कक्षा परीक्षण सूर के पद
1.सूरदास साकार भक्ति की कृष्ण भक्ति काव्य धारा के प्रमुख कवि हैं जिनके ग्रंथों की भाषा बृज है।
2.भ्रमरगीत हिंदी साहित्य, विशेषकर [सूरदास के सूरसागर] में वर्णित वह प्रसिद्ध प्रसंग है, जिसमें गोपियाँ उद्धव द्वारा लाए गए निराकार ब्रह्म के ज्ञान-योग संदेश को अस्वीकार कर, श्रीकृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम, भक्ति और विरह व्यथा को एक 'भ्रमर' (भौरे) को माध्यम बनाकर व्यंग्यात्मक ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। यह निर्गुण पर सगुण की विजय का प्रतीक है।
3.वियोग शृंगार (विप्रलंभ शृंगार) में नायक-नायिका के बिछड़ने, प्रेम की तीव्रता और विरह के दुःख का वर्णन होता है। यहाँ प्रेमीजन पास न होकर भी मानसिक रूप से जुड़े रहते हैं। इसमें रति (प्रेम) स्थाई भाव, विरह की दशाएं (जैसे- अभिलाषा, चिंता, स्मृति) और आश्रय (प्रेमी/प्रेमिका) के भाव प्रमुख होते हैं
4.सगुण कृष्ण के प्रति समर्पण: गोपियों ने कृष्ण को हारिल पक्षी की लकड़ी के समान (मन, कर्म और वचन से) अपने हृदय में बसाया है। वे कृष्ण के रूप, मुस्कान और मुरली की धुन से प्रेम करती थीं।आत्मसमर्पण की पराकाष्ठा: गोपियों ने सामाजिक रीति-रिवाजों और लोक-लाज को त्यागकर कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण किया। उनका प्रेम निःस्वार्थ और दिव्य था, जिसे "मदन" कहा गया है।
5. गुड़- कृष्ण, चीटी -गोपी,
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