जामुन का पेड़
पाठ: जामुन का पेड़ (बहुविकल्पीय प्रश्न)
1. 'जामुन का पेड़' पाठ किस विधा की रचना है?
(क) एकांकी
(ख) हास्य-व्यंग्य कथा
(ग) निबंध
(घ) संस्मरण
2. रात को आए आँधी-तूफान में जामुन का पेड़ कहाँ गिरा था?
(क) अस्पताल के प्रांगण में
(ख) सेक्रेटेरियट (सचिवालय) के लॉन में
(ग) स्कूल के मैदान में
(घ) पार्क में
3. जामुन का पेड़ गिरने से उसके नीचे कौन दब गया था?
(क) एक क्लर्क
(ख) एक माली
(ग) एक दबा हुआ आदमी (कवि)
(घ) एक अफ़सर
4. जामुन के पेड़ के गिरने पर क्लर्क किस बात का अफ़सोस जता रहे थे?
(क) दबे हुए आदमी की चोट का
(ख) पेड़ के रसीले जामुनों का
(ग) सेक्रेटेरियट के नुकसान का
(घ) माली की मेहनत का
5. दबे हुए आदमी को सबसे पहले किसने खाना खिलाया और उसकी देखभाल की?
(क) सुपरिंटेंडेंट ने
(ख) माली ने
(ग) चपरासी ने
(घ) अंडर-सेक्रेटरी ने
6. पेड़ हटाने की फ़ाइल सबसे पहले किस विभाग में भेजी गई?
(क) कृषि विभाग (Agriculture Department)
(ख) उद्यान विभाग (Horticulture Department)
(ग) व्यापार विभाग (Commercial Department)
(घ) मेडिकल विभाग (Medical Department)
7. एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने पेड़ हटाने की ज़िम्मेदारी किस पर डाल दी?
(क) फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट पर
(ख) हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट पर
(ग) पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) पर
(घ) फॉरेन अफेयर्स डिपार्टमेंट पर
8. जब रात को माली ने दबे हुए आदमी के मुँह में खिचड़ी डालते हुए उससे बात की, तो उसने कौन-सा शे'र सुनाया?
(क) "ये माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन..."
(ख) "हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले..."
(ग) "मिरज़ा ग़ालिब का कोई शे'र"
(घ) "नुक़्ताचीँ है ग़म-ए-दिल..."
9. दबे हुए आदमी के शे'र सुनाने पर पूरे सेक्रेटेरियट में क्या ख़बर फैल गई?
(क) वह एक नेता है
(ख) वह एक व्यापारी है
(ग) वह एक कवि है
(घ) वह एक विदेशी नागरिक है
10. जब पता चला कि दबा हुआ आदमी एक कवि है, तो मामला किस विभाग को सौंप दिया गया?
(क) शिक्षा विभाग
(ख) कल्चरल (सांस्कृतिक) डिपार्टमेंट
(ग) विदेश विभाग
(घ) गृह विभाग
11. कल्चरल डिपार्टमेंट की साहित्य अकादमी के सचिव ने दबे हुए आदमी को क्या प्रस्ताव दिया?
(क) उसे तुरंत बाहर निकालने का
(ख) अकादमी का सदस्य (मेम्बर) बनाने का
(ग) उसे सरकारी नौकरी देने का
(घ) उसकी आर्थिक सहायता करने का
12. जब दबे हुए आदमी को काटने (प्लास्टिक सर्जरी) की सलाह दी गई, तो किस विभाग ने इसमें अड़चन पैदा की?
(क) विदेश विभाग
(ख) मेडिकल डिपार्टमेंट
(ग) वित्त विभाग
(घ) खाद्य विभाग
13. अंत में जामुन का पेड़ हटाने की अनुमति किस अंतरराष्ट्रीय स्तर से मिली?
(क) पिटोबो राज्य के प्रधानमंत्री द्वारा (क्योंकि उन्होंने यह पेड़ लगाया था)
(ख) संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) से
(ग) राष्ट्रपति से
(घ) विदेशी राजदूत से
14. जब प्रधानमंत्री का आदेश आया और फ़ाइल पूरी हुई, तब दबे हुए आदमी की क्या स्थिति थी?
(क) वह अस्पताल पहुँच चुका था
(ख) उसकी जीवन-लीला समाप्त हो चुकी थी (मृत्यु हो चुकी थी)
(ग) वह सही-सलामत बाहर निकल गया था
(घ) वह विदेश चला गया था
15. 'जामुन का पेड़' कहानी मुख्य रूप से किस व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करती है?
(क) शिक्षा व्यवस्था पर
(ख) लालफ़ीताशाही और संवेदनहीन अफ़सरशाही पर
(ग) राजनीतिक चुनाव प्रणाली पर
(घ) चिकित्सा व्यवस्था की कमी पर
उत्तरमाला (Answer Key):
(ख) हास्य-व्यंग्य कथा
(ख) सेक्रेटेरियट के लॉन में
(ग) एक दबा हुआ आदमी (कवि)
(ख) पेड़ के रसीले जामुनों का
(ख) माली ने
(ग) व्यापार विभाग
(ख) हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट पर
(क) "ये माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन..."
