पत्रकारिता और उसके विविध आयाम ।कक्षा - 12 अर्द्ध वार्षिक
पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम
संचार –
प्रश्न 1.
संचार क्या है ? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर :
दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान ही संचार है। संचार के बिना जीवन संभव नहीं है।
संचार के कई प्रकार हैं, जिनमें मौखिक और अमौखिक संचार के अलावा निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं :
अंत: वैयक्तिक संचार
अंतर वैयक्तिक संचार
समूह संचार
जनसंचार
प्रश्न 2.
संचार के प्रमुख तत्त्व बताइए।
उत्तर :
संचास-प्रक्रिया में शामिल प्रमुख तत्त्व ये हैं :
स्रोत – संचार-प्रक्रिया का प्रारंभ स्रोत या संचारक से होता है।
भाषा – बातचीत या संदेश भेजने के लिए भाषा का सहारा लिया जाता है।
संदेश – संचार-प्रक्रिया में अलग चरण संदेश होता है। संदेश स्पष्ट होना चाहिए।
माध्यम (चैनल) – संदेश टेलीफोन, समाचार-पत्र, रेडियो, टी.वी., इंटरनेट आदि माध्यमों के जरिए प्राप्तकर्ता तक पहुँचाया जाता है।
प्राप्तकर्ता (रिसीवर) – प्राप्तकर्ता प्राप्त संदेश का कूटवाचन यानी डिकोडिंग करता है।
फीडबैक – प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया को फीडबैक कहा जाता है।
संचार-प्रक्रिया में कई बाधाएँ आती हैं। इन्हें शोर (नॉयज) कहा जाता है। संचार-प्रक्रिया से शोर को हटाना जरूरी है।
पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 1
जनसंचार –
प्रश्न 3.
जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
संचार का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रकार है-जनसंचार अर्थात् Mass Communication।
जब हम व्यक्तियों के समूह के साथ प्रत्यक्ष संवाद की बजाय किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज के विशाल वर्ग के साथ संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं तब इसे जनसंचार कहा जाता है। इसमें संदेश को यांत्रिक माध्यम से बहुगुणित किया जाता है।
प्रश्न 4.
जनसंचार की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
जनसंचार में ‘फीडबैक’ तुरंत प्राप्त नहीं होता।
इसका दायरा व्यापक होता है।
जनसंचार के संदेश सबके लिए होते हैं।
जनसंचार माध्यम में कई द्वारपाल (गेटकीपर) होते हैं।
द्वारपाल वह व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह होता है जो प्रसारित की जाने वाली सामग्री को नियंत्रित और निर्धारित करता है।
प्रश्न 5.
जनसंचार के प्रमुख कार्य क्या हैं ?
उत्तर :
जनसंचार के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं
संचार –
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4
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12
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CBSE Class 12 Hindi Elective रचना पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम
February 15, 2023 by Bhagya
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CBSE Class 12 Hindi Elective Rachana पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम
संचार –
प्रश्न 1.
संचार क्या है ? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर :
दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान ही संचार है। संचार के बिना जीवन संभव नहीं है।
संचार के कई प्रकार हैं, जिनमें मौखिक और अमौखिक संचार के अलावा निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं :
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अंत: वैयक्तिक संचार
अंतर वैयक्तिक संचार
समूह संचार
जनसंचार
प्रश्न 2.
संचार के प्रमुख तत्त्व बताइए।
उत्तर :
संचास-प्रक्रिया में शामिल प्रमुख तत्त्व ये हैं :
स्रोत – संचार-प्रक्रिया का प्रारंभ स्रोत या संचारक से होता है।
भाषा – बातचीत या संदेश भेजने के लिए भाषा का सहारा लिया जाता है।
संदेश – संचार-प्रक्रिया में अलग चरण संदेश होता है। संदेश स्पष्ट होना चाहिए।
माध्यम (चैनल) – संदेश टेलीफोन, समाचार-पत्र, रेडियो, टी.वी., इंटरनेट आदि माध्यमों के जरिए प्राप्तकर्ता तक पहुँचाया जाता है।
प्राप्तकर्ता (रिसीवर) – प्राप्तकर्ता प्राप्त संदेश का कूटवाचन यानी डिकोडिंग करता है।
फीडबैक – प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया को फीडबैक कहा जाता है।
संचार-प्रक्रिया में कई बाधाएँ आती हैं। इन्हें शोर (नॉयज) कहा जाता है। संचार-प्रक्रिया से शोर को हटाना जरूरी है।
CBSE Class 12 Hindi Elective रचना पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 1
जनसंचार –
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प्रश्न 3.
जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
संचार का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रकार है-जनसंचार अर्थात् Mass Communication।
जब हम व्यक्तियों के समूह के साथ प्रत्यक्ष संवाद की बजाय किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज के विशाल वर्ग के साथ संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं तब इसे जनसंचार कहा जाता है। इसमें संदेश को यांत्रिक माध्यम से बहुगुणित किया जाता है।
प्रश्न 4.
जनसंचार की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
जनसंचार में ‘फीडबैक’ तुरंत प्राप्त नहीं होता।
इसका दायरा व्यापक होता है।
जनसंचार के संदेश सबके लिए होते हैं।
जनसंचार माध्यम में कई द्वारपाल (गेटकीपर) होते हैं।
द्वारपाल वह व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह होता है जो प्रसारित की जाने वाली सामग्री को नियंत्रित और निर्धारित करता है।
प्रश्न 5.
जनसंचार के प्रमुख कार्य क्या हैं ?
उत्तर :
जनसंचार के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
सूचना देना
जनता को शिक्षित कर जागरुक बनाना।
मनोरंजन करना।
एजेंडा तय करना (देश और समाज के लिए)
निगरानी करना (सरकार और संस्थाओं के कामकाज की)
विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना।
प्रश्न 6.
वर्तमान में जनसंचार के कौन-कौन से रूप प्रचलित हैं ?
उत्तर :
वर्तमान में जनसंचार के निम्नलिखित रूप प्रचलित हैं –
समाचार पत्र (प्रिंट मीडिया) पत्रकारिता
रेडियो (ध्वनि माध्यम)
टेलीविजन (सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम)
सिनेमा
इंटरनेट (जनसंचार सर्वथा नया और लोकप्रिय माध्यम)
प्रश्न 1.
संचार क्या है ? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर :
दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान ही संचार है। संचार के बिना जीवन संभव नहीं है।
संचार के कई प्रकार हैं, जिनमें मौखिक और अमौखिक संचार के अलावा निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं :
अंत: वैयक्तिक संचार
अंतर वैयक्तिक संचार
समूह संचार
जनसंचार
प्रश्न 2.
संचार के प्रमुख तत्त्व बताइए।
उत्तर :
संचास-प्रक्रिया में शामिल प्रमुख तत्त्व ये हैं :
स्रोत – संचार-प्रक्रिया का प्रारंभ स्रोत या संचारक से होता है।
भाषा – बातचीत या संदेश भेजने के लिए भाषा का सहारा लिया जाता है।
संदेश – संचार-प्रक्रिया में अलग चरण संदेश होता है। संदेश स्पष्ट होना चाहिए।
माध्यम (चैनल) – संदेश टेलीफोन, समाचार-पत्र, रेडियो, टी.वी., इंटरनेट आदि माध्यमों के जरिए प्राप्तकर्ता तक पहुँचाया जाता है।
प्राप्तकर्ता (रिसीवर) – प्राप्तकर्ता प्राप्त संदेश का कूटवाचन यानी डिकोडिंग करता है।
फीडबैक – प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया को फीडबैक कहा जाता है।
संचार-प्रक्रिया में कई बाधाएँ आती हैं। इन्हें शोर (नॉयज) कहा जाता है। संचार-प्रक्रिया से शोर को हटाना जरूरी है।
प्रश्न 4.
जनसंचार की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
जनसंचार में ‘फीडबैक’ तुरंत प्राप्त नहीं होता।
इसका दायरा व्यापक होता है।
जनसंचार के संदेश सबके लिए होते हैं।
जनसंचार माध्यम में कई द्वारपाल (गेटकीपर) होते हैं।
द्वारपाल वह व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह होता है जो प्रसारित की जाने वाली सामग्री को नियंत्रित और निर्धारित करता है।
प्रश्न 5.
जनसंचार के प्रमुख कार्य क्या हैं ?
उत्तर :
जनसंचार के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
सूचना देना
जनता को शिक्षित कर जागरुक बनाना।
मनोरंजन करना।
एजेंडा तय करना (देश और समाज के लिए)
निगरानी करना (सरकार और संस्थाओं के कामकाज की)
विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना।
प्रश्न 6.
वर्तमान में जनसंचार के कौन-कौन से रूप प्रचलित हैं ?
उत्तर :
वर्तमान में जनसंचार के निम्नलिखित रूप प्रचलित हैं –
समाचार पत्र (प्रिंट मीडिया) पत्रकारिता
रेडियो (ध्वनि माध्यम)
टेलीविजन (सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम)
सिनेमा
इंटरनेट (जनसंचार सर्वथा नया और लोकप्रिय माध्यम)
प्रश्न 7.
इंटरनेट क्या है ? इसकी खामियाँ बताइए।
उत्तर:
इंटरनेट एक अंतरक्रियात्मक माध्यम है। इसमें आप मूकदर्शक नहीं हैं। इसके माध्यम से आप सवाल-जवाब, बहस-मुबाहिसों में भाग ले सकते हैं, चैट कर सकते हैं, ब्लॉग बनाकर किसी बहस के सूत्रधार बन सकते हैं। इसमें प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन, किताब आदि के समस्त गुण मौजूद हैं। इसमें करोड़ों पन्नों की सामग्री भर दी गई है। यह सूचनाओं का विश्वव्यापी जाल है। इसकी रफ्तार का कोई जवाब नहीं है।
खामियाँ :
इसमें लाखों अश्लील पन्ने भर दिए गए हैं जिनका छोटे बच्चों के कोमल मन पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
इंटरनेट का दुरुपयोग किया जा सकता है।
2. पत्रकारिता
प्रश्न 1.
पत्रकारिता क्या है ? इसके कितने प्रकार हैं ?
उत्तर :
पत्रकारिता का संबंध सूचनाओं को संकलित और संपादित कर पाठकों तक पहुँचाना है।
समाचारों के संपादन में तथ्यपरकता, वस्तुपरकता, निष्पक्षता और संतुलन जैसे सिद्धांतों का ध्यान रखना पड़ता है लेकिन पत्रकारिता का संबंध केवल
समाचारों तक सीमित नहीं है, इसमें संपादकीय, लेख, कार्टून और फोटो भी शामिल हैं।
पत्रकारिता के प्रमुख प्रकार ये हैं :
खोजपरक पत्रकारिता
वॉच डॉग पत्रकारिता
एडवोकेसी पत्रकारिता
विशेषीकृत पत्रकारिता
वैकल्पिक पत्रकारिता
प्रश्न 2.
पीत पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
समाचार मीडिया में हमेशा से ही सनसनीखेज या पीत पत्रकारिता और पेज थ्री पत्रकारिता की धाराएँ मौजूद रही हैं। पीत पत्रकारिता का प्रयोग किसी व्यक्ति के चरित्र हनन के लिए भी किया जाता है। इसे पत्रकारिता का घटिया रूप माना जाता है।
प्रश्न 3.
पत्रकारिता के कौन-कौन से सिद्धांत हैं ?
उत्तर :
पत्रकारिता के सिद्धांत निम्नलिखित हैं :
तथ्यों की शुद्धता (Accuracy)
निष्पक्षता (Fairness)
स्रोत (Source)
वस्तुपरकता (Objectivity)
संतुलन (Balance)
प्रश्न 4.
पत्रकारिता के विविध आयामों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर :
पत्रकारिता के विविध आयाम इस प्रकार हैं :
संपादकीय – संपादकीय पृष्ठ को समाचार का महत्त्वपूर्ण पृष्ठ माना जाता है। इस पृष्ठ पर संपादक विभिन्न घटनाओं पर अपनी राय प्रकट करता है। इसे अखबार की आवाज माना जाता है।
फोटो पत्रकारिता – फोटो द्वारा की गई टिप्पणियों का असर व्यापक होता है।
कार्टून कोना – कार्टूनों के माध्यम से की गई सटीक टिप्पणियाँ पाठकों को छूती हैं।
रेखांकन/कार्टोग्राफ – ये समाचारों को न केवल रोचक बनाते हैं बल्कि टिप्पणी भी करते हैं।
प्रश्न 5.
