 
कहानी का मुख्य विषय:
कहानी का मुख्य विषय शिक्षा के प्रति संघर्ष और दृढ़ संकल्प है। लेखक यह दर्शाता है कि कैसे एक किशोर विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए जूझता है और अंततः अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। यह कहानी शिक्षा के महत्व और व्यक्ति के जीवन में इसके परिवर्तनकारी शक्ति को भी उजागर करती है।
मुख्य बातें:
"जूझ" एक आत्मकथात्मक उपन्यास का अंश है। 
कहानी शिक्षा के महत्व और संघर्ष के बारे में है। 
यह कहानी ग्रामीण जीवन और सामाजिक परिस्थितियों को भी दर्शाती है। 
कहानी में लेखक ने अपने बचपन के अनुभवों को जीवंत किया है। 

जूझ" कहानी के प्रश्न-उत्तर:
1. जूझ' कहानी का शीर्षक' शीर्षक का औचित्य सिद्ध कीजिए।
उत्तर-'जूझ' शब्द का अर्थ है संघर्ष। यह कहानी आनंद के अपने पिता, सामाजिक दबाव और गरीबी के खिलाफ संघर्ष को दर्शाती है। यह शीर्षक कहानी के मुख्य विषय को दर्शाता है। 
2. आनंद के पिता उसे पढ़ने क्यों नहीं भेजना चाहते थे?
उत्तर -आनंद के पिता का मानना था कि खेती ही एकमात्र आजीविका का साधन है और पढ़ाई से कुछ हासिल नहीं होगा। 
आनंद के पिता स्वयं एक किसान थे और वह अपने बालक को खेती-बाड़ी का एक कार्य सिखाना चाहते थे ।इसके अलावा उनके पिताजी शिक्षा के महत्व को नहीं जानते थे और की घर की व्यवस्था में विशेष रुचि नहीं लेते थे।
 
3. आनंद ने दत्ताजी राव से झूठ क्यों बोला?
उत्तर -आनंद ने दत्ताजी राव से झूठ बोला क्योंकि वह अपने पिता को स्कूल भेजने के लिए मनाने में असमर्थ था।
दत्ता जी की सहायता लेकर लेखक हर स्थिति में पढ़ना चाहता था। दत्ता जी के द्वारा अपने पिता पर दबाव बनाना चाहता था, इसलिए वह झूठ बोल रहा था।
आनंद के पिता का मानना था पढ़ना लिखना बेकार है ।उनके  जीवन का आधार खेती करना ही है । वे को बेटे पढ़ाना नहीं चाहते थे, बल्कि चौथी पास कराके ही वह तो खेतों मैं काम करवाते थे  वे स्वयं रकमा बाई के यहां जाते इधर उधर बेवजह घूमने रहते थे।आनंद उन्हें मना नहीं पा रहा था ।यह बात वह सीधे सरपंच से कही । सरपंच को अपने पक्ष में  लेने के लिए  उसने सरपंच से झूठ बोला। 
4. सौंदलगेकर मास्टर ने आनंद के जीवन को कैसे बदला?
उत्तर -सौंदलगेकर मास्टर ने आनंद को कविता और साहित्य में रुचि लेने के लिए प्रेरित किया, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। मास्टर साहब भाषा और कविता के मर्मज्ञ थे ।वह पढ़ाते समय बच्चों को प्रेरणा देते हुए अभिनय करके गाकर पढ़ाते थे ।आनंद को ऐसा आनंद आता था कि पढे हुए पाठों को याद कर करके ढोर चराते समय खेतों में जा जाकर आनंद के साथ गाता था । इसी आनंद और रस ने उसके जीवन की दशा को बदल दिया और उसे एक सफल साहित्यकार के रूप में तैयार किया।
5. 'जूझ' कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर-'जूझ' कहानी से हमें शिक्षा के महत्व, संघर्ष के फल और सकारात्मक सोच के बारे में सीख मिलती है।
शिक्षा ही वह कुंजी है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करके उसके भविष्य के दरवाजे खोल है


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