दंतुरित मुस्कान
यह दंतुरित मुस्कान
तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान
मृतक में भी डाल देगी जान!
धूल-धूसरित तुम्हारे गात,
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात!
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण पिघلकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण!
छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल
बाँस था कि बबूल?
तुम मुझे पाए नहीं पहचान,
देखते ही रहोगे अनिमेश!
थक गए हो आँखें फेरते जो उत्पाद?
बच गए हो यदि मेरा कीड़ा-व्यापार
तो तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान!
धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!
پर्ची हुई तुमसे कहीं की पुतली
मधुपर्क पाकर तुम्हारा ही अमर
तुमसे हो गए हम दोनों के बीच का यह परिचय
अतिथि तुम प्रिय!
तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान,
छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल
बाँस था कि बबूल?
धन्य तुम, और संपर्क की उँगलियाँ
माँ की मधुपर्क-पूतली
देखते ही रहोगे अनिमेश!
धन्य तुम, अतिथि तुम्हारा प्यार!
कविता का मूल भाव: इस कविता में कवि ने एक छोटे बच्चे की मनमोहक, नए-नए दाँतों वाली मुस्कान (दंतुरित मुस्कान) का बहुत ही सुंदर और सजीव चित्रण किया है। कवि का मानना है कि बच्चे की यह निष्कपट मुस्कान उदास से उदास या निराश व्यक्ति (मृतक) के मन में भी जीवन का संचार कर सकती है।
6. पाठ की व्याख्या एवं मुख्य बिंदु (Lesson Summary & Analysis)मुस्कान का प्रभाव: बच्चे की नए-नए दाँत वाली मुस्कान इतनी मोहक होती है कि मृतक (निराश/हताश व्यक्ति) में भी जान फूँक देती है।
बिंबों का प्रयोग:
कमल का खिलना: धूल से सना बच्चा ऐसा लगता है मानो कमल तालाब छोड़कर कवि की झोपड़ी में खिल गया हो।
पत्थर का पिघलना: बच्चे का स्पर्श पाकर कठोर से कठोर हृदय भी जल की तरह पिघल जाता है।
फूटना शेफालिका के फूल: बाँस या बबूल जैसा नीरस व्यक्ति भी बच्चे के स्पर्श से शेफालिका के फूलों की तरह झरने लगता है।
माँ का योगदान: कवि स्वयं को प्रवासी और अतिथि मानता है। बच्चे और कवि के बीच परिचय का माध्यम माँ बनती है।
📝 प्रश्नोत्तर (Questions & Answers)
प्रश्न 1: बच्चे की दंतुरित मुस्कान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: बच्चे की दंतुरित मुस्कान देखकर कवि का निराश और उदास मन प्रसन्नता से भर जाता है। उन्हें लगता है कि इस मुस्कान में मरे हुए व्यक्ति में भी प्राण डालने की शक्ति है। कवि को प्रतीत होता है कि कमल तालाब छोड़कर उनकी झोपड़ी में खिल आया है और कठोर पत्थर भी पिघलकर जल बन गया है।
प्रश्न 2: बच्चे की मुस्कान और एक बड़े व्यक्ति की मुस्कान में क्या अंतर होता है?
उत्तर:
बच्चे की मुस्कान: छल-कपतातित, निष्पाप, निस्वार्थ, स्वाभाविक और भोली होती है। इसमें कोई बनावट नहीं होती।
बड़े व्यक्ति की मुस्कान: प्रायः स्वार्थ, कूटनीति, औपचारिकता या परिस्थिति के अनुसार होती है। इसमें बनावटीपन हो सकता है।
प्रश्न 3: कवि ने बच्चे की मुस्कान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है?
उत्तर: कवि ने निम्नलिखित बिंबों का प्रयोग किया है:
मृतक में भी जान डाल देना।
धूल-धूसरित बच्चे का कमल की तरह झोपड़ी में खिलना।
पत्थर का पिघलकर जल बन जाना।
बाँस या बबूल से शेफालिका के फूल झरने लगना।
प्रश्न 4: 'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में माँ की क्या भूमिका बताई गई है?
उत्तर: बच्चे और कवि (पिता) के बीच संबंध स्थापित करने में माँ की भूमिका मुख्य (मध्यस्थ) है। कवि लंबे समय तक घर से बाहर (प्रवासी) रहने के कारण बच्चे के लिए अनजान था। माँ की अंगुलियों के मधुपर्क (प्रेम) और माध्यम के कारण ही बच्चा कवि को देख पाता है और मुस्कुराता है।
🔘 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
Q1. 'दंतुरित' शब्द का क्या अर्थ है?
(क) बिना दाँत का
(ख) नए-नए निकले दाँत
(ग) टूटे हुए दाँत
(घ) बड़े दाँत
उत्तर: (ख) नए-नए निकले दाँत
Q2. कवि के अनुसार बच्चे की मुस्कान किसमें जान डाल देती है?
(क) पौधों में
(ख) पशुओं में
(ग) मृतक में
(घ) पत्थरों में
उत्तर: (ग) मृतक में
Q3. "छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात" - यहाँ 'जलजात' का अर्थ क्या है?
(क) गुलाब
(ग) कमल
(ख) चमेली
(घ) सूरजमुखी
उत्तर: (ग) कमल
Q4. बच्चे का स्पर्श पाकर कठोर पत्थर किस रूप में परिवर्तित हो गया?
(क) धूल में
(ख) जल में
(ग) बर्फ में
(घ) हवा में
उत्तर: (ख) जल में
Q5. कवि और बच्चे के परिचय का माध्यम कौन बना?
(क) पिता
(ख) प्रकृति
(ग) माँ
(घ) पड़ोसी
उत्तर: (ग) माँ
Q6. 'यह दंतुरित मुस्कान' कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
(ख) नागार्जुन
(ग) तुलसीदास
(घ) जयशंकर प्रसाद
उत्तर: (ख) नागार्जुन
7. गृहकार्य (Homework)
बच्चे की मुस्कान पर 5 पंक्तियों का एक स्वरचित अनुच्छेद या कविता लिखिए।
पाठ के सभी प्रश्नोत्तर अभ्यास पुस्तिका में लिखिए
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