खोजपरक पत्रकारिता क्या होती है ?
उत्तर :
खोजपरक पत्रकारिता में गहराई से छानबीन करके ऐसे तथ्यों और सूचनाओं को सामने लाने की कोशिश की जाती है जिन्हें दबाने या छिपाने का प्रयास किया गया होता है। आमतौर पर खोजी पत्रकारिता सार्वजनिक महत्त्व के मामलों में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और गड़बड़ियों को उजागर करने का माध्यम है। खोजी पत्रकारिता का ही एक रूप ‘स्टिंग ऑपरेशन’ है।
प्रश्न 6.
वॉचडॉग पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
लोकतंत्र में पत्रकारिता और समाचार मीडिया का मुख्य उत्तरदायित्व सरकार के कामकाज पर निगरानी रखना है। यदि कहीं कोई गड़बड़ी हो तो उसका पर्दाफाश करना ही वॉचडॉग पत्रकारिता है। इसका दूसरा छोर सरकारी सूत्रों पर आधारित पत्रकारिता है।
3. विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
प्रश्न 1.
प्रमुख जनसंचार माध्यम कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
प्रमुख जनसंचार माध्यम ये हैं :
प्रिंट मीडिया (अखबार)
टी.वी.
रेडियो इंटरनेट
प्रश्न 2.
प्रिंट (मुद्रित) माध्यम की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
मुद्रित माध्यमों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
छपे शब्दों में स्थायित्व होता है।
इन्हें आप आराम से और धीरे-धीरे पढ़ सकते हैं।
इन्हें पढ़ते हुए उन पर सोच सकते हैं।
समझ न आने पर दोबारा पढ़ सकते हैं।
किसी भी समाचार या रिपोर्ट को पहले या पीछे पढ़ सकते हैं।
इसमें किसी भी क्रम में पढ़ने की बाध्यता नहीं है।
इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और उसे संदर्भ की तरह प्रयोग कर सकते हैं।
यह लिखित भाषा का विस्तार है। इसमें लिखित भाषा की सभी विशेषताएँ शामिल हैं।
लिखित और मौखिक भाषा में सबसे बड़ा अंतर यह है कि लिखित भाषा अनुशासन की माँग करती है। लिखते समय भाषा, व्याकरण, वर्तनी और शब्दों के उपयुक्त इस्तेमाल का ध्यान रखना पड़ता है। इसे प्रचलित भाषा में लिखना पड़ता है ताकि अधिक से अधिक लोग इसे समझ सकें।
मुद्रित माध्यमों की एक अन्य प्रमुख विशेषता यह है कि यह चिंतन, विचार और विश्लेषण का माध्यम है। इसमें गंभीर और गूढ़ बातें लिखी जा सकती हैं, क्योंकि पाठक के पास इन्हें पढ़ने, समझने और सोचने का काफी समय होता है। मुद्रित माध्यम का पाठक साक्षर एवं विशेष योग्यता वाला व्यक्ति होता है।
प्रश्न 3.
मुद्रित माध्यम की कमियाँ क्या हैं ?
उत्तर :
मुद्रित माध्यम की कमियाँ ये हैं :
यह माध्यम केवल साक्षरों के लिए है। निरक्षरों के लिए मुद्रित माध्यम किसी काम का नहीं है।
इस माध्यम में लिखने वालों को अपने पाठकों के भाषा – ज्ञान के साथ-साथ उनकी योग्यता का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है।
मुद्रित माध्यमों की एक सीमा है। वे रेडियो, टी.वी. या इंटरनेट की तरह तुरंत घटी घटनाओं को संचालित नहीं कर सकते। समाचारपत्र एक निश्चित अवधि पर प्रकाशित होते हैं, जैसे : अखबार 24 घंटे बाद ही छपता है।
अखबार या पत्रिका में समाचारों या रिपोर्ट के प्रकाशन की एक निश्चित समय-सीमा होती है जिसे ‘डेडलाइन’ कहा जाता है। इसके बाद कोई सामग्री प्रकाशन के लिए स्वीकार नहीं की जाती।
प्रश्न 4.
मुद्रित माध्यम में किन-किन बातों पर ध्यान देना अपेक्षित है ?
उत्तर :
मुद्रित (प्रिंट) माध्यम में निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना अपेक्षित है :
मुद्रित माध्यमों में लेखक को जगह (स्पेस) का पूरा ध्यान रखना चाहिए। समाचार, रिपोर्ट या फीचर की निर्धारित शब्द – सीमा को ध्यान में रखना जरूरी है। अखबार या पत्रिका में जगह सीमित होती है। महत्त्व और जगह की उपलब्धता को ध्यान में रखना चाहिए।
मुद्रित माध्यम के पत्रकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि छपने से पहले आलेख की सभी अशुद्धियों को दूर कर दिया गया हो। प्रकाशन के बाद गलती या अशुद्धि वहीं चिपक जाती है तथा उसका संशोधन अगले दिन के अखबार में ही हो पाता है।
संपादक के साथ एक पूरी संपादकीय टीम भी होती है। अतः अशुद्धियों को दूर करके सामग्री को प्रकाशन योग्य बनाया जाना जरूरी है।
भाषा, वर्तनी, व्याकरण और शैली पर विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रचलित भाषा का प्रयोग हो।
लेखन में सहज प्रवाह के लिए तारतम्यता को बनाए रखना जरूरी है।
रेडियो –
प्रश्न 5.
रेडियो समाचार – लेखन की बुनियादी बातों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
रेडियो एक श्रव्य माध्यम है। इसमें पुनः सुनने की सुविधा नहीं होती।
रेडियो – समाचार लेखन की बुनियादी बातें : रेडियो के लिए समाचार कॉपी तैयार करते हुए इन बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए :
1. साफ-सुथरी टाइप्ड कॉपी : रेडियो पर समाचार वाचक के लिए ऐसी कॉपी तैयार की जानी चाहिए जिसे पढ़ने में उसे कोई दिक्कत न हो। यदि समाचार कॉपी साफ-सुथरी और टाइप्ड नहीं होगी तो वाचक पढ़ते समय अटकेगा या गलत पढ़ सकता है। इससे श्रोताओं का ध्यान बँटता है और वे भ्रमित हो जाते हैं। इसके लिए :
समाचार कॉपी को कंप्यूटर पर ट्रिपल स्पेस में टाइप किया जाना चाहिए।
कॉपी के दोनों ओर पर्याप्त हाशिया छोड़ना चाहिए।
एक लाइन में अधिकतम 12-13 शब्द होने चाहिए।
पंक्ति के आखिर में कोई शब्द विभाजित नहीं होना चाहिए।
पृष्ठ के आखिर में लाइन अधूरी नहीं होनी चाहिए।
समाचार कॉपी में जटिल और उच्चारण में कठिन शब्द, संक्षिप्ताक्षर, अंक आदि नहीं लिखने चाहिए। इनके पढ़ने में जबान लड़खड़ा सकती है।
2. डेडलाइन, संदर्भ और संक्षिप्ताक्षर का प्रयोग : रेडियो में अखबारों की तरह डेडलाइन अलग से नहीं होती, बल्कि समाचार से ही गुँथी होती है। अखबार तो दिन में एक बार ही छपकर आता है जबकि रेडियो पर समाचार चौबीसों घंटे चलते रहते हैं। रेडियो समाचार में आज सुबह, आज दोपहर, आज शाम, आज तड़के आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह ……. बैठक कल होगी या …… बैठक कल हुई ……. का प्रयोग किया जाता है।
संक्षिप्ताक्षर के प्रयोग में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। अच्छी बात तो यह है कि इनके प्रयोग से बचा जाए। यदि बहुत आवश्यक ही हो तो समाचार से शुरू में पहले उसे पूरा दिया जाए, फिर सक्षिप्ताक्षर का प्रयोग किया जाए। इसमें संक्षिप्ताक्षर की लोकप्रियता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, जैसे : यूएनओ, यूनिसेफ, सार्क, आईसीआईसीआई बैंक।
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CBSE Class 12 Hindi Elective रचना पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम
February 15, 2023 by Bhagya
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CBSE Class 12 Hindi Elective Rachana पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम
संचार –
प्रश्न 1.
संचार क्या है ? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर :
दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान ही संचार है। संचार के बिना जीवन संभव नहीं है।
संचार के कई प्रकार हैं, जिनमें मौखिक और अमौखिक संचार के अलावा निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं :
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अंत: वैयक्तिक संचार
अंतर वैयक्तिक संचार
समूह संचार
जनसंचार
प्रश्न 2.
संचार के प्रमुख तत्त्व बताइए।
उत्तर :
संचास-प्रक्रिया में शामिल प्रमुख तत्त्व ये हैं :
स्रोत – संचार-प्रक्रिया का प्रारंभ स्रोत या संचारक से होता है।
भाषा – बातचीत या संदेश भेजने के लिए भाषा का सहारा लिया जाता है।
संदेश – संचार-प्रक्रिया में अलग चरण संदेश होता है। संदेश स्पष्ट होना चाहिए।
माध्यम (चैनल) – संदेश टेलीफोन, समाचार-पत्र, रेडियो, टी.वी., इंटरनेट आदि माध्यमों के जरिए प्राप्तकर्ता तक पहुँचाया जाता है।
प्राप्तकर्ता (रिसीवर) – प्राप्तकर्ता प्राप्त संदेश का कूटवाचन यानी डिकोडिंग करता है।
फीडबैक – प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया को फीडबैक कहा जाता है।
संचार-प्रक्रिया में कई बाधाएँ आती हैं। इन्हें शोर (नॉयज) कहा जाता है। संचार-प्रक्रिया से शोर को हटाना जरूरी है।
CBSE Class 12 Hindi Elective रचना पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 1
जनसंचार –
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प्रश्न 3.
जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
संचार का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रकार है-जनसंचार अर्थात् Mass Communication।
जब हम व्यक्तियों के समूह के साथ प्रत्यक्ष संवाद की बजाय किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज के विशाल वर्ग के साथ संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं तब इसे जनसंचार कहा जाता है। इसमें संदेश को यांत्रिक माध्यम से बहुगुणित किया जाता है।
प्रश्न 4.
जनसंचार की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
जनसंचार में ‘फीडबैक’ तुरंत प्राप्त नहीं होता।
इसका दायरा व्यापक होता है।
जनसंचार के संदेश सबके लिए होते हैं।
जनसंचार माध्यम में कई द्वारपाल (गेटकीपर) होते हैं।
द्वारपाल वह व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह होता है जो प्रसारित की जाने वाली सामग्री को नियंत्रित और निर्धारित करता है।
प्रश्न 5.
जनसंचार के प्रमुख कार्य क्या हैं ?
उत्तर :
जनसंचार के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
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सूचना देना
जनता को शिक्षित कर जागरुक बनाना।
मनोरंजन करना।
एजेंडा तय करना (देश और समाज के लिए)
निगरानी करना (सरकार और संस्थाओं के कामकाज की)
विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना।
प्रश्न 6.
वर्तमान में जनसंचार के कौन-कौन से रूप प्रचलित हैं ?
उत्तर :
वर्तमान में जनसंचार के निम्नलिखित रूप प्रचलित हैं –
समाचार पत्र (प्रिंट मीडिया) पत्रकारिता
रेडियो (ध्वनि माध्यम)
टेलीविजन (सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम)
सिनेमा
इंटरनेट (जनसंचार सर्वथा नया और लोकप्रिय माध्यम)
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प्रश्न 7.
