खानपान की बदलती तस्वीर 7 हिन्दी


  मिश्रित थाली।



1. खानपान की मिश्रित संस्कृति से लेखक का क्या तात्पर्य है अपने घर के उदाहरण देकर स्पष्ट करें।

उत्तर-

खानपान की मिश्रित संस्कृति से तात्पर्य है सभी प्रदेशों के खानपान के मिश्रित रूप। अर्थात आज भारत के किसी भी कोने में चले जाएं हर एक स्थान पर हर एक प्रदेश के प्रसिद्ध खाद्य पदार्थ मिल ही जाते हैं ।अब हमारी रसोई में दक्षिण का इडली डोसा भी शामिल हो चुका है ।मुंबई की पाव भाजी भी शामिल हो चुकी है ।गुजरात का ढोकला भी शामिल हो चुका है, और राजस्थान का चूरमा और बिहार की लिट्टी ।यह सब कुछ हमारी आदतों में शामिल हो चुका है ।देश के ही नहीं विदेशी खाद्य पदार्थ  अब हमारे भोजन में शामिल हो चुके हैं जैसे चाइना की नूडल ,मोमोज।




फायदे



नुकसान



3.खानपान के मामले में स्थानीयता का क्या अर्थ है ?

स्थानीयता का तात्पर्य है  वे  व्यंजन जो थानीयता के आधार पर  मशहूर हैं ।जैसे- मुंबई का पाव भाजी, दिल्ली के छोले कुलचे ,मथुरा के पेड़े ,आगरे का पेठा, नमकीन, गुजरात का ढोकला ,बिहार की लिट्टी ,यह अपने-अपने स्थानों के मशहूर खाद्य पदार्थ हैं हैं।
   


 

 

 



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