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Showing posts from December, 2025

भारतीय 16 संस्कार इनमें से कितने होते हैं आपके घरों में?

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1. सोलह संस्कारों का विस्तृत वर्णन 1. गर्भाधान संस्कार यह पहला संस्कार है, जो दंपत्ति के शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य श्रेष्ठ संतति का जन्म सुनिश्चित करना है। 2. पुंसवन संस्कार गर्भधारण के तीसरे महीने में किया जाने वाला यह संस्कार शिशु की रक्षा और माँ के स्वास्थ्य के लिए होता है। 3. सीमन्तोन्नयन संस्कार सीमंतोन्नयन संस्कार (यानी गोद भराई) जिसे लोगों ने  सिने स्टारों को टोपी कर कर के केवल प्रदर्शन का रूप बना दिया। है। संस्कार की प्रक्रिया 1. ससुराल पक्ष द्वारा वैदिक विधि विधान से गर्भस्थ शिशु और मां की सुरक्षा हेतु पूजा और मंत्रोच्चार:। माँ को पवित्र वस्त्र पहनाए जाते हैं। वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। देवताओं से माँ और शिशु की सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है। घर के बुजुर्ग और पुरोहित द्वारा श्रीफल सूखे मेवा  से गोद भरी जाती है। 2. बाल संवारने की रस्म: पति अपनी पत्नी के बालों को संवारता है। यह दांपत्य प्रेम और सहयोग का प्रतीक है। 3. अतिथियों का स्वागत: परिवार और मित्र माँ को आशीर्वाद देते हैं पोष्टिक खाद्य वस्तुओं का उपहार दिय...

वंदना सभा की वैज्ञानिकता

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  * हमारी वंदना सभा है पूर्ण वैज्ञानिक सभी विद्यालयों में अपने-अपने तरह की प्रार्थनाएं वंदनाएं होती हैं परंतु विद्या भारती की वंदना सभा की जो पद्धति है वह पूर्णतया वैज्ञानिक है व्यवहारिक है। अगर इसके वैज्ञानिक पक्ष पर विचार किया जाए तो सुखासन या पद्मासन अवस्था में वंदना की जो स्थिति है उसके पीछे शरीर विज्ञान है अध्यात्म विज्ञान है जब हम पालथी मार कर रीड की हड्डी को सीधा करके हाथ जोड़ने की स्थिति में बैठते हैं तो सीने के बीचो-बीच जो गड्ढा होता है उस गड्ढे को हाथ जोड़ने की स्थिति में जो मुद्रा बनती है दोनों अंगूठे से उसे मध्य भाग को स्पर्श किया जाता है। जहां हृदय चक्र होता है इस स्थिति में शरीर के सात चक्रों में से एक चक्र हृदय चक्र स्पंदित होता है ।पूरे शरीर का एक मंदिर जैसा आकार बनता है। पालथी मारकर सीधे बैठने पर मूलाधार चक्र जाग्रत होता है, ब्रह्मांड में घूम रही सकारात्मक ऊर्जा सिर से शरीर में प्रवेश करती है। क्योंकि हम  पालथी मार बैठे होते हैं अतः यह ऊर्जा शरीर में प्रवेश तो करती है परंतु शरीर से बाहर नहीं जाने पाती ।अर्थात वंदना सभा का जो समय होता है वह एक तरह से हमारा चार्...

11tu 2*हिंदी 2025

हिंदी कोर UT2 प्रश्न पत्र (2025-26) Class 11 – हिंदी कोर सरस्वती विद्या मंदिर कमला नगर आगरा  अधिकतम अंक: 40 निर्धारित समय : 90 Minutes  सामान्य निर्देश: निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका पालन कीजिए :- इस प्रश्न -पत्र तीन खण्ड – खंड- क, ख और ग हैं। खंड- क में अपठित बोध पर आधारित प्रश्न पूछे गये हैं। सभी प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य है। खंड- ख में अभिव्यक्ति और माध्यम पाठ्यपुस्तक के आधार पर प्रश्न पूछे गये हैं| कुछ प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए गये हैं। खंड- ग में आरोह भाग –1  एवं वितान भाग – 1 पाठ्यपुस्तकों के आधार पर प्रश्न पूछे गये हैं। कुछ प्रश्नों में आंतरिक भी विकल्प दिए गये हैं। खंड क (अपठित बोध) 1.निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (8) लोकतंत्र के तीनो पायों-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का अपना-अपना महत्त्व है, किंतु जब प्रथम दो अपने मार्ग या उद्देश्य के प्रति शिथिल होती है या संविधान के दिशा-निर्देशों की अवहेलना होती है, तो न्यायपालिका का विशेष महत्त्व हो जाता है। न्यायपालिका ही है, जो हमें आईना दिखाती है, कि...

तुलसी कृत लक्ष्मण की मूर्छा प्रसंग

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3/12/25 सरला की पाठशाला में पुनः अभ्यास  प्रसंग -लक्ष्मन की मूर्छा ,  उद्देश्य -नैतिक एवं आध्यात्मिक बोध एवं पुनरावृत्ति से  विषय परिपक्वता। शिक्षण विधि- कथा, व्याख्यान, प्रयोग प्रश्नोत्तरी। ग्रंथ -राम चरितमानस  लंका काण्ड  संकलन -आरोह 12हिंदी भाषा -अवधी। पाठ आधारित बोध प्रश्न - 1. राम का विलाप शंकर सेवा पर क्या प्रभाव पड़ा?  2. प्रथम दोहा में किन दो घटनाओं की ओर संकेत किया गया है ?यहां हनुमान किस-किस से जाने की आज्ञा मांग रहे है? 3. संपूर्ण प्रसंग में भाषा, छंद ,रस, एवं अलंकार पर विचार प्रकट कीजिए। 4."जगदंबा हरि इन सब अब चाहत कल्याण " किसका कथन है? सप्रसंग व्याख्या करें। 5.सम्पूर्ण प्रसंग अनुसार लक्ष्मण के त्याग पर प्रकाश डालें। 6.लक्ष्मण की दशा देखकर कौन मनुष्य की भांति विलाप करने लगे?करुण रस की पुष्टि में तर्क दें। 7.लक्ष्मण के अभाव में राम स्वयं की तुलना किसी किस से करते हैं? 8.करुणा के बीच वीर रस का प्रकट होने का भाव स्पष्ट करें। 9.लक्ष्मण के जी...