वाच्य का अर्थ प्रकार और पहचान और प्रयोग कृत वाच्य कर्मवाच्य भाववाच्य


**https://youtu.be/p0vvJUhXBS4वाच्य
https://youtu.be/p0vvJUhXBS4

किसी भी बात को कहने का तरीका या ढंग वाच्य कहलाता है। हर एक व्यक्ति का बात कहने का अपना-अपना  ढंग या तरीका होता है हिंदी भाषा में बात को दो या तीन तरह से कहा जाता है ।यह कहने का ढंग ही वाच्य कहलाता है वाच्य के तीन भेद हैं ।

1. कर्तृवाच्य ।
 2 .कर्म वाच्य ।
3 .भाव वाच्य।


 कर्तृ वाच्य
जिन वाक्यों में कर्ता की प्रधानता होती है वह कर्तृवाच्य कहलाते हैं।
जैसे चिड़िया उड़ रही है।
 बच्चे निबंध लिख रहे हैं ।
बालक बिस्तर पर सो रहा है ।
बच्चे घर जा रहे हैं।

वाक्यों में कर्ता की प्रधानता है, कर्तृवाच्य हैं।

कर्मवाच्य
जिन वाक्यों में कर्म की प्रधानता होती है, वे कर्मवाच्य होते हैं।
 इसकी प्रमुख पहचान है इन वाक्यों में के द्वारा जुड़ा होता है।
 जैसे -चिड़ियों के द्वारा उड़ा जाता है ।
बच्चों के द्वारा घर जाया जाता
है।
 बच्चे द्वारा निबंध लिखा जाता है ।
बालक के द्वारा बिस्तर पर सोया जाता है ।
सब लोगों के द्वारा अखबार पढ़ा जाता है।


भाव वाच्य
जिन वाक्यों में भाव की प्रधानता होती है, क्रिया की प्रधानता होती है ,वे भाव वाच्य कहलाते हैं जैसे उपरोक्त उदाहरणों को यदि हम भाव वाच्य में बदलना चाहे तो वाक्य होंगे।

चिड़ियों से उड़ा जाता है।
 बच्चों से घर जाया जाता है।
 बच्चे से निबंध लिखा जाता है ।
बालक से बिस्तर पर सोया जाता है।
 लोगों से अखबार पढ़ा जाता है।

कर्ता वाच्य से कर्मवाच्य में बदलना
वे लोग मुझे बेईमान समझते हैं=>उन लोगों के द्वारा मुझे बेईमान समझा जाता है।
सब लोग व्यायाम करते हैं=>सब लोगों द्वारा व्यायाम किया जाता है।
तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखी=>तुलसीदास के द्वारा रामचरितमानस लिखी गई।

कृत से भाव वाच्य में बदलना
मैं अब चल नहीं सकता =>मुझसे अब चला नहीं जाता
आओ सब बैठते हैं =>आओ अब बैठा जाए
वह ठंडे पानी में खड़ा नहीं हुआ =>उससे ठंडे पानी में खड़ा नहीं हुआ गया
उ ठो जरा घूमने चलते हैं=>उठो घूमने चला जाए
 कितने बजे सोए=>कितने बजे सोया जाए
मैं इस पलंग पर नहीं सोऊंगा =>मुझसे इस पलंग पर नहीं सोया जाएगा।

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