उत्तर- सांप सोच रहा था कि आसमान में अवश्य ही कोई अद्भुत चीज है जिसे पाने के लिए बाज इतना उत्साहित था। सांप उस छुपे राज़ को जानना चाहता था । अतः साप ने उड़ने की कोशिश की।
कैदी और कोकिला (माखनलाल चतुर्वेदी) वीर सावरकर जरूर पढ़ें। ऊपर उन्हीं का कैदी नंबर बिल्ला या वेज है कितनी यातनाएं सही है, देश के शहीदों ने, जाने पढ़कर और वीडियो देखकर काले पानी की सजा भोग रहे स्वतंत्रता सेनानियों की एक जी न्यूज़ की रिपोर्ट देखें किस तरह बलिया रानियों ने यातनाएं झेली थी ।तब जाकर यह देश स्वतंत्र हुआ लिंक को ओपन करके देखें https://youtu.be/adJeHbHieyk वीर सावरकर पर फिल्माई गई इस फिल्म को को भी देखें https://youtu.be/DEpRT5KiIlA विनायक_दामोदर_सावरकर जी का #अंडमान_निकोबार का कैदी बिल्ला। जिस पर लिखा है- कैदी नंबर 32778, (अर्थात उससे पूर्व इतने लोग वहां सजा हेतु जा चुके थे) धाराएं- 121, 121A, 109,302। सजा- 50 वर्ष 24-12-1910 से 23-12-1960 तक (यह सजा जब बताई गई तो सावरकर ने तन कर कहाँ था कि इतने ...
उदाहरण नंबर 1 उदाहरण नंबर दो उदाहरण नंबर 3 उदाहरण नंबर 4 उदा नंबर 5 उदाहरण नंबर 6 उदाहरण नंबर 7 उदाहरण नंबर 8 उदाहरण नंबर 9 उदाहरण नंबर 10 विभिन्न प्रकार के विषयों पर विद्यार्थियों को विज्ञापन लेखन केेे लिए प्रश्न आते हैं। वह अलग-अलग क्षेत्रों के हो सकते हैं। किसी प्रोडक्ट की बिक्री के लिए भी हो सकते हैं। शैक्षिक भीी हो हो सकते हैं नैतिक भी होो सकते अपनी बेटीी द्वारा बनााया गया एक विज्ञाापन चित्र प्रस्तुत है - जिसका विषय है बेटी बचाओ
प्रथम पद्यांश चौपाई - नाथ संभुधनु भजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।। आयेसु काह कहिय किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।। सेवक हो जो करें सेवकाई । अरि करनी परि करिय लराई।। सुनहुं राम जेहि सिवधनु तोरा। सहस्रबाहु सम हो रिपु मोरा।। सो बिलगाइ बिहाइ समाजा। नत मारे जेहंइ सब राजा।। सुनि मुनि वचन लखन मुसकाने । बोले परसु धरहि अवमाने।। बहु धनुही तोरी लरिकाई। कबहु न अब रिस कीन्हि गोसाईं।। तेहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुन रिसाय कह भृगुकुल केतु।। दो ० - रे नृप बालक काल बस, बोलत तोहि न संभार । धनुही सम त्ररिपुरारि धनु, विदित सकल संसार। सरल भावार्थ- परशुराम के पूछे जाने पर राम ने विनम्रतापूर्वक कहा- हे नाथ-धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा ।उस दास के लिए क्या आदेश है। राम की यह विनम्रता पूर्ण वाणी सुनकर परशुराम बोले -सेवक वह होता है ,जो सेवा करता है। दुश्मन की करनी करने वाले से तो युद्ध की अपेक्षा है। जिसने भी यह धनुष तोड़ा है मेरे लिए वह सहस्त्रबाहु के समान शत्रु है। मैं उस...
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