इंटरनेट क्या है ? इसकी खामियाँ बताइए।
उत्तर:
इंटरनेट एक अंतरक्रियात्मक माध्यम है। इसमें आप मूकदर्शक नहीं हैं। इसके माध्यम से आप सवाल-जवाब, बहस-मुबाहिसों में भाग ले सकते हैं, चैट कर सकते हैं, ब्लॉग बनाकर किसी बहस के सूत्रधार बन सकते हैं। इसमें प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन, किताब आदि के समस्त गुण मौजूद हैं। इसमें करोड़ों पन्नों की सामग्री भर दी गई है। यह सूचनाओं का विश्वव्यापी जाल है। इसकी रफ्तार का कोई जवाब नहीं है।
खामियाँ :
इसमें लाखों अश्लील पन्ने भर दिए गए हैं जिनका छोटे बच्चों के कोमल मन पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
इंटरनेट का दुरुपयोग किया जा सकता है।
2. पत्रकारिता
प्रश्न 1.
पत्रकारिता क्या है ? इसके कितने प्रकार हैं ?
उत्तर :
पत्रकारिता का संबंध सूचनाओं को संकलित और संपादित कर पाठकों तक पहुँचाना है।
समाचारों के संपादन में तथ्यपरकता, वस्तुपरकता, निष्पक्षता और संतुलन जैसे सिद्धांतों का ध्यान रखना पड़ता है लेकिन पत्रकारिता का संबंध केवल
समाचारों तक सीमित नहीं है, इसमें संपादकीय, लेख, कार्टून और फोटो भी शामिल हैं।
पत्रकारिता के प्रमुख प्रकार ये हैं :
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खोजपरक पत्रकारिता
वॉच डॉग पत्रकारिता
एडवोकेसी पत्रकारिता
विशेषीकृत पत्रकारिता
वैकल्पिक पत्रकारिता
प्रश्न 2.
पीत पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
समाचार मीडिया में हमेशा से ही सनसनीखेज या पीत पत्रकारिता और पेज थ्री पत्रकारिता की धाराएँ मौजूद रही हैं। पीत पत्रकारिता का प्रयोग किसी व्यक्ति के चरित्र हनन के लिए भी किया जाता है। इसे पत्रकारिता का घटिया रूप माना जाता है।
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प्रश्न 3.
पत्रकारिता के कौन-कौन से सिद्धांत हैं ?
उत्तर :
पत्रकारिता के सिद्धांत निम्नलिखित हैं :
तथ्यों की शुद्धता (Accuracy)
निष्पक्षता (Fairness)
स्रोत (Source)
वस्तुपरकता (Objectivity)
संतुलन (Balance)
प्रश्न 4.
पत्रकारिता के विविध आयामों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर :
पत्रकारिता के विविध आयाम इस प्रकार हैं :
संपादकीय – संपादकीय पृष्ठ को समाचार का महत्त्वपूर्ण पृष्ठ माना जाता है। इस पृष्ठ पर संपादक विभिन्न घटनाओं पर अपनी राय प्रकट करता है। इसे अखबार की आवाज माना जाता है।
फोटो पत्रकारिता – फोटो द्वारा की गई टिप्पणियों का असर व्यापक होता है।
कार्टून कोना – कार्टूनों के माध्यम से की गई सटीक टिप्पणियाँ पाठकों को छूती हैं।
रेखांकन/कार्टोग्राफ – ये समाचारों को न केवल रोचक बनाते हैं बल्कि टिप्पणी भी करते हैं।
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प्रश्न 5.
खोजपरक पत्रकारिता क्या होती है ?
उत्तर :
खोजपरक पत्रकारिता में गहराई से छानबीन करके ऐसे तथ्यों और सूचनाओं को सामने लाने की कोशिश की जाती है जिन्हें दबाने या छिपाने का प्रयास किया गया होता है। आमतौर पर खोजी पत्रकारिता सार्वजनिक महत्त्व के मामलों में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और गड़बड़ियों को उजागर करने का माध्यम है। खोजी पत्रकारिता का ही एक रूप ‘स्टिंग ऑपरेशन’ है।
प्रश्न 6.
वॉचडॉग पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
लोकतंत्र में पत्रकारिता और समाचार मीडिया का मुख्य उत्तरदायित्व सरकार के कामकाज पर निगरानी रखना है। यदि कहीं कोई गड़बड़ी हो तो उसका पर्दाफाश करना ही वॉचडॉग पत्रकारिता है। इसका दूसरा छोर सरकारी सूत्रों पर आधारित पत्रकारिता है।
3. विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
प्रश्न 1.
प्रमुख जनसंचार माध्यम कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
प्रमुख जनसंचार माध्यम ये हैं :
प्रिंट मीडिया (अखबार)
टी.वी.
रेडियो इंटरनेट
प्रश्न 2.
प्रिंट (मुद्रित) माध्यम की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
मुद्रित माध्यमों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
छपे शब्दों में स्थायित्व होता है।
इन्हें आप आराम से और धीरे-धीरे पढ़ सकते हैं।
इन्हें पढ़ते हुए उन पर सोच सकते हैं।
समझ न आने पर दोबारा पढ़ सकते हैं।
किसी भी समाचार या रिपोर्ट को पहले या पीछे पढ़ सकते हैं।
इसमें किसी भी क्रम में पढ़ने की बाध्यता नहीं है।
इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और उसे संदर्भ की तरह प्रयोग कर सकते हैं।
यह लिखित भाषा का विस्तार है। इसमें लिखित भाषा की सभी विशेषताएँ शामिल हैं।
लिखित और मौखिक भाषा में सबसे बड़ा अंतर यह है कि लिखित भाषा अनुशासन की माँग करती है। लिखते समय भाषा, व्याकरण, वर्तनी और शब्दों के उपयुक्त इस्तेमाल का ध्यान रखना पड़ता है। इसे प्रचलित भाषा में लिखना पड़ता है ताकि अधिक से अधिक लोग इसे समझ सकें।
मुद्रित माध्यमों की एक अन्य प्रमुख विशेषता यह है कि यह चिंतन, विचार और विश्लेषण का माध्यम है। इसमें गंभीर और गूढ़ बातें लिखी जा सकती हैं, क्योंकि पाठक के पास इन्हें पढ़ने, समझने और सोचने का काफी समय होता है। मुद्रित माध्यम का पाठक साक्षर एवं विशेष योग्यता वाला व्यक्ति होता है।
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मानकीकृत और प्रवेश परीक्षाएं
सामाजिक विज्ञान
अनुवाद टूल और संसाधन
संचार
पत्रकारिता और समाचार उद्योग
प्रश्न 3.
मुद्रित माध्यम की कमियाँ क्या हैं ?
उत्तर :
मुद्रित माध्यम की कमियाँ ये हैं :
यह माध्यम केवल साक्षरों के लिए है। निरक्षरों के लिए मुद्रित माध्यम किसी काम का नहीं है।
इस माध्यम में लिखने वालों को अपने पाठकों के भाषा – ज्ञान के साथ-साथ उनकी योग्यता का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है।
मुद्रित माध्यमों की एक सीमा है। वे रेडियो, टी.वी. या इंटरनेट की तरह तुरंत घटी घटनाओं को संचालित नहीं कर सकते। समाचारपत्र एक निश्चित अवधि पर प्रकाशित होते हैं, जैसे : अखबार 24 घंटे बाद ही छपता है।
अखबार या पत्रिका में समाचारों या रिपोर्ट के प्रकाशन की एक निश्चित समय-सीमा होती है जिसे ‘डेडलाइन’ कहा जाता है। इसके बाद कोई सामग्री प्रकाशन के लिए स्वीकार नहीं की जाती।
प्रश्न 4.
मुद्रित माध्यम में किन-किन बातों पर ध्यान देना अपेक्षित है ?
उत्तर :
मुद्रित (प्रिंट) माध्यम में निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना अपेक्षित है :
मुद्रित माध्यमों में लेखक को जगह (स्पेस) का पूरा ध्यान रखना चाहिए। समाचार, रिपोर्ट या फीचर की निर्धारित शब्द – सीमा को ध्यान में रखना जरूरी है। अखबार या पत्रिका में जगह सीमित होती है। महत्त्व और जगह की उपलब्धता को ध्यान में रखना चाहिए।
मुद्रित माध्यम के पत्रकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि छपने से पहले आलेख की सभी अशुद्धियों को दूर कर दिया गया हो। प्रकाशन के बाद गलती या अशुद्धि वहीं चिपक जाती है तथा उसका संशोधन अगले दिन के अखबार में ही हो पाता है।
संपादक के साथ एक पूरी संपादकीय टीम भी होती है। अतः अशुद्धियों को दूर करके सामग्री को प्रकाशन योग्य बनाया जाना जरूरी है।
भाषा, वर्तनी, व्याकरण और शैली पर विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रचलित भाषा का प्रयोग हो।
लेखन में सहज प्रवाह के लिए तारतम्यता को बनाए रखना जरूरी है।
रेडियो –
प्रश्न 5.
रेडियो समाचार – लेखन की बुनियादी बातों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
रेडियो एक श्रव्य माध्यम है। इसमें पुनः सुनने की सुविधा नहीं होती।
रेडियो – समाचार लेखन की बुनियादी बातें : रेडियो के लिए समाचार कॉपी तैयार करते हुए इन बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए :
1. साफ-सुथरी टाइप्ड कॉपी : रेडियो पर समाचार वाचक के लिए ऐसी कॉपी तैयार की जानी चाहिए जिसे पढ़ने में उसे कोई दिक्कत न हो। यदि समाचार कॉपी साफ-सुथरी और टाइप्ड नहीं होगी तो वाचक पढ़ते समय अटकेगा या गलत पढ़ सकता है। इससे श्रोताओं का ध्यान बँटता है और वे भ्रमित हो जाते हैं। इसके लिए :
समाचार कॉपी को कंप्यूटर पर ट्रिपल स्पेस में टाइप किया जाना चाहिए।
कॉपी के दोनों ओर पर्याप्त हाशिया छोड़ना चाहिए।
एक लाइन में अधिकतम 12-13 शब्द होने चाहिए।
पंक्ति के आखिर में कोई शब्द विभाजित नहीं होना चाहिए।
पृष्ठ के आखिर में लाइन अधूरी नहीं होनी चाहिए।
समाचार कॉपी में जटिल और उच्चारण में कठिन शब्द, संक्षिप्ताक्षर, अंक आदि नहीं लिखने चाहिए। इनके पढ़ने में जबान लड़खड़ा सकती है।
2. डेडलाइन, संदर्भ और संक्षिप्ताक्षर का प्रयोग : रेडियो में अखबारों की तरह डेडलाइन अलग से नहीं होती, बल्कि समाचार से ही गुँथी होती है। अखबार तो दिन में एक बार ही छपकर आता है जबकि रेडियो पर समाचार चौबीसों घंटे चलते रहते हैं। रेडियो समाचार में आज सुबह, आज दोपहर, आज शाम, आज तड़के आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह ……. बैठक कल होगी या …… बैठक कल हुई ……. का प्रयोग किया जाता है।
संक्षिप्ताक्षर के प्रयोग में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। अच्छी बात तो यह है कि इनके प्रयोग से बचा जाए। यदि बहुत आवश्यक ही हो तो समाचार से शुरू में पहले उसे पूरा दिया जाए, फिर सक्षिप्ताक्षर का प्रयोग किया जाए। इसमें संक्षिप्ताक्षर की लोकप्रियता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, जैसे : यूएनओ, यूनिसेफ, सार्क, आईसीआईसीआई बैंक।
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प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय (K-12)
सरकार
शब्दकोश और विश्वकोश
Communication
इंटरनेट और टेलीकॉम
प्रश्न 6.
रेडियो माध्यम की तीन खूबियों और तीन खामियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
खूबियाँ :
श्रव्य माध्यम।
मूलत: एक रेखीय माध्यम। इसमें शब्दों और ध्वनियों का महत्त्व होता है।
निरक्षरों के लिए उपयोगी।
खामियाँ :
पीछे लौटकर सुनने की सुविधा नहीं।
बुलेटिन के प्रसारण समय का इंतजार करना।
संक्षिप्ताक्षरों के प्रयोग में सावधानी।
टेलीविजन –
प्रश्न 7.
टेलीविजन कैसा माध्यम है ?
