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ये आवश्यक जानकारी खुद तक न रखें दूसरों को भी अवेयर करें

 *आवश्यक मेसेज* सभी यह information पढ़े और शेयर करें। *शरीर में ब्लड प्रेशर.* *120 / 80 -- Normal *  *130 / 85 -- Normal (Control)* *140 / 90 -- High थोड़ा बढ़ा हुआ*  *150 / 95 -- Very High बहुत ज्यादा* *Oxygen Leval)* *ऑक्सिजन लेव्हल* ऑक्सिजन ऑक्सिमीटर से चेक करने पर.. *94 - Normal * *95, 96, 97 se 100 oxygen level बहुत अच्छा.* *90 ते 93 ऑक्सिजन लेव्हल जरा कम* *80 ते 89 ऑक्सिजन लेव्हल बहुत कम* डॉक्टर की सलाह पर एडमिट होना चाहिए. *PULSE*  *72 Per Minute (Standard) बहुत अच्छा.* *60 --- 80 P.M. (Normal) मध्यम* *90 ते 120 Pulse बढ़ा हुआ*  *TEMPERATURE* डिजिटल थरमामीटर से चेक करने पर . *92 ते 98.6 F (Fever) तक बुखार नही (Normal)* *99.0 F थोडा बुखार* *100 .F से 102 F ज्यादा बुखार* HRCT या chest CT SCAN करने पर. 1. HRCT score: 0 - 8 (Mild Infection).  2.HRCT score: 9 - 18 (Moderate Infection).  3. HRCT score: 19 - 25 गंभीर (Severe Infection) .  👇 उपचार : 1. Mild infections में नार्मल मेडिसिन से ठीक हो सकते है. 2. सेवियर इंफेक्शन के लिए ऑक्सिजन और वेंटि...

जनसंचार और मध्यम महत्वपूर्ण प्रश्न

अति महत्वपूर्ण प्रश्न प्रश्न 1: प्रमुख जनसंचार माध्यम कौन-से हैं? उत्तर – जनसंचार के प्रमुख माध्यम हैं-समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, फ़िल्म, टेलीविजन, रेडियो, टेलीफोन, इंटरनेट, पुस्तकें आदि। प्रश्न 2: प्रिंट माध्यम से आप क्या समझते हैं? उत्तर – संचार के जो साधन प्रिंट अर्थात छपे रूप में लोगों तक सूचनाएँ पहुँचाते हैं, उन्हें प्रिंट (मुद्रित) माध्यम कहा जाता है। प्रश्न 3: प्रिंट माध्यम के दो प्रमुख साधन कौन-कौन-से हैं? उत्तर – प्रिंट माध्यम के दो प्रमुख साधन है- समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ प्रश्न 4: प्रिंट मीडिया (माध्यम) का महत्व हमेशा क्यों बना रहेगा? उत्तर – वाणी, विचारों, सूचनाओं, समाचारों आदि को लिखित रूप में रिकॉर्ड करने का आरंभिक साधन होने के कारण प्रिंट मीड़िया का महत्त्व हमेशा बना रहेगा। प्रश्न 5: पत्रकारिता किसे कहते हैं? उत्तर – प्रिंट (मुद्रित), रेडियो, टेलीविजन या इंटरनेट किसी भी माध्यम से खबरों के संचार को पत्रकारिता कहते हैं। प्रश्न 6: भारत में अखबारी पत्रकारिता की शुरुआत कब और कहाँ से हुई? उत्तर – भारत में अखबारी पत्रकारिता की शुरुआत सन 1780 में जेम्स ऑगस्ट हिकी के ‘बंगाल गजट’ ...

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा

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गुरु से कपट मित्र से चोरी(हेराफेरी) या हो अंधा या हो कोढ़ी।। कर्म का फल जाता नहीं , सुदामा के एक मुट्ठी चने की हेराफेरी ने  ही जीवन भर की दरिद्रता दी , जबकि परम ज्ञानी परम भक्त तत्ववेत्ता थे।  साधारण मनुष्य कर्म फल से पीछा कैसे छुड़ा सकता है? फिर भी मनुष्य हेराफेरी से बाज़ नहीं आता है। अपनी मूर्खता और अज्ञानता को बुद्धिमानी समझ नित हेराफेरी कर जीवन पर बोझ बढ़ाता जाता है। स्वर्ग हो या नर्क सब यहीं है।   कर्म प्रधान विश्व रुचि राखा ।। जो जस करहि, सो तब फल चाखा।। अतः सन्मार्ग का ही अनुसरण करना जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। क्यों कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन। जैसी होगी शुद्धि,  वैसी होगी बुद्धि। जिस तरह एक सड़ा हुआ फल पूरी पेटी के फलों को सड़ा देता है, ठीक उसी तरह गलत ढंग से कमाया  या बचाया हुआ एक रूपया भी किसी न किसी तरह बर्बादी की ओर खींच ले जाता है और लाखों  का धन डुबा देता है और फिर लोगों को कहते सुना है न जाने ईश्वर हमें क्यों कष्ट दे रहा है ?हमने तो कुछ किया नहीं। जबकि मूल में कारण सिर्फ और सिर्फ होता है संचित कर्मों का परिणाम, जिसे ज्ञा...