(ग) वह एक कवि है
(ख) कल्चरल (सांस्कृतिक) डिपार्टमेंट
(ख) अकादमी का सदस्य (मेम्बर) बनाने का
(ख) मेडिकल डिपार्टमेंट
(क) पिटोबो राज्य के प्रधानमंत्री द्वारा
(ख) उसकी जीवन-लीला समाप्त हो चुकी थी
(ख) लालफ़ीताशाही और संवेदनहीन अफ़सरशाही पर
'जामुन का पेड़' — महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: "जामुन का पेड़" किस शैली की रचना है और इसमें किस व्यवस्था पर व्यंग्य किया गया है?
उत्तर:
'जामुन का पेड़' एक हास्य-व्यंग्यात्मक कथा (Satire) है। इसमें सरकारी दफ़्तरों की अफ़सरशाही, लालफीताशाही (Red Tapism), संवेदनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर करारा प्रहार किया गया है।
कहानी यह दर्शाती है कि कैसे सरकारी महकमे किसी इंसान की जान बचाने से ज्यादा तरजीह नियम-कानूनों, कागजी औपचारिकताओं और अपने-अपने विभाग के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) को देते हैं।
प्रश्न 2: दबे हुए आदमी को निकालने के लिए कौन-कौन से विभागों (Ministries/Departments) में फाइल घूमती रही?
उत्तर:
दबे हुए आदमी को निकालने की प्रक्रिया में फाइल निम्नलिखित विभागों के बीच घूमती रही:
व्यापार विभाग (Commerce Dept.): मामला उनके अहाते का था, पर उन्होंने इसे कृषि विभाग का मामला बताकर टाल दिया।
कृषि विभाग (Agriculture Dept.): उन्होंने कहा कि पेड़ फलदार (जामुन) है, इसलिए यह हॉर्टीकल्चर (उद्यान कृषि) विभाग के अंतर्गत आता है।
हॉर्टीकल्चर विभाग (Horticulture Dept.): उन्होंने तर्क दिया कि पेड़ लगाना उनका काम है, काटना नहीं।
मेडिकल विभाग (Medical Dept.): आदमी के दो टुकड़े करके प्लास्टिक सर्जरी का बेतुका सुझाव दिया, पर जान बचाने की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया।
सांस्कृतिक विभाग (Cultural Dept.): जब पता चला कि दबा हुआ आदमी कवि है, तो उसे राज्य कवि अकादमी का सदस्य बना दिया गया, पर पेड़ हटाने की अनुमति नहीं दी।
विदेश विभाग (Foreign Dept.): जामुन का पेड़ पिटुनिया के प्रधानमंत्री ने लगाया था, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के खराब होने के डर से इसे काटने पर रोक लगा दी गई।
प्रश्न 3: "दबा हुआ आदमी एक कवि है"—यह बात पता चलने पर फाइल की यात्रा में क्या बदलाव आया?
उत्तर:
जब यह पता चला कि दबा हुआ आदमी एक कवि है, तो उसकी जान बचाने के प्रयास और अधिक जटिल हो गए:
फाइल कृषि या हॉर्टीकल्चर विभाग से हटकर सांस्कृतिक विभाग (Cultural Department) के पास भेज दी गई।
सांस्कृतिक विभाग के सचिव ने आकर उसका साक्षात्कार लिया और उसे 'साहित्य अकादमी' की उप-समिति का सदस्य चुन लिया तथा उसका भत्ता भी मंजूर कर दिया।
परंतु जब उससे पूछा गया कि क्या उसे पेड़ के नीचे से निकाला गया, तो सचिव ने साफ कह दिया कि उनका विभाग केवल साहित्य से संबंधित है, पेड़ हटाने का काम वन विभाग का है।
इस प्रकार, संवेदनहीनता का परिचय देते हुए एक इंसान की जान से ज्यादा उसकी साहित्यिक पहचान के दस्तावेज़ बनाने पर ज़ोर दिया गया।
प्रश्न 4: कवि की जान बचाने के रास्ते में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति कैसे बाधा बनी?
उत्तर:
विदेश विभाग ने तर्क दिया कि वह जामुन का पेड़ दस साल पहले पिटुनिया देश के प्रधानमंत्री ने सचिवालय के लॉन में लगाया था।
यदि इस पेड़ को काटा गया तो पिटुनिया सरकार से हमारे संबंध बिगड़ सकते हैं और पिटुनिया से मिलने वाली आर्थिक सहायता (Aid) बंद हो सकती है। दो देशों के कूटनीतिक संबंधों और आर्थिक सहायता को बनाए रखने के लिए एक आम इंसान की जान को दांव पर लगा दिया गया।
प्रश्न 5: "उसकी जीवन-फाइल पूर्ण हो चुकी थी"—इस पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर:
इस पंक्ति का अर्थ है कि दबे हुए आदमी (कवि) की मृत्यु हो चुकी थी।
जब विदेश विभाग से (प्रधान मंत्री की विशेष अनुमति के बाद) पेड़ काटने का आदेश आया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कागज़ी फाइल तो आखिरकार पूरी हो गई, लेकिन लालफीताशाही की इस लंबी देरी के कारण उस बेबस इंसान की जीवन-लीला ही समाप्त हो गई। यह पंक्ति अफ़सरशाही की आपराधिक संवेदनहीनता पर एक तीखा और दुखद व्यंग्य है।
एक नज़र में: पाठ की मुख्य सीख/संदेश
पहलूविवरण
मुख्य विषयलालफीताशाही, प्रशासनिक शिथिलता एवं मानवीय संवेदना का ह्रास
प्रतीक'जामुन का पेड़' और 'दबा हुआ आदमी' व्यवस्था में पिसती आम जनता का प्रतीक है
भाषा शैलीसरल, रोचक एवं व्यंग्यात्मक हिंदी
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