उत्तर :
टेलीविजन में दृश्यों का महत्त्व सबसे ज्यादा है। यह स्पष्ट है कि टेलीविज़न देखने और सुनने का माध्यम है। इसके लिए समाचार लिखते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि शब्द परदे पर दिखने वाले दृश्य के अनुकूल हों।
टेलीविज़न माध्यम अखबार और रेडियो दोनों माध्यमों से काफी अलग है।
टेलीविज़न के लेखन में कम से कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा खबर बताने की कला का इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए टी.वी. के लिए खबर
लिखने की बुनियादी शर्त दृश्य के साथ लेखन है।
यदि दृश्य आकाश के हैं तो बातें भी आकाश की होंगी, न कि समुद्र की।
प्रश्न 8.
दूरदर्शन पर समाचार देते समय किन-किन बातों पर ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर :
दूरदर्शन के समाचार वाचक में निम्नलिखित गुण होने चाहिए –
उसकी बोली में स्पष्टता हो।
उसे दृश्यों के साथ तालमेल बिठाना आना चाहिए !
सहजता के साथ समाचार पढ़ने चाहिए।
विषयानुकूल मुख-मुद्रा बनानी चाहिए।
अपनी वेशभूषा पर भी ध्यान देना चाहिए।
प्रश्न 9.
टी.वी. खबरों के कौन-कौन से चरण हैं ?
उत्तर :
टी.वी. खबरों के विभिन्न चरण-
फ्लैश या ब्रेकिंग न्यूज
फोन-इन
एंकर बाइट
एंकर पैकेज
ड्राई एंकर
एंकर विजुअल
लाइव
प्रश्न 10.
रेडियो और टेलीविजन के समाचारों की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
रेडियो और टेलीविजन के समाचारों की भाषा-शैली : इनके लेखन का कोई एक निश्चित फार्मूला नहीं हो सकता। प्रयोगशीलता भाषा को समृद्ध करती है और माध्यम को भी।
रेडियो और टी.वी. आम लोगों का माध्यम है। इनके प्रयोग करने वाले श्रोता दर्शक निरक्षर और साक्षर, संपन्न वर्ग के लोग तथा किसान-मजदूर सभी हैं। इन लोगों तक पहुँचने का माध्यम भाषा है अतः भाषा ऐसी होनी चाहिए जो सभी को आसानी से समझ में आ जाए, पर भाषा के स्तर के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए। अतः इन बातों को ध्यान में रखें
बोलचाल की भाषा का ही इस्तेमाल रेडियो, टी.वी. के समाचारों में करें।
वाक्य छोटे, सीधे और स्पष्ट रूप से लिखे जाएँ।
खबर की प्रमुख बातों को ठीक से समझने की कोशिश करें।
सरल, संप्रेषणीय एवं प्रभावी भाषा लिखें। इसकी जाँच के लिए समाचार लिखने के बाद उसे बोल-बोलकर पढ़ें।
भाषा में प्रवाह होना चाहिए।
प्रश्न 11.
रेडियो और टी.वी. समाचारों की भाषा-शैली में क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिएँ ?
उत्तर :
रेडियो और टी.वी. समाचार में भाषा और शैली के स्तर पर काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे अनेक शब्द हैं जिनका अखबार में धड़ल्ले से प्रयोग होता है पर रेडियो और टी.वी. में उनके प्रयोग से बचा जाता है। जैसे :
निम्नलिखित उपरोक्त, अधोहस्ताक्षरित और क्रमांक आदि शब्दों का प्रयोग टी.वी. रेडियो में मना है। ‘द्वारा’ शब्द के इस्तेमाल से भी बचा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए :
‘निरीक्षक द्वारा, नकल करते हुए दो छात्रों को पकड़ लिया।’
इसके स्थान पर :
‘निरीक्षक ने दो छात्रों को नकल करते हुए पकड़ लिया।’
अधिक स्पष्ट है।
तथा, एवं, अथवा, व, किंतु, परंतु, यथा आदि शब्दों के प्रयोग से बचा जाना चाहिए।
गैर जरूरी विशेषणों, सामासिक और तत्सम शब्दों, अतिरंजित उपमाओं आदि से भी बचना चाहिए। इनसे भाषा बोझिल बनती है।
जहाँ आवश्यक हो वहाँ मुहावरों का प्रयोग करना चाहिए। इससे भाषा आकर्षक और प्रभावी बनती है।
वाक्य छोटे हों।
एक वाक्य में एक ही बात कहने का धीरज हो।
वाक्यों में तारतम्य हो।
ऐसे शब्द प्रयोग किए जाएँ जिनका उच्चारण सहजता से हो सके।
जैसे – क्रय-विक्रय की जगह खरीद-बिक्री, ‘स्थानांतरण’ की जगह ‘तबादला’।
अधिक विद्वता दिखाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
इंटरनेट –
प्रश्न 12.
इंटरनेट क्या है ?
उत्तर :
इंटरनेट सिर्फ एक टूल या औजार है।
इसमें सूचना, मनोरंजन, ज्ञान और व्यक्तिगत या सार्वजनिक संवादों के आदान-प्रदान का माध्यम है।
जहाँ यह सूचनाओं के आदान-प्रदान का बेहतरीन साधन है, वहीं यह अश्लीलता, दुष्प्रचार और गंदगी फैलाने का माध्यम है।
प्रश्न 13.
इंटरनेट पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
इंटरनेट पत्रकारिता को ऑनलाइन पत्रकारिता, साइबर पत्रकारिता या वेब पत्रकारिता भी कहा जाता है। जिनके पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है उन्हें कागज पर छपे अखबार अच्छे नहीं लगते। उन्हें हर घंटे दो घंटे में खुद को अपडेट करने की लत लग जाती है। भारत में कंप्यूटर इस्तेमाल करने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है अतः इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या भी हर साल 50-55 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इंटरनेट पर आप देश – विदेश की खबरें एक झटके में पढ़ लेते हैं। इसमें आप दुनियाभर की चर्चाओं – परिचर्चाओं में भाग ले सकते हैं और अखबारों की पुरानी फाइलें खंगाल सकते हैं।
इंटरनेट पर अखबारों का प्रकाशन या खबरों का आदान-प्रदान ही वास्तव में इंटरनेट पत्रकारिता है।
इंटरनेट पर यदि हम किसी भी रूप में खबरों, लेखों, चर्चा-परिचर्चाओं, बहसों, फीचर, झलकियों, डायरियों के जरिए अपने समय की धड़कनों को
महसूस करने और दर्ज करने का काम करते हैं तो वही इंटरनेट पत्रकारिता है।
आज प्रायः सभी प्रमुख अखबार पूरे के पूरे इंटरनेट पर उपलब्ध हैं।
कई प्रकाशन समूहों ने खुद को इंटरनेट पत्रकारिता से जोड़ लिया है।
इंटरनेट पत्रकारिता का तरीका थोड़ा भिन्न है।
प्रश्न 14.
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CBSE Class 12 Hindi Elective Rachana पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम
संचार –
प्रश्न 1.
संचार क्या है ? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर :
दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान ही संचार है। संचार के बिना जीवन संभव नहीं है।
संचार के कई प्रकार हैं, जिनमें मौखिक और अमौखिक संचार के अलावा निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं :
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अंत: वैयक्तिक संचार
अंतर वैयक्तिक संचार
समूह संचार
जनसंचार
प्रश्न 2.
संचार के प्रमुख तत्त्व बताइए।
उत्तर :
संचास-प्रक्रिया में शामिल प्रमुख तत्त्व ये हैं :
स्रोत – संचार-प्रक्रिया का प्रारंभ स्रोत या संचारक से होता है।
भाषा – बातचीत या संदेश भेजने के लिए भाषा का सहारा लिया जाता है।
संदेश – संचार-प्रक्रिया में अलग चरण संदेश होता है। संदेश स्पष्ट होना चाहिए।
माध्यम (चैनल) – संदेश टेलीफोन, समाचार-पत्र, रेडियो, टी.वी., इंटरनेट आदि माध्यमों के जरिए प्राप्तकर्ता तक पहुँचाया जाता है।
प्राप्तकर्ता (रिसीवर) – प्राप्तकर्ता प्राप्त संदेश का कूटवाचन यानी डिकोडिंग करता है।
फीडबैक – प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया को फीडबैक कहा जाता है।
संचार-प्रक्रिया में कई बाधाएँ आती हैं। इन्हें शोर (नॉयज) कहा जाता है। संचार-प्रक्रिया से शोर को हटाना जरूरी है।
CBSE Class 12 Hindi Elective रचना पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 1
जनसंचार –
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प्रश्न 3.
जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
संचार का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रकार है-जनसंचार अर्थात् Mass Communication।
जब हम व्यक्तियों के समूह के साथ प्रत्यक्ष संवाद की बजाय किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज के विशाल वर्ग के साथ संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं तब इसे जनसंचार कहा जाता है। इसमें संदेश को यांत्रिक माध्यम से बहुगुणित किया जाता है।
प्रश्न 4.
जनसंचार की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
जनसंचार में ‘फीडबैक’ तुरंत प्राप्त नहीं होता।
इसका दायरा व्यापक होता है।
जनसंचार के संदेश सबके लिए होते हैं।
जनसंचार माध्यम में कई द्वारपाल (गेटकीपर) होते हैं।
द्वारपाल वह व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह होता है जो प्रसारित की जाने वाली सामग्री को नियंत्रित और निर्धारित करता है।
प्रश्न 5.
जनसंचार के प्रमुख कार्य क्या हैं ?
उत्तर :
जनसंचार के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
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सूचना देना
जनता को शिक्षित कर जागरुक बनाना।
मनोरंजन करना।
एजेंडा तय करना (देश और समाज के लिए)
निगरानी करना (सरकार और संस्थाओं के कामकाज की)
विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना।
प्रश्न 6.
वर्तमान में जनसंचार के कौन-कौन से रूप प्रचलित हैं ?
उत्तर :
वर्तमान में जनसंचार के निम्नलिखित रूप प्रचलित हैं –
समाचार पत्र (प्रिंट मीडिया) पत्रकारिता
रेडियो (ध्वनि माध्यम)
टेलीविजन (सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम)
सिनेमा
इंटरनेट (जनसंचार सर्वथा नया और लोकप्रिय माध्यम)
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प्रश्न 7.
इंटरनेट क्या है ? इसकी खामियाँ बताइए।
उत्तर:
इंटरनेट एक अंतरक्रियात्मक माध्यम है। इसमें आप मूकदर्शक नहीं हैं। इसके माध्यम से आप सवाल-जवाब, बहस-मुबाहिसों में भाग ले सकते हैं, चैट कर सकते हैं, ब्लॉग बनाकर किसी बहस के सूत्रधार बन सकते हैं। इसमें प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन, किताब आदि के समस्त गुण मौजूद हैं। इसमें करोड़ों पन्नों की सामग्री भर दी गई है। यह सूचनाओं का विश्वव्यापी जाल है। इसकी रफ्तार का कोई जवाब नहीं है।
खामियाँ :
इसमें लाखों अश्लील पन्ने भर दिए गए हैं जिनका छोटे बच्चों के कोमल मन पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
इंटरनेट का दुरुपयोग किया जा सकता है।
2. पत्रकारिता
प्रश्न 1.
पत्रकारिता क्या है ? इसके कितने प्रकार हैं ?
उत्तर :
पत्रकारिता का संबंध सूचनाओं को संकलित और संपादित कर पाठकों तक पहुँचाना है।
समाचारों के संपादन में तथ्यपरकता, वस्तुपरकता, निष्पक्षता और संतुलन जैसे सिद्धांतों का ध्यान रखना पड़ता है लेकिन पत्रकारिता का संबंध केवल
समाचारों तक सीमित नहीं है, इसमें संपादकीय, लेख, कार्टून और फोटो भी शामिल हैं।
पत्रकारिता के प्रमुख प्रकार ये हैं :
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खोजपरक पत्रकारिता
वॉच डॉग पत्रकारिता
एडवोकेसी पत्रकारिता
विशेषीकृत पत्रकारिता
वैकल्पिक पत्रकारिता
प्रश्न 2.
पीत पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
समाचार मीडिया में हमेशा से ही सनसनीखेज या पीत पत्रकारिता और पेज थ्री पत्रकारिता की धाराएँ मौजूद रही हैं। पीत पत्रकारिता का प्रयोग किसी व्यक्ति के चरित्र हनन के लिए भी किया जाता है। इसे पत्रकारिता का घटिया रूप माना जाता है।
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प्रश्न 3.
पत्रकारिता के कौन-कौन से सिद्धांत हैं ?
उत्तर :
पत्रकारिता के सिद्धांत निम्नलिखित हैं :
तथ्यों की शुद्धता (Accuracy)
निष्पक्षता (Fairness)
स्रोत (Source)
वस्तुपरकता (Objectivity)
संतुलन (Balance)
प्रश्न 4.
पत्रकारिता के विविध आयामों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर :
पत्रकारिता के विविध आयाम इस प्रकार हैं :
संपादकीय – संपादकीय पृष्ठ को समाचार का महत्त्वपूर्ण पृष्ठ माना जाता है। इस पृष्ठ पर संपादक विभिन्न घटनाओं पर अपनी राय प्रकट करता है। इसे अखबार की आवाज माना जाता है।
फोटो पत्रकारिता – फोटो द्वारा की गई टिप्पणियों का असर व्यापक होता है।
कार्टून कोना – कार्टूनों के माध्यम से की गई सटीक टिप्पणियाँ पाठकों को छूती हैं।
रेखांकन/कार्टोग्राफ – ये समाचारों को न केवल रोचक बनाते हैं बल्कि टिप्पणी भी करते हैं।
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प्रश्न 5.
खोजपरक पत्रकारिता क्या होती है ?
उत्तर :
खोजपरक पत्रकारिता में गहराई से छानबीन करके ऐसे तथ्यों और सूचनाओं को सामने लाने की कोशिश की जाती है जिन्हें दबाने या छिपाने का प्रयास किया गया होता है। आमतौर पर खोजी पत्रकारिता सार्वजनिक महत्त्व के मामलों में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और गड़बड़ियों को उजागर करने का माध्यम है। खोजी पत्रकारिता का ही एक रूप ‘स्टिंग ऑपरेशन’ है।
प्रश्न 6.
वॉचडॉग पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
लोकतंत्र में पत्रकारिता और समाचार मीडिया का मुख्य उत्तरदायित्व सरकार के कामकाज पर निगरानी रखना है। यदि कहीं कोई गड़बड़ी हो तो उसका पर्दाफाश करना ही वॉचडॉग पत्रकारिता है। इसका दूसरा छोर सरकारी सूत्रों पर आधारित पत्रकारिता है।
3. विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
प्रश्न 1.
प्रमुख जनसंचार माध्यम कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
प्रमुख जनसंचार माध्यम ये हैं :
प्रिंट मीडिया (अखबार)
टी.वी.
रेडियो इंटरनेट
प्रश्न 2.
प्रिंट (मुद्रित) माध्यम की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
मुद्रित माध्यमों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
छपे शब्दों में स्थायित्व होता है।
इन्हें आप आराम से और धीरे-धीरे पढ़ सकते हैं।
इन्हें पढ़ते हुए उन पर सोच सकते हैं।
समझ न आने पर दोबारा पढ़ सकते हैं।
किसी भी समाचार या रिपोर्ट को पहले या पीछे पढ़ सकते हैं।
इसमें किसी भी क्रम में पढ़ने की बाध्यता नहीं है।
इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और उसे संदर्भ की तरह प्रयोग कर सकते हैं।
यह लिखित भाषा का विस्तार है। इसमें लिखित भाषा की सभी विशेषताएँ शामिल हैं।
लिखित और मौखिक भाषा में सबसे बड़ा अंतर यह है कि लिखित भाषा अनुशासन की माँग करती है। लिखते समय भाषा, व्याकरण, वर्तनी और शब्दों के उपयुक्त इस्तेमाल का ध्यान रखना पड़ता है। इसे प्रचलित भाषा में लिखना पड़ता है ताकि अधिक से अधिक लोग इसे समझ सकें।
मुद्रित माध्यमों की एक अन्य प्रमुख विशेषता यह है कि यह चिंतन, विचार और विश्लेषण का माध्यम है। इसमें गंभीर और गूढ़ बातें लिखी जा सकती हैं, क्योंकि पाठक के पास इन्हें पढ़ने, समझने और सोचने का काफी समय होता है। मुद्रित माध्यम का पाठक साक्षर एवं विशेष योग्यता वाला व्यक्ति होता है।
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मानकीकृत और प्रवेश परीक्षाएं
सामाजिक विज्ञान
अनुवाद टूल और संसाधन
संचार
पत्रकारिता और समाचार उद्योग
प्रश्न 3.
मुद्रित माध्यम की कमियाँ क्या हैं ?
उत्तर :
मुद्रित माध्यम की कमियाँ ये हैं :
यह माध्यम केवल साक्षरों के लिए है। निरक्षरों के लिए मुद्रित माध्यम किसी काम का नहीं है।
इस माध्यम में लिखने वालों को अपने पाठकों के भाषा – ज्ञान के साथ-साथ उनकी योग्यता का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है।
मुद्रित माध्यमों की एक सीमा है। वे रेडियो, टी.वी. या इंटरनेट की तरह तुरंत घटी घटनाओं को संचालित नहीं कर सकते। समाचारपत्र एक निश्चित अवधि पर प्रकाशित होते हैं, जैसे : अखबार 24 घंटे बाद ही छपता है।
अखबार या पत्रिका में समाचारों या रिपोर्ट के प्रकाशन की एक निश्चित समय-सीमा होती है जिसे ‘डेडलाइन’ कहा जाता है। इसके बाद कोई सामग्री प्रकाशन के लिए स्वीकार नहीं की जाती।
प्रश्न 4.
मुद्रित माध्यम में किन-किन बातों पर ध्यान देना अपेक्षित है ?
उत्तर :
मुद्रित (प्रिंट) माध्यम में निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना अपेक्षित है :
मुद्रित माध्यमों में लेखक को जगह (स्पेस) का पूरा ध्यान रखना चाहिए। समाचार, रिपोर्ट या फीचर की निर्धारित शब्द – सीमा को ध्यान में रखना जरूरी है। अखबार या पत्रिका में जगह सीमित होती है। महत्त्व और जगह की उपलब्धता को ध्यान में रखना चाहिए।
मुद्रित माध्यम के पत्रकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि छपने से पहले आलेख की सभी अशुद्धियों को दूर कर दिया गया हो। प्रकाशन के बाद गलती या अशुद्धि वहीं चिपक जाती है तथा उसका संशोधन अगले दिन के अखबार में ही हो पाता है।
संपादक के साथ एक पूरी संपादकीय टीम भी होती है। अतः अशुद्धियों को दूर करके सामग्री को प्रकाशन योग्य बनाया जाना जरूरी है।
भाषा, वर्तनी, व्याकरण और शैली पर विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रचलित भाषा का प्रयोग हो।
लेखन में सहज प्रवाह के लिए तारतम्यता को बनाए रखना जरूरी है।
रेडियो –
प्रश्न 5.
रेडियो समाचार – लेखन की बुनियादी बातों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
रेडियो एक श्रव्य माध्यम है। इसमें पुनः सुनने की सुविधा नहीं होती।
रेडियो – समाचार लेखन की बुनियादी बातें : रेडियो के लिए समाचार कॉपी तैयार करते हुए इन बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए :
1. साफ-सुथरी टाइप्ड कॉपी : रेडियो पर समाचार वाचक के लिए ऐसी कॉपी तैयार की जानी चाहिए जिसे पढ़ने में उसे कोई दिक्कत न हो। यदि समाचार कॉपी साफ-सुथरी और टाइप्ड नहीं होगी तो वाचक पढ़ते समय अटकेगा या गलत पढ़ सकता है। इससे श्रोताओं का ध्यान बँटता है और वे भ्रमित हो जाते हैं। इसके लिए :
समाचार कॉपी को कंप्यूटर पर ट्रिपल स्पेस में टाइप किया जाना चाहिए।
कॉपी के दोनों ओर पर्याप्त हाशिया छोड़ना चाहिए।
एक लाइन में अधिकतम 12-13 शब्द होने चाहिए।
पंक्ति के आखिर में कोई शब्द विभाजित नहीं होना चाहिए।
पृष्ठ के आखिर में लाइन अधूरी नहीं होनी चाहिए।
समाचार कॉपी में जटिल और उच्चारण में कठिन शब्द, संक्षिप्ताक्षर, अंक आदि नहीं लिखने चाहिए। इनके पढ़ने में जबान लड़खड़ा सकती है।
2. डेडलाइन, संदर्भ और संक्षिप्ताक्षर का प्रयोग : रेडियो में अखबारों की तरह डेडलाइन अलग से नहीं होती, बल्कि समाचार से ही गुँथी होती है। अखबार तो दिन में एक बार ही छपकर आता है जबकि रेडियो पर समाचार चौबीसों घंटे चलते रहते हैं। रेडियो समाचार में आज सुबह, आज दोपहर, आज शाम, आज तड़के आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह ……. बैठक कल होगी या …… बैठक कल हुई ……. का प्रयोग किया जाता है।
संक्षिप्ताक्षर के प्रयोग में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। अच्छी बात तो यह है कि इनके प्रयोग से बचा जाए। यदि बहुत आवश्यक ही हो तो समाचार से शुरू में पहले उसे पूरा दिया जाए, फिर सक्षिप्ताक्षर का प्रयोग किया जाए। इसमें संक्षिप्ताक्षर की लोकप्रियता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, जैसे : यूएनओ, यूनिसेफ, सार्क, आईसीआईसीआई बैंक।
ज़्यादा जानें
प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय (K-12)
सरकार
शब्दकोश और विश्वकोश
Communication
इंटरनेट और टेलीकॉम
प्रश्न 6.
रेडियो माध्यम की तीन खूबियों और तीन खामियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
खूबियाँ :
श्रव्य माध्यम।
मूलत: एक रेखीय माध्यम। इसमें शब्दों और ध्वनियों का महत्त्व होता है।
निरक्षरों के लिए उपयोगी।
खामियाँ :
पीछे लौटकर सुनने की सुविधा नहीं।
बुलेटिन के प्रसारण समय का इंतजार करना।
संक्षिप्ताक्षरों के प्रयोग में सावधानी।
टेलीविजन –
प्रश्न 7.
टेलीविजन कैसा माध्यम है ?
उत्तर :
टेलीविजन में दृश्यों का महत्त्व सबसे ज्यादा है। यह स्पष्ट है कि टेलीविज़न देखने और सुनने का माध्यम है। इसके लिए समाचार लिखते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि शब्द परदे पर दिखने वाले दृश्य के अनुकूल हों।
टेलीविज़न माध्यम अखबार और रेडियो दोनों माध्यमों से काफी अलग है।
टेलीविज़न के लेखन में कम से कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा खबर बताने की कला का इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए टी.वी. के लिए खबर
लिखने की बुनियादी शर्त दृश्य के साथ लेखन है।
यदि दृश्य आकाश के हैं तो बातें भी आकाश की होंगी, न कि समुद्र की।
प्रश्न 8.
दूरदर्शन पर समाचार देते समय किन-किन बातों पर ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर :
दूरदर्शन के समाचार वाचक में निम्नलिखित गुण होने चाहिए –
उसकी बोली में स्पष्टता हो।
उसे दृश्यों के साथ तालमेल बिठाना आना चाहिए !
सहजता के साथ समाचार पढ़ने चाहिए।
विषयानुकूल मुख-मुद्रा बनानी चाहिए।
अपनी वेशभूषा पर भी ध्यान देना चाहिए।
प्रश्न 9.
टी.वी. खबरों के कौन-कौन से चरण हैं ?
उत्तर :
टी.वी. खबरों के विभिन्न चरण-
फ्लैश या ब्रेकिंग न्यूज
फोन-इन
एंकर बाइट
एंकर पैकेज
ड्राई एंकर
एंकर विजुअल
लाइव
प्रश्न 10.
रेडियो और टेलीविजन के समाचारों की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
रेडियो और टेलीविजन के समाचारों की भाषा-शैली : इनके लेखन का कोई एक निश्चित फार्मूला नहीं हो सकता। प्रयोगशीलता भाषा को समृद्ध करती है और माध्यम को भी।
रेडियो और टी.वी. आम लोगों का माध्यम है। इनके प्रयोग करने वाले श्रोता दर्शक निरक्षर और साक्षर, संपन्न वर्ग के लोग तथा किसान-मजदूर सभी हैं। इन लोगों तक पहुँचने का माध्यम भाषा है अतः भाषा ऐसी होनी चाहिए जो सभी को आसानी से समझ में आ जाए, पर भाषा के स्तर के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए। अतः इन बातों को ध्यान में रखें
बोलचाल की भाषा का ही इस्तेमाल रेडियो, टी.वी. के समाचारों में करें।
वाक्य छोटे, सीधे और स्पष्ट रूप से लिखे जाएँ।
खबर की प्रमुख बातों को ठीक से समझने की कोशिश करें।
सरल, संप्रेषणीय एवं प्रभावी भाषा लिखें। इसकी जाँच के लिए समाचार लिखने के बाद उसे बोल-बोलकर पढ़ें।
भाषा में प्रवाह होना चाहिए।
प्रश्न 11.
रेडियो और टी.वी. समाचारों की भाषा-शैली में क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिएँ ?
उत्तर :
रेडियो और टी.वी. समाचार में भाषा और शैली के स्तर पर काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे अनेक शब्द हैं जिनका अखबार में धड़ल्ले से प्रयोग होता है पर रेडियो और टी.वी. में उनके प्रयोग से बचा जाता है। जैसे :
निम्नलिखित उपरोक्त, अधोहस्ताक्षरित और क्रमांक आदि शब्दों का प्रयोग टी.वी. रेडियो में मना है। ‘द्वारा’ शब्द के इस्तेमाल से भी बचा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए :
‘निरीक्षक द्वारा, नकल करते हुए दो छात्रों को पकड़ लिया।’
इसके स्थान पर :
‘निरीक्षक ने दो छात्रों को नकल करते हुए पकड़ लिया।’
अधिक स्पष्ट है।
तथा, एवं, अथवा, व, किंतु, परंतु, यथा आदि शब्दों के प्रयोग से बचा जाना चाहिए।
गैर जरूरी विशेषणों, सामासिक और तत्सम शब्दों, अतिरंजित उपमाओं आदि से भी बचना चाहिए। इनसे भाषा बोझिल बनती है।
जहाँ आवश्यक हो वहाँ मुहावरों का प्रयोग करना चाहिए। इससे भाषा आकर्षक और प्रभावी बनती है।
वाक्य छोटे हों।
एक वाक्य में एक ही बात कहने का धीरज हो।
वाक्यों में तारतम्य हो।
ऐसे शब्द प्रयोग किए जाएँ जिनका उच्चारण सहजता से हो सके।
जैसे – क्रय-विक्रय की जगह खरीद-बिक्री, ‘स्थानांतरण’ की जगह ‘तबादला’।
अधिक विद्वता दिखाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
इंटरनेट –
प्रश्न 12.
इंटरनेट क्या है ?
उत्तर :
इंटरनेट सिर्फ एक टूल या औजार है।
इसमें सूचना, मनोरंजन, ज्ञान और व्यक्तिगत या सार्वजनिक संवादों के आदान-प्रदान का माध्यम है।
जहाँ यह सूचनाओं के आदान-प्रदान का बेहतरीन साधन है, वहीं यह अश्लीलता, दुष्प्रचार और गंदगी फैलाने का माध्यम है।
प्रश्न 13.
इंटरनेट पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
इंटरनेट पत्रकारिता को ऑनलाइन पत्रकारिता, साइबर पत्रकारिता या वेब पत्रकारिता भी कहा जाता है। जिनके पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है उन्हें कागज पर छपे अखबार अच्छे नहीं लगते। उन्हें हर घंटे दो घंटे में खुद को अपडेट करने की लत लग जाती है। भारत में कंप्यूटर इस्तेमाल करने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है अतः इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या भी हर साल 50-55 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इंटरनेट पर आप देश – विदेश की खबरें एक झटके में पढ़ लेते हैं। इसमें आप दुनियाभर की चर्चाओं – परिचर्चाओं में भाग ले सकते हैं और अखबारों की पुरानी फाइलें खंगाल सकते हैं।
इंटरनेट पर अखबारों का प्रकाशन या खबरों का आदान-प्रदान ही वास्तव में इंटरनेट पत्रकारिता है।
इंटरनेट पर यदि हम किसी भी रूप में खबरों, लेखों, चर्चा-परिचर्चाओं, बहसों, फीचर, झलकियों, डायरियों के जरिए अपने समय की धड़कनों को
महसूस करने और दर्ज करने का काम करते हैं तो वही इंटरनेट पत्रकारिता है।
आज प्रायः सभी प्रमुख अखबार पूरे के पूरे इंटरनेट पर उपलब्ध हैं।
कई प्रकाशन समूहों ने खुद को इंटरनेट पत्रकारिता से जोड़ लिया है।
इंटरनेट पत्रकारिता का तरीका थोड़ा भिन्न है।
प्रश्न 14.
इंटरनेट पत्रकारिता के उपयोग कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
इंटरनेट के उपयोग –
1. इंटरनेट का एक माध्यम या औजार के तौर पर इस्तेमाल यानी खबरों के संप्रेषण के लिए इंटरनेट का उपयोग।
2. रिपोर्टर अपनी खबर को एक जगह से दूसरी जगह तक ई-मेल के जरिए भेजने और समाचारों के संकलन, खबरों के सत्यापन और पुष्टिकरण में भी इसका इस्तेमाल करता है।
रिसर्च या शोध का काम तो इंटरनेट ने बेहद आसान कर दिया है।
पहले खबरों की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए ढेर सारी अखबारी कतरनों की फाइलों को ढूढ़ना पड़ता था। अब चंद मिनटों में इंटरनेट बिश्वव्यापी जाल से पृष्ठभूमि खोजी जा सकती है।
अब एक सेकंड में 56 किलोबाइट यानी लगभग 70 हजार शब्द भेजे जा सकते हैं।
प्रश्न 15.
इंटरनेट पत्रकारिता के इतिहास पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर:
इंटरनेट पत्रकारिता का इतिहास :
इस प्रकार की पत्रकारिता का पहला दौर 1982 से 1992 तक का था।
दूसरा दौर 1993 से 2001 तक का था।
इस समय इंटरनेट पत्रकारिता का तीसरा दौर चल रहा है। इसमें 2002 से अब तक की पत्रकारिता आती है।
पहले चरण में इंटरनेट खुद प्रयोग के धरातल पर था। तब ‘एओएल’ यानी अमेरिका ऑनलाइन जैसी चर्चित कंपनियाँ सामने आईं। यह प्रयोग का दौर था।
1983 से 2002 के मध्य सच्चे अर्थों में इंटरनेट पत्रकारिता की शुरुआत हुई। इस बीच :
इंटरनेट का तेजी से विकास हुआ।
नई वेब भाषा ‘एचटीएमएल’ (हाइपर टेक्स्ट माकर्डअप लैंग्वेज) आई।
ई-मेल आया।
इंटरनेट एक्सप्लोरर और नेटस्केप नाम के ब्राउजर आए।
‘ब्राउजर’ वह औजार है जिसके जरिए विश्वव्यापी जाल (इंटरनेट) में गोते लगाए जा सकते हैं।
लगभग सभी बड़े अखबार और टेलीविजन समूह इस विश्वव्यापी जाल में आए।
प्रश्न 16.
भारत में इंटरनेट पत्रकारिता की स्थिति क्या है ?
उत्तर :
भारत में इंटरनेट पत्रकारिता का अभी दूसरा दौर चल रहा है। यह दौर 2003 में शुरू हुआ था।
भारत में इंटरनेट पत्रकारिता की दृष्टि से ये साइटें बेहतर हैं :
द टाइम्स ऑफ इंडिया
हिंदू
एन.डी.टी.वी.
आउटलुक
हिंदुस्तान टाइम्स
ट्रिब्यून
आज तक
आई बी एन
इंडियन एक्सप्रेस
स्टेट्समैन
जी – न्यूज
ये साइटें नियमित रूप से अपडेट होती हैं :
हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, आउटलुक, इंडियन एक्सप्रेस, एन. डी. टी. वी., आज तक जी-न्यूज आदि।
भारत में सच्चे अर्थों में यदि कोई वेब पत्रकारिता कर रहा है तो वह ‘रीडिफ डॉट काम’, ‘इंडिया इंफोलाइन’ व ‘सीफी’ जैसी साइटें हैं।
प्रश्न 17.
हिंदी नेट संसार पर प्रकाश डालिए।
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CBSE Class 12 Hindi Elective रचना पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम
February 15, 2023 by Bhagya
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CBSE Class 12 Hindi Elective Rachana पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम
संचार –
प्रश्न 1.
संचार क्या है ? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर :
दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान ही संचार है। संचार के बिना जीवन संभव नहीं है।
संचार के कई प्रकार हैं, जिनमें मौखिक और अमौखिक संचार के अलावा निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं :
ADVERTISEMENT
अंत: वैयक्तिक संचार
अंतर वैयक्तिक संचार
समूह संचार
जनसंचार
प्रश्न 2.
संचार के प्रमुख तत्त्व बताइए।
उत्तर :
संचास-प्रक्रिया में शामिल प्रमुख तत्त्व ये हैं :
स्रोत – संचार-प्रक्रिया का प्रारंभ स्रोत या संचारक से होता है।
भाषा – बातचीत या संदेश भेजने के लिए भाषा का सहारा लिया जाता है।
संदेश – संचार-प्रक्रिया में अलग चरण संदेश होता है। संदेश स्पष्ट होना चाहिए।
माध्यम (चैनल) – संदेश टेलीफोन, समाचार-पत्र, रेडियो, टी.वी., इंटरनेट आदि माध्यमों के जरिए प्राप्तकर्ता तक पहुँचाया जाता है।
प्राप्तकर्ता (रिसीवर) – प्राप्तकर्ता प्राप्त संदेश का कूटवाचन यानी डिकोडिंग करता है।
फीडबैक – प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया को फीडबैक कहा जाता है।
संचार-प्रक्रिया में कई बाधाएँ आती हैं। इन्हें शोर (नॉयज) कहा जाता है। संचार-प्रक्रिया से शोर को हटाना जरूरी है।
CBSE Class 12 Hindi Elective रचना पत्रकारीय लेखन और उसके विविध आयाम 1
जनसंचार –
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प्रश्न 3.
जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
संचार का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रकार है-जनसंचार अर्थात् Mass Communication।
जब हम व्यक्तियों के समूह के साथ प्रत्यक्ष संवाद की बजाय किसी तकनीकी या यांत्रिक माध्यम के जरिए समाज के विशाल वर्ग के साथ संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं तब इसे जनसंचार कहा जाता है। इसमें संदेश को यांत्रिक माध्यम से बहुगुणित किया जाता है।
प्रश्न 4.
जनसंचार की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
जनसंचार में ‘फीडबैक’ तुरंत प्राप्त नहीं होता।
इसका दायरा व्यापक होता है।
जनसंचार के संदेश सबके लिए होते हैं।
जनसंचार माध्यम में कई द्वारपाल (गेटकीपर) होते हैं।
द्वारपाल वह व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह होता है जो प्रसारित की जाने वाली सामग्री को नियंत्रित और निर्धारित करता है।
प्रश्न 5.
जनसंचार के प्रमुख कार्य क्या हैं ?
उत्तर :
जनसंचार के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –
ADVERTISEMENT
सूचना देना
जनता को शिक्षित कर जागरुक बनाना।
मनोरंजन करना।
एजेंडा तय करना (देश और समाज के लिए)
निगरानी करना (सरकार और संस्थाओं के कामकाज की)
विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना।
प्रश्न 6.
वर्तमान में जनसंचार के कौन-कौन से रूप प्रचलित हैं ?
उत्तर :
वर्तमान में जनसंचार के निम्नलिखित रूप प्रचलित हैं –
समाचार पत्र (प्रिंट मीडिया) पत्रकारिता
रेडियो (ध्वनि माध्यम)
टेलीविजन (सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम)
सिनेमा
इंटरनेट (जनसंचार सर्वथा नया और लोकप्रिय माध्यम)
ADVERTISEMENT
प्रश्न 7.
इंटरनेट क्या है ? इसकी खामियाँ बताइए।
उत्तर:
इंटरनेट एक अंतरक्रियात्मक माध्यम है। इसमें आप मूकदर्शक नहीं हैं। इसके माध्यम से आप सवाल-जवाब, बहस-मुबाहिसों में भाग ले सकते हैं, चैट कर सकते हैं, ब्लॉग बनाकर किसी बहस के सूत्रधार बन सकते हैं। इसमें प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन, किताब आदि के समस्त गुण मौजूद हैं। इसमें करोड़ों पन्नों की सामग्री भर दी गई है। यह सूचनाओं का विश्वव्यापी जाल है। इसकी रफ्तार का कोई जवाब नहीं है।
खामियाँ :
इसमें लाखों अश्लील पन्ने भर दिए गए हैं जिनका छोटे बच्चों के कोमल मन पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
इंटरनेट का दुरुपयोग किया जा सकता है।
2. पत्रकारिता
प्रश्न 1.
पत्रकारिता क्या है ? इसके कितने प्रकार हैं ?
उत्तर :
पत्रकारिता का संबंध सूचनाओं को संकलित और संपादित कर पाठकों तक पहुँचाना है।
समाचारों के संपादन में तथ्यपरकता, वस्तुपरकता, निष्पक्षता और संतुलन जैसे सिद्धांतों का ध्यान रखना पड़ता है लेकिन पत्रकारिता का संबंध केवल
समाचारों तक सीमित नहीं है, इसमें संपादकीय, लेख, कार्टून और फोटो भी शामिल हैं।
पत्रकारिता के प्रमुख प्रकार ये हैं :
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खोजपरक पत्रकारिता
वॉच डॉग पत्रकारिता
एडवोकेसी पत्रकारिता
विशेषीकृत पत्रकारिता
वैकल्पिक पत्रकारिता
प्रश्न 2.
पीत पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
समाचार मीडिया में हमेशा से ही सनसनीखेज या पीत पत्रकारिता और पेज थ्री पत्रकारिता की धाराएँ मौजूद रही हैं। पीत पत्रकारिता का प्रयोग किसी व्यक्ति के चरित्र हनन के लिए भी किया जाता है। इसे पत्रकारिता का घटिया रूप माना जाता है।
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प्रश्न 3.
पत्रकारिता के कौन-कौन से सिद्धांत हैं ?
उत्तर :
पत्रकारिता के सिद्धांत निम्नलिखित हैं :
तथ्यों की शुद्धता (Accuracy)
निष्पक्षता (Fairness)
स्रोत (Source)
वस्तुपरकता (Objectivity)
संतुलन (Balance)
प्रश्न 4.
पत्रकारिता के विविध आयामों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर :
पत्रकारिता के विविध आयाम इस प्रकार हैं :
संपादकीय – संपादकीय पृष्ठ को समाचार का महत्त्वपूर्ण पृष्ठ माना जाता है। इस पृष्ठ पर संपादक विभिन्न घटनाओं पर अपनी राय प्रकट करता है। इसे अखबार की आवाज माना जाता है।
फोटो पत्रकारिता – फोटो द्वारा की गई टिप्पणियों का असर व्यापक होता है।
कार्टून कोना – कार्टूनों के माध्यम से की गई सटीक टिप्पणियाँ पाठकों को छूती हैं।
रेखांकन/कार्टोग्राफ – ये समाचारों को न केवल रोचक बनाते हैं बल्कि टिप्पणी भी करते हैं।
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प्रश्न 5.
खोजपरक पत्रकारिता क्या होती है ?
उत्तर :
खोजपरक पत्रकारिता में गहराई से छानबीन करके ऐसे तथ्यों और सूचनाओं को सामने लाने की कोशिश की जाती है जिन्हें दबाने या छिपाने का प्रयास किया गया होता है। आमतौर पर खोजी पत्रकारिता सार्वजनिक महत्त्व के मामलों में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और गड़बड़ियों को उजागर करने का माध्यम है। खोजी पत्रकारिता का ही एक रूप ‘स्टिंग ऑपरेशन’ है।
प्रश्न 6.
वॉचडॉग पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
लोकतंत्र में पत्रकारिता और समाचार मीडिया का मुख्य उत्तरदायित्व सरकार के कामकाज पर निगरानी रखना है। यदि कहीं कोई गड़बड़ी हो तो उसका पर्दाफाश करना ही वॉचडॉग पत्रकारिता है। इसका दूसरा छोर सरकारी सूत्रों पर आधारित पत्रकारिता है।
3. विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन
प्रश्न 1.
प्रमुख जनसंचार माध्यम कौन-कौन से हैं ?
उत्तर :
प्रमुख जनसंचार माध्यम ये हैं :
प्रिंट मीडिया (अखबार)
टी.वी.
रेडियो इंटरनेट
प्रश्न 2.
प्रिंट (मुद्रित) माध्यम की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
मुद्रित माध्यमों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
छपे शब्दों में स्थायित्व होता है।
इन्हें आप आराम से और धीरे-धीरे पढ़ सकते हैं।
इन्हें पढ़ते हुए उन पर सोच सकते हैं।
समझ न आने पर दोबारा पढ़ सकते हैं।
किसी भी समाचार या रिपोर्ट को पहले या पीछे पढ़ सकते हैं।
इसमें किसी भी क्रम में पढ़ने की बाध्यता नहीं है।
इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और उसे संदर्भ की तरह प्रयोग कर सकते हैं।
यह लिखित भाषा का विस्तार है। इसमें लिखित भाषा की सभी विशेषताएँ शामिल हैं।
लिखित और मौखिक भाषा में सबसे बड़ा अंतर यह है कि लिखित भाषा अनुशासन की माँग करती है। लिखते समय भाषा, व्याकरण, वर्तनी और शब्दों के उपयुक्त इस्तेमाल का ध्यान रखना पड़ता है। इसे प्रचलित भाषा में लिखना पड़ता है ताकि अधिक से अधिक लोग इसे समझ सकें।
मुद्रित माध्यमों की एक अन्य प्रमुख विशेषता यह है कि यह चिंतन, विचार और विश्लेषण का माध्यम है। इसमें गंभीर और गूढ़ बातें लिखी जा सकती हैं, क्योंकि पाठक के पास इन्हें पढ़ने, समझने और सोचने का काफी समय होता है। मुद्रित माध्यम का पाठक साक्षर एवं विशेष योग्यता वाला व्यक्ति होता है।
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प्रश्न 3.
मुद्रित माध्यम की कमियाँ क्या हैं ?
उत्तर :
मुद्रित माध्यम की कमियाँ ये हैं :
यह माध्यम केवल साक्षरों के लिए है। निरक्षरों के लिए मुद्रित माध्यम किसी काम का नहीं है।
इस माध्यम में लिखने वालों को अपने पाठकों के भाषा – ज्ञान के साथ-साथ उनकी योग्यता का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है।
मुद्रित माध्यमों की एक सीमा है। वे रेडियो, टी.वी. या इंटरनेट की तरह तुरंत घटी घटनाओं को संचालित नहीं कर सकते। समाचारपत्र एक निश्चित अवधि पर प्रकाशित होते हैं, जैसे : अखबार 24 घंटे बाद ही छपता है।
अखबार या पत्रिका में समाचारों या रिपोर्ट के प्रकाशन की एक निश्चित समय-सीमा होती है जिसे ‘डेडलाइन’ कहा जाता है। इसके बाद कोई सामग्री प्रकाशन के लिए स्वीकार नहीं की जाती।
प्रश्न 4.
मुद्रित माध्यम में किन-किन बातों पर ध्यान देना अपेक्षित है ?
उत्तर :
मुद्रित (प्रिंट) माध्यम में निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना अपेक्षित है :
मुद्रित माध्यमों में लेखक को जगह (स्पेस) का पूरा ध्यान रखना चाहिए। समाचार, रिपोर्ट या फीचर की निर्धारित शब्द – सीमा को ध्यान में रखना जरूरी है। अखबार या पत्रिका में जगह सीमित होती है। महत्त्व और जगह की उपलब्धता को ध्यान में रखना चाहिए।
मुद्रित माध्यम के पत्रकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि छपने से पहले आलेख की सभी अशुद्धियों को दूर कर दिया गया हो। प्रकाशन के बाद गलती या अशुद्धि वहीं चिपक जाती है तथा उसका संशोधन अगले दिन के अखबार में ही हो पाता है।
संपादक के साथ एक पूरी संपादकीय टीम भी होती है। अतः अशुद्धियों को दूर करके सामग्री को प्रकाशन योग्य बनाया जाना जरूरी है।
भाषा, वर्तनी, व्याकरण और शैली पर विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रचलित भाषा का प्रयोग हो।
लेखन में सहज प्रवाह के लिए तारतम्यता को बनाए रखना जरूरी है।
रेडियो –
प्रश्न 5.
रेडियो समाचार – लेखन की बुनियादी बातों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
रेडियो एक श्रव्य माध्यम है। इसमें पुनः सुनने की सुविधा नहीं होती।
रेडियो – समाचार लेखन की बुनियादी बातें : रेडियो के लिए समाचार कॉपी तैयार करते हुए इन बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए :
1. साफ-सुथरी टाइप्ड कॉपी : रेडियो पर समाचार वाचक के लिए ऐसी कॉपी तैयार की जानी चाहिए जिसे पढ़ने में उसे कोई दिक्कत न हो। यदि समाचार कॉपी साफ-सुथरी और टाइप्ड नहीं होगी तो वाचक पढ़ते समय अटकेगा या गलत पढ़ सकता है। इससे श्रोताओं का ध्यान बँटता है और वे भ्रमित हो जाते हैं। इसके लिए :
समाचार कॉपी को कंप्यूटर पर ट्रिपल स्पेस में टाइप किया जाना चाहिए।
कॉपी के दोनों ओर पर्याप्त हाशिया छोड़ना चाहिए।
एक लाइन में अधिकतम 12-13 शब्द होने चाहिए।
पंक्ति के आखिर में कोई शब्द विभाजित नहीं होना चाहिए।
पृष्ठ के आखिर में लाइन अधूरी नहीं होनी चाहिए।
समाचार कॉपी में जटिल और उच्चारण में कठिन शब्द, संक्षिप्ताक्षर, अंक आदि नहीं लिखने चाहिए। इनके पढ़ने में जबान लड़खड़ा सकती है।
2. डेडलाइन, संदर्भ और संक्षिप्ताक्षर का प्रयोग : रेडियो में अखबारों की तरह डेडलाइन अलग से नहीं होती, बल्कि समाचार से ही गुँथी होती है। अखबार तो दिन में एक बार ही छपकर आता है जबकि रेडियो पर समाचार चौबीसों घंटे चलते रहते हैं। रेडियो समाचार में आज सुबह, आज दोपहर, आज शाम, आज तड़के आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह ……. बैठक कल होगी या …… बैठक कल हुई ……. का प्रयोग किया जाता है।
संक्षिप्ताक्षर के प्रयोग में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। अच्छी बात तो यह है कि इनके प्रयोग से बचा जाए। यदि बहुत आवश्यक ही हो तो समाचार से शुरू में पहले उसे पूरा दिया जाए, फिर सक्षिप्ताक्षर का प्रयोग किया जाए। इसमें संक्षिप्ताक्षर की लोकप्रियता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, जैसे : यूएनओ, यूनिसेफ, सार्क, आईसीआईसीआई बैंक।
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शब्दकोश और विश्वकोश
Communication
इंटरनेट और टेलीकॉम
प्रश्न 6.
रेडियो माध्यम की तीन खूबियों और तीन खामियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
खूबियाँ :
श्रव्य माध्यम।
मूलत: एक रेखीय माध्यम। इसमें शब्दों और ध्वनियों का महत्त्व होता है।
निरक्षरों के लिए उपयोगी।
खामियाँ :
पीछे लौटकर सुनने की सुविधा नहीं।
बुलेटिन के प्रसारण समय का इंतजार करना।
संक्षिप्ताक्षरों के प्रयोग में सावधानी।
टेलीविजन –
प्रश्न 7.
टेलीविजन कैसा माध्यम है ?
उत्तर :
टेलीविजन में दृश्यों का महत्त्व सबसे ज्यादा है। यह स्पष्ट है कि टेलीविज़न देखने और सुनने का माध्यम है। इसके लिए समाचार लिखते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि शब्द परदे पर दिखने वाले दृश्य के अनुकूल हों।
टेलीविज़न माध्यम अखबार और रेडियो दोनों माध्यमों से काफी अलग है।
टेलीविज़न के लेखन में कम से कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा खबर बताने की कला का इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए टी.वी. के लिए खबर
लिखने की बुनियादी शर्त दृश्य के साथ लेखन है।
यदि दृश्य आकाश के हैं तो बातें भी आकाश की होंगी, न कि समुद्र की।
प्रश्न 8.
दूरदर्शन पर समाचार देते समय किन-किन बातों पर ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर :
दूरदर्शन के समाचार वाचक में निम्नलिखित गुण होने चाहिए –
उसकी बोली में स्पष्टता हो।
उसे दृश्यों के साथ तालमेल बिठाना आना चाहिए !
सहजता के साथ समाचार पढ़ने चाहिए।
विषयानुकूल मुख-मुद्रा बनानी चाहिए।
अपनी वेशभूषा पर भी ध्यान देना चाहिए।
प्रश्न 9.
टी.वी. खबरों के कौन-कौन से चरण हैं ?
उत्तर :
टी.वी. खबरों के विभिन्न चरण-
फ्लैश या ब्रेकिंग न्यूज
फोन-इन
एंकर बाइट
एंकर पैकेज
ड्राई एंकर
एंकर विजुअल
लाइव
प्रश्न 10.
रेडियो और टेलीविजन के समाचारों की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
रेडियो और टेलीविजन के समाचारों की भाषा-शैली : इनके लेखन का कोई एक निश्चित फार्मूला नहीं हो सकता। प्रयोगशीलता भाषा को समृद्ध करती है और माध्यम को भी।
रेडियो और टी.वी. आम लोगों का माध्यम है। इनके प्रयोग करने वाले श्रोता दर्शक निरक्षर और साक्षर, संपन्न वर्ग के लोग तथा किसान-मजदूर सभी हैं। इन लोगों तक पहुँचने का माध्यम भाषा है अतः भाषा ऐसी होनी चाहिए जो सभी को आसानी से समझ में आ जाए, पर भाषा के स्तर के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए। अतः इन बातों को ध्यान में रखें
बोलचाल की भाषा का ही इस्तेमाल रेडियो, टी.वी. के समाचारों में करें।
वाक्य छोटे, सीधे और स्पष्ट रूप से लिखे जाएँ।
खबर की प्रमुख बातों को ठीक से समझने की कोशिश करें।
सरल, संप्रेषणीय एवं प्रभावी भाषा लिखें। इसकी जाँच के लिए समाचार लिखने के बाद उसे बोल-बोलकर पढ़ें।
भाषा में प्रवाह होना चाहिए।
प्रश्न 11.
रेडियो और टी.वी. समाचारों की भाषा-शैली में क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिएँ ?
उत्तर :
रेडियो और टी.वी. समाचार में भाषा और शैली के स्तर पर काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे अनेक शब्द हैं जिनका अखबार में धड़ल्ले से प्रयोग होता है पर रेडियो और टी.वी. में उनके प्रयोग से बचा जाता है। जैसे :
निम्नलिखित उपरोक्त, अधोहस्ताक्षरित और क्रमांक आदि शब्दों का प्रयोग टी.वी. रेडियो में मना है। ‘द्वारा’ शब्द के इस्तेमाल से भी बचा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए :
‘निरीक्षक द्वारा, नकल करते हुए दो छात्रों को पकड़ लिया।’
इसके स्थान पर :
‘निरीक्षक ने दो छात्रों को नकल करते हुए पकड़ लिया।’
अधिक स्पष्ट है।
तथा, एवं, अथवा, व, किंतु, परंतु, यथा आदि शब्दों के प्रयोग से बचा जाना चाहिए।
गैर जरूरी विशेषणों, सामासिक और तत्सम शब्दों, अतिरंजित उपमाओं आदि से भी बचना चाहिए। इनसे भाषा बोझिल बनती है।
जहाँ आवश्यक हो वहाँ मुहावरों का प्रयोग करना चाहिए। इससे भाषा आकर्षक और प्रभावी बनती है।
वाक्य छोटे हों।
एक वाक्य में एक ही बात कहने का धीरज हो।
वाक्यों में तारतम्य हो।
ऐसे शब्द प्रयोग किए जाएँ जिनका उच्चारण सहजता से हो सके।
जैसे – क्रय-विक्रय की जगह खरीद-बिक्री, ‘स्थानांतरण’ की जगह ‘तबादला’।
अधिक विद्वता दिखाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
इंटरनेट –
प्रश्न 12.
इंटरनेट क्या है ?
उत्तर :
इंटरनेट सिर्फ एक टूल या औजार है।
इसमें सूचना, मनोरंजन, ज्ञान और व्यक्तिगत या सार्वजनिक संवादों के आदान-प्रदान का माध्यम है।
जहाँ यह सूचनाओं के आदान-प्रदान का बेहतरीन साधन है, वहीं यह अश्लीलता, दुष्प्रचार और गंदगी फैलाने का माध्यम है।
प्रश्न 13.
इंटरनेट पत्रकारिता क्या है ?
उत्तर :
इंटरनेट पत्रकारिता को ऑनलाइन पत्रकारिता, साइबर पत्रकारिता या वेब पत्रकारिता भी कहा जाता है। जिनके पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है उन्हें कागज पर छपे अखबार अच्छे नहीं लगते। उन्हें हर घंटे दो घंटे में खुद को अपडेट करने की लत लग जाती है। भारत में कंप्यूटर इस्तेमाल करने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है अतः इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या भी हर साल 50-55 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इंटरनेट पर आप देश – विदेश की खबरें एक झटके में पढ़ लेते हैं। इसमें आप दुनियाभर की चर्चाओं – परिचर्चाओं में भाग ले सकते हैं और अखबारों की पुरानी फाइलें खंगाल सकते हैं।
इंटरनेट पर अखबारों का प्रकाशन या खबरों का आदान-प्रदान ही वास्तव में इंटरनेट पत्रकारिता है।
इंटरनेट पर यदि हम किसी भी रूप में खबरों, लेखों, चर्चा-परिचर्चाओं, बहसों, फीचर, झलकियों, डायरियों के जरिए अपने समय की धड़कनों को
महसूस करने और दर्ज करने का काम करते हैं तो वही इंटरनेट पत्रकारिता है।
आज प्रायः सभी प्रमुख अखबार पूरे के पूरे इंटरनेट पर उपलब्ध हैं।
कई प्रकाशन समूहों ने खुद को इंटरनेट पत्रकारिता से जोड़ लिया है।
इंटरनेट पत्रकारिता का तरीका थोड़ा भिन्न है।
प्रश्न 14.
इंटरनेट पत्रकारिता के उपयोग कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
इंटरनेट के उपयोग –
1. इंटरनेट का एक माध्यम या औजार के तौर पर इस्तेमाल यानी खबरों के संप्रेषण के लिए इंटरनेट का उपयोग।
2. रिपोर्टर अपनी खबर को एक जगह से दूसरी जगह तक ई-मेल के जरिए भेजने और समाचारों के संकलन, खबरों के सत्यापन और पुष्टिकरण में भी इसका इस्तेमाल करता है।
रिसर्च या शोध का काम तो इंटरनेट ने बेहद आसान कर दिया है।
पहले खबरों की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए ढेर सारी अखबारी कतरनों की फाइलों को ढूढ़ना पड़ता था। अब चंद मिनटों में इंटरनेट बिश्वव्यापी जाल से पृष्ठभूमि खोजी जा सकती है।
अब एक सेकंड में 56 किलोबाइट यानी लगभग 70 हजार शब्द भेजे जा सकते हैं।
प्रश्न 15.
इंटरनेट पत्रकारिता के इतिहास पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर:
इंटरनेट पत्रकारिता का इतिहास :
इस प्रकार की पत्रकारिता का पहला दौर 1982 से 1992 तक का था।
दूसरा दौर 1993 से 2001 तक का था।
इस समय इंटरनेट पत्रकारिता का तीसरा दौर चल रहा है। इसमें 2002 से अब तक की पत्रकारिता आती है।
पहले चरण में इंटरनेट खुद प्रयोग के धरातल पर था। तब ‘एओएल’ यानी अमेरिका ऑनलाइन जैसी चर्चित कंपनियाँ सामने आईं। यह प्रयोग का दौर था।
1983 से 2002 के मध्य सच्चे अर्थों में इंटरनेट पत्रकारिता की शुरुआत हुई। इस बीच :
इंटरनेट का तेजी से विकास हुआ।
नई वेब भाषा ‘एचटीएमएल’ (हाइपर टेक्स्ट माकर्डअप लैंग्वेज) आई।
ई-मेल आया।
इंटरनेट एक्सप्लोरर और नेटस्केप नाम के ब्राउजर आए।
‘ब्राउजर’ वह औजार है जिसके जरिए विश्वव्यापी जाल (इंटरनेट) में गोते लगाए जा सकते हैं।
लगभग सभी बड़े अखबार और टेलीविजन समूह इस विश्वव्यापी जाल में आए।
प्रश्न 16.
भारत में इंटरनेट पत्रकारिता की स्थिति क्या है ?
उत्तर :
भारत में इंटरनेट पत्रकारिता का अभी दूसरा दौर चल रहा है। यह दौर 2003 में शुरू हुआ था।
भारत में इंटरनेट पत्रकारिता की दृष्टि से ये साइटें बेहतर हैं :
द टाइम्स ऑफ इंडिया
हिंदू
एन.डी.टी.वी.
आउटलुक
हिंदुस्तान टाइम्स
ट्रिब्यून
आज तक
आई बी एन
इंडियन एक्सप्रेस
स्टेट्समैन
जी – न्यूज
ये साइटें नियमित रूप से अपडेट होती हैं :
हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, आउटलुक, इंडियन एक्सप्रेस, एन. डी. टी. वी., आज तक जी-न्यूज आदि।
भारत में सच्चे अर्थों में यदि कोई वेब पत्रकारिता कर रहा है तो वह ‘रीडिफ डॉट काम’, ‘इंडिया इंफोलाइन’ व ‘सीफी’ जैसी साइटें हैं।
प्रश्न 17.
हिंदी नेट संसार पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
हिंदी में पत्रकारिता ‘वेब दुनिया’ के साथ शुरू हुई। इंदौर के ‘नई दुनिया’ समूह से शुरू हुआ यह पोर्टल हिंदी का सम्पूर्ण पोर्टल है। इसके साथ ही हिन्दी के अखबारों ने भी विश्वजाल में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी।
हिंदी के इन अखबारों के वेब संस्करण शुरू हुए –
जागरण
अमर उजाला
नई दुनिया
हिंदुस्तान
भास्कर
राजस्थान पत्रिका
प्रभात खबर
राष्ट्रीय सहारा
प्रभासाक्षी नाम से शुरू हुआ अखबार प्रिंट रूप में न होकर सिर्फ इंटरनेट पर उपलब्ध है।
आज पत्रकारिता की दृष्टि से हिंदी की सर्वश्रेष्ठ साइट ‘बीबीसी’ की है।
प्रश्न 18.
हिंदी वेब पत्रकारिता की समस्या क्या है ?
उत्तर :
हिंदी वेब पत्रकारिता अभी अपने शैशव काल में ही है। इसकी सबसे बड़ी समस्या हिंदी के फोंट की है। अभी तक हमारे पास एक ‘की-बोर्ड’ नहीं है। डायनामिक फौंट की अनुपलब्धता के कारण हिंदी की ज्यादातर साइटें खुलती ही नहीं हैं। अब माइक्रोसॉफ्ट और वेब दुनिया ने यूनिकाड फौंट बनाए हैं। अभी हिंदी के की-बोर्ड का मानकीकरण होना जरूरी